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शरजील उस्मानी जेल से रिहा, जुबेरी की जमानत मंजूर
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फरहान जुबैरी।
- फोटो : CITY OFFICE
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर 15 दिसंबर 2019 को हुए बवाल के दो मुख्य आरोपियों को न्यायालय से जमानत मिल गई है। इनमें से पूर्व एएमयू छात्र शरजील उस्मानी को सत्र न्यायालय से दो दिन पहले जमानत मिलने के बाद मंगलवार को रिहा कर दिया गया। वहीं, दूसरे आरोपी एएमयू छात्र फरहान जुबेरी की हाईकोर्ट से दो दिन पहले जमानत मंजूर हुई है। उसकी रिहाई औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण अटकी हुई हैं। बता दें कि दोनों इस बवाल में साजिश के मुख्य आरोपी के रूप में भी चिन्हित किए गए थे। इनकी जमानत पर छात्रों में खुशी की लहर है। बुधवार को छात्रों और छात्र नेताओं ने एक दूसरे को बधाई दी और इसे अपने संघर्ष की जीत बताया।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ सोशल वर्क के छात्र फरहान जुबेरी की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली है और उनकी रिहाई औपचारिकताओं में फंसी हुई है। कुल 11 मुकदमों में जमानत औपचारिकताओं के बाद किसी भी कार्य दिवस में जेल से रिहाई होना तय है। बुधवार को न्यायालय में अवकाश घोषित था, इसलिए इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। दूसरी ओर, एएमयू में 15 दिसंबर के बवाल में ही आरोपी शरजील उस्मानी की गत रात जेल से रिहाई हो गई।
बताया गया है कि रिहा होने के बाद वह अपने परिवार के साथ हैं। शरजील एक ही मुकदमे आरोपी था। उसकी जमानत सत्र न्यायालय से हुई है। शरजील की जमानत व रिहाई की पुष्टि छात्र नेता व एएमयू बवाल मामले में पैरोकारी कर रहे आमिर मिंटो ने की है। वहीं, फरहान जुबेरी और डॉ. कफील के अधिवक्ता इरफान गाजी (एडवोकेट) ने बताया कि फरहान जुबेरी की जल्द ही रिहाई हो जाएगी। शरजील रिहा हो चुके हैं। गौरतलब हो कि शरजील और फरहान अलीगढ़ की जेल में बंद थे।
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शरजील उस्मानी के पिता प्रोफेसर तारिक उस्मानी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं। शरजील उस्मानी को 10 जुलाई को एटीएस ने आजमगढ़ स्थित उसके चाचा के घर से गिरफ्तार किया था और कोर्ट में पेश किया था। इसके बाद शरजील को जेल भेज दिया गया। दिसंबर 2019 में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की बाबरी से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद शरजील उस्मानी चर्चा में आए। बताया जाता है कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में देशभर में प्रदर्शन कर रहे जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र नेताओं के भी संपर्क में रहे। शरजील उस्मानी के ऊपर हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं में चार मुकदमे दर्ज हैं।
इन धाराओं में दर्ज हैं सभी मुकदमे
. धारा 147, 148, 149, 153, 153 ए, 188, 307, 322, 353, 506, 67 आईटी एक्ट
फरहान को अन्य छात्र रवीश अली के साथ किया था गया गिरफ्तार
अलीगढ़। मूलरूप से बदायूं के कस्बा इस्लामनगर के मोहल्ला चौक के रहने वाले फरहान जुबेरी पुत्र अजमत अली खान जुबेरी मौजूदा समय में थाना सिविल लाइन के मेडिकल रोड स्थित जकरिया मार्केट में अल करीम प्लाजा में रहते हैं। फरहान जुबेरी मास्टर ऑफ सोशल वर्क के छात्र हैं और उन पर 15 दिसंबर 2019 के एएमयू में हुए बवाल में शामिल होने का आरोप है। फरहान जुबेरी पर पुलिस पर पथराव करनेए जानलेवा हमला करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने संबंधी भाषण देने, माननीयों का पुतला फूंकने का कृत्य करने जैसे 11 मुकदमे दर्ज हैं। इन मुकदमों में से एक में फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है। चार में चार्जशीट लग चुकी है। जबकि अन्य मुकदमे अभी विवेचना के अधीन हैं। 28 मार्च 2020 को फरहान जुबेरी को एक और छात्र रवीश अली खान के साथ गिरफ्तार किया गया। बाद में रवीश अली खान को छोड़ दिया गया और फरहान जुबेरी को जेल भेज दिया गया।
इन धाराओं में दर्ज हैं मुकदमे
धारा 188, 341, 153 ए, यूपी स्पेशल पावर एक्ट, 147, 342, 427, 336, 352, 353, 332, 504, क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट, 148, 149, 336, 307, 506, 7 क्रिमिनल एक्ट
किस धारा में क्या है
188 लोक सेवक की अवमानना
341 किसी को गलत तरीके से रोकना
153 ए किसी जुलूस या प्रदर्शन में हथियार या हथियार जैसी वस्तु लेकर चलनाए
यूपी स्पेशल पावर एक्टए प्रदेश सरकार का अपना एक विशेष प्रावधान
147 दंगा उपद्रव व्यवस्था को बिगाड़ना
153 दंगे भड़काना
342 किसी व्यक्ति को आपराधिक भावना से बंधक बनाना
427 ऐसा कृत्य करना जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा हो
336 उतावलेपन में किया गया ऐसा कार्य जिससे मानव जीवन को खतरा हो
352 बिना उकसावे के ही किसी पर हमला बोल देना
353 लोक सेवक पर हमला
332 लोक सेवक को उसका कार्य करने से रोकना
504 शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना क्त्रिस्मिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट
148 दंगे के समय घातक हथियार साथ रखना
149 अवैध रूप से समूह में इकट्ठा होना
307 हत्या का प्रयास करना
506 जानबूझकर उकसानाए जिससे शांति भंग हो
7 क्त्रिस्मिनल एक्ट दो से अधिक वार छेड़खानी की घटनाओं में पकड़े जाने पर यह एक्ट लग जाएगा
बोले छात्र नेता
पहले डॉ कफील खान के साथ हाईकोर्ट ने इंसाफ किया और अब निचली अदालतों में संघर्ष करने वालों के हक की बात आगे बढ़ाई है। इससे पता चलता है कि सरकार की कार्रवाई गलत थी।
हाईकोर्ट ने कहा है कि डॉ. कफील खान को असंवैधानिक तरीके से रासुका लगा कर जेल में रखा गया है। हमारी उत्तर प्रदेश सरकार से मांग हैं कि उन तमाम अधिकारियों पर कार्रवाई की
जाए जिन्होंने असंवैधानिक तरीके से डॉ. कफील खान पर एनएसए लगाई थी। . नदीम अंसारी पूर्व उपाध्यक्ष छात्र संघ एएमयू
हमें पहले से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। हम यह जानते थे कि जो भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उनमें साक्ष्यों का अभाव है और वह हुकूमत के इशारे पर किए गए हैं। हम न्यायपालिका के फैसलों का स्वागत करते हैं और सम्मान करते हैं। . आमिर मिंटू, छात्र नेता
फरहान जुबेरी और शरजील उस्मानी के साथ अदालत ने इंसाफ किया है। पूरे विश्वविद्यालय सहित अलीग बिरादरी में खुशी की लहर है। ऐसे अन्य मामलों में भी अदालत से ऐसा ही रुख अपनाए जाने की उम्मीद है। .मोहम्मद शिकोह, छात्र नेता, एएमयू
बदले हालात पर एएमयू प्रशासन चौकन्ना
अलीगढ़। पहले हाईकोर्ट से डॉ. कफील कि रिहाई और उसके बाद 2 छात्रों की अदालत से जमानत के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन चौकन्ना हो गया है। एएमयू के प्रॉक्टर प्रोफेसर वसीम अली ने बताया कि अच्छी बात है कि छात्रों के साथ इंसाफ हो रहा है लेकिन हम सतर्क हैं कि कहीं इस अवसर पर बाहरी तत्व कैंपस में आकर कोई गड़बड़ी न कर दें। क्योंकि एएमयू कैंपस इस समय छात्रों से पूरी तरह खाली है। बाहरी तत्व कैंपस में आते हैं जिससे उनकी गतिविधि को लेकर फिर सवाल खड़े होते हैं। इसलिए हम पूरी तरह चौकन्ना हैं।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ सोशल वर्क के छात्र फरहान जुबेरी की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली है और उनकी रिहाई औपचारिकताओं में फंसी हुई है। कुल 11 मुकदमों में जमानत औपचारिकताओं के बाद किसी भी कार्य दिवस में जेल से रिहाई होना तय है। बुधवार को न्यायालय में अवकाश घोषित था, इसलिए इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। दूसरी ओर, एएमयू में 15 दिसंबर के बवाल में ही आरोपी शरजील उस्मानी की गत रात जेल से रिहाई हो गई।
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बताया गया है कि रिहा होने के बाद वह अपने परिवार के साथ हैं। शरजील एक ही मुकदमे आरोपी था। उसकी जमानत सत्र न्यायालय से हुई है। शरजील की जमानत व रिहाई की पुष्टि छात्र नेता व एएमयू बवाल मामले में पैरोकारी कर रहे आमिर मिंटो ने की है। वहीं, फरहान जुबेरी और डॉ. कफील के अधिवक्ता इरफान गाजी (एडवोकेट) ने बताया कि फरहान जुबेरी की जल्द ही रिहाई हो जाएगी। शरजील रिहा हो चुके हैं। गौरतलब हो कि शरजील और फरहान अलीगढ़ की जेल में बंद थे।
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शरजील उस्मानी के पिता प्रोफेसर तारिक उस्मानी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं। शरजील उस्मानी को 10 जुलाई को एटीएस ने आजमगढ़ स्थित उसके चाचा के घर से गिरफ्तार किया था और कोर्ट में पेश किया था। इसके बाद शरजील को जेल भेज दिया गया। दिसंबर 2019 में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की बाबरी से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद शरजील उस्मानी चर्चा में आए। बताया जाता है कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में देशभर में प्रदर्शन कर रहे जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र नेताओं के भी संपर्क में रहे। शरजील उस्मानी के ऊपर हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं में चार मुकदमे दर्ज हैं।
इन धाराओं में दर्ज हैं सभी मुकदमे
. धारा 147, 148, 149, 153, 153 ए, 188, 307, 322, 353, 506, 67 आईटी एक्ट
फरहान को अन्य छात्र रवीश अली के साथ किया था गया गिरफ्तार
अलीगढ़। मूलरूप से बदायूं के कस्बा इस्लामनगर के मोहल्ला चौक के रहने वाले फरहान जुबेरी पुत्र अजमत अली खान जुबेरी मौजूदा समय में थाना सिविल लाइन के मेडिकल रोड स्थित जकरिया मार्केट में अल करीम प्लाजा में रहते हैं। फरहान जुबेरी मास्टर ऑफ सोशल वर्क के छात्र हैं और उन पर 15 दिसंबर 2019 के एएमयू में हुए बवाल में शामिल होने का आरोप है। फरहान जुबेरी पर पुलिस पर पथराव करनेए जानलेवा हमला करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने संबंधी भाषण देने, माननीयों का पुतला फूंकने का कृत्य करने जैसे 11 मुकदमे दर्ज हैं। इन मुकदमों में से एक में फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है। चार में चार्जशीट लग चुकी है। जबकि अन्य मुकदमे अभी विवेचना के अधीन हैं। 28 मार्च 2020 को फरहान जुबेरी को एक और छात्र रवीश अली खान के साथ गिरफ्तार किया गया। बाद में रवीश अली खान को छोड़ दिया गया और फरहान जुबेरी को जेल भेज दिया गया।
इन धाराओं में दर्ज हैं मुकदमे
धारा 188, 341, 153 ए, यूपी स्पेशल पावर एक्ट, 147, 342, 427, 336, 352, 353, 332, 504, क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट, 148, 149, 336, 307, 506, 7 क्रिमिनल एक्ट
किस धारा में क्या है
188 लोक सेवक की अवमानना
341 किसी को गलत तरीके से रोकना
153 ए किसी जुलूस या प्रदर्शन में हथियार या हथियार जैसी वस्तु लेकर चलनाए
यूपी स्पेशल पावर एक्टए प्रदेश सरकार का अपना एक विशेष प्रावधान
147 दंगा उपद्रव व्यवस्था को बिगाड़ना
153 दंगे भड़काना
342 किसी व्यक्ति को आपराधिक भावना से बंधक बनाना
427 ऐसा कृत्य करना जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा हो
336 उतावलेपन में किया गया ऐसा कार्य जिससे मानव जीवन को खतरा हो
352 बिना उकसावे के ही किसी पर हमला बोल देना
353 लोक सेवक पर हमला
332 लोक सेवक को उसका कार्य करने से रोकना
504 शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना क्त्रिस्मिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट
148 दंगे के समय घातक हथियार साथ रखना
149 अवैध रूप से समूह में इकट्ठा होना
307 हत्या का प्रयास करना
506 जानबूझकर उकसानाए जिससे शांति भंग हो
7 क्त्रिस्मिनल एक्ट दो से अधिक वार छेड़खानी की घटनाओं में पकड़े जाने पर यह एक्ट लग जाएगा
बोले छात्र नेता
पहले डॉ कफील खान के साथ हाईकोर्ट ने इंसाफ किया और अब निचली अदालतों में संघर्ष करने वालों के हक की बात आगे बढ़ाई है। इससे पता चलता है कि सरकार की कार्रवाई गलत थी।
हाईकोर्ट ने कहा है कि डॉ. कफील खान को असंवैधानिक तरीके से रासुका लगा कर जेल में रखा गया है। हमारी उत्तर प्रदेश सरकार से मांग हैं कि उन तमाम अधिकारियों पर कार्रवाई की
जाए जिन्होंने असंवैधानिक तरीके से डॉ. कफील खान पर एनएसए लगाई थी। . नदीम अंसारी पूर्व उपाध्यक्ष छात्र संघ एएमयू
हमें पहले से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। हम यह जानते थे कि जो भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उनमें साक्ष्यों का अभाव है और वह हुकूमत के इशारे पर किए गए हैं। हम न्यायपालिका के फैसलों का स्वागत करते हैं और सम्मान करते हैं। . आमिर मिंटू, छात्र नेता
फरहान जुबेरी और शरजील उस्मानी के साथ अदालत ने इंसाफ किया है। पूरे विश्वविद्यालय सहित अलीग बिरादरी में खुशी की लहर है। ऐसे अन्य मामलों में भी अदालत से ऐसा ही रुख अपनाए जाने की उम्मीद है। .मोहम्मद शिकोह, छात्र नेता, एएमयू
बदले हालात पर एएमयू प्रशासन चौकन्ना
अलीगढ़। पहले हाईकोर्ट से डॉ. कफील कि रिहाई और उसके बाद 2 छात्रों की अदालत से जमानत के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन चौकन्ना हो गया है। एएमयू के प्रॉक्टर प्रोफेसर वसीम अली ने बताया कि अच्छी बात है कि छात्रों के साथ इंसाफ हो रहा है लेकिन हम सतर्क हैं कि कहीं इस अवसर पर बाहरी तत्व कैंपस में आकर कोई गड़बड़ी न कर दें। क्योंकि एएमयू कैंपस इस समय छात्रों से पूरी तरह खाली है। बाहरी तत्व कैंपस में आते हैं जिससे उनकी गतिविधि को लेकर फिर सवाल खड़े होते हैं। इसलिए हम पूरी तरह चौकन्ना हैं।

शरजील उस्मानी।- फोटो : CITY OFFICE