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अलीगढ़ः पशुओं की नस्ल सुधारने में कारगर है कृत्रिम गर्भाधान
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जिले में पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की योजना कारगर साबित हो रही है। अब तक करीब साढ़े चार लाख पशु पालकों ने पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराया है। पशुपालन विभाग पशु पालकों को योजना की जानकारी देने के साथ ही नस्ल सुधार के परिणामों के बारे में भी जागरूक कर रहा है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की कृषि व पशु पालन से दोगुनी आय करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन चला रही है। इसमें पशुओं की नस्ल सुधारने का अभियान शुरू किया है। दुधारू पशुओं की कई ऐसी नस्ल हैं, जो कम दूध देती हैं। प्रदेश में देसी गाय की नस्ल खराब हो चुकी है। इसके पीछे क्रॉस ब्रीड माना गया है। नस्ल सुधार के लिए पशुओं में निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है।
पशुपालन विभाग के सीवीओ डॉ. चंद्रवीर सिंह ने बताया कि गर्भाधान से पहले 30 फीसद तक पशुओं की नस्ल में बदलाव होता है। दूसरी बार में यह 50 फीसद तक हो जाता है। छठवीं पीढ़ी में पशुपालकों को शुद्ध नस्ल मिलेगी। कई शोध में इसकी प्रमाणिकता भी साबित हो चुकी है। पशुपालक इस बात का खास ध्यान रखें कि जिस नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराया है, उसी नस्ल से लगातार छह बार तक गर्भाधान कराएं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत जिले में जनवरी से लेकर अब तक करीब साढ़े चार लाख पशुओं का निशुल्क गर्भाधान किया जा चुका है। पशुपालकों की सुविधा के लिए यह योजना उनके घर पर उपलब्ध करायी जा रही है।
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ये है स्थिति
- जिले में करीब नौ लाख महीष वंशी व साढ़े तीन लाख गोवंशीय हैं
- जिले भर में कार्यरत हैं 44 पशु चिकित्सालय, 66 डिस्पेंसरी
- 122 न्याय पंचायतों पर कार्य कर रहे हैं 125 पैरावेट
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की कृषि व पशु पालन से दोगुनी आय करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन चला रही है। इसमें पशुओं की नस्ल सुधारने का अभियान शुरू किया है। दुधारू पशुओं की कई ऐसी नस्ल हैं, जो कम दूध देती हैं। प्रदेश में देसी गाय की नस्ल खराब हो चुकी है। इसके पीछे क्रॉस ब्रीड माना गया है। नस्ल सुधार के लिए पशुओं में निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है।
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पशुपालन विभाग के सीवीओ डॉ. चंद्रवीर सिंह ने बताया कि गर्भाधान से पहले 30 फीसद तक पशुओं की नस्ल में बदलाव होता है। दूसरी बार में यह 50 फीसद तक हो जाता है। छठवीं पीढ़ी में पशुपालकों को शुद्ध नस्ल मिलेगी। कई शोध में इसकी प्रमाणिकता भी साबित हो चुकी है। पशुपालक इस बात का खास ध्यान रखें कि जिस नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराया है, उसी नस्ल से लगातार छह बार तक गर्भाधान कराएं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत जिले में जनवरी से लेकर अब तक करीब साढ़े चार लाख पशुओं का निशुल्क गर्भाधान किया जा चुका है। पशुपालकों की सुविधा के लिए यह योजना उनके घर पर उपलब्ध करायी जा रही है।
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ये है स्थिति
- जिले में करीब नौ लाख महीष वंशी व साढ़े तीन लाख गोवंशीय हैं
- जिले भर में कार्यरत हैं 44 पशु चिकित्सालय, 66 डिस्पेंसरी
- 122 न्याय पंचायतों पर कार्य कर रहे हैं 125 पैरावेट