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टिड्डी दल से फसल बचाने के लिए लगाएं नीम-नींबू
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टिड्डी।
- फोटो : CITY OFFICE
फसलों पर मंडरा रहा टिड्डी दल नीम, धतूरा और अकबन जैसे पेड़ पौधों से दूरी रखता है। वह इनको नहीं खाता है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइल्ड लाइफ साइंस विभाग के मुताबिक टिड्डी दल दिन में यात्रा करता है और रात में अपना पड़ाव डालता है। इसलिए रात में इनको इकट्ठा करके मुर्गी दाने का पोषक आहार भी बनाया जा सकता है। इसके अलावा इस समस्या से निजात पाने के कुछ देसी उपाय भी हैं।
एएमयू वाइल्ड लाइफ साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अफीफुल्ला ने बताया कि नीम, नींबू आदि जैसे पेड़ों की पत्तियों में औषधीय गुण होते हैं। इनमें पेस्टिसाइड जैसे रासायनिक तत्व भी पाए जाते हैं, जो टिड्डी दल के हमले के लिए एक डिफेंस सिस्टम का काम करते हैं। इसलिए इस तरह के पेड़ फसलों के लिए एक डिफेंस सिस्टम के तौर पर काम कर सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं कि अगर इन पेड़ों को हम लगा देंगे तो टिड्डी दल हमला ही नहीं करेगा। यह व्यवस्था एक प्रतिरोधी व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती है। प्रोफेसर अफीफुल्ला ने बताया कि टिड्डी दल दिन में यात्रा करता है और एक दिन में यह डेढ़ सौ किलोमीटर तक का सफर कर सकता है, अगर हवा का साथ मिल जाए। रात को यह दल अपना पड़ाव डालता है।
रात को इनको इकट्ठा किया जा सकता है और मुर्गी दाने के रूप में इसका इस्तेमाल बहुत अच्छे से किया जा सकता है। क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। पाकिस्तान में एक जगह इस तरह का प्रयोग किया गया और वह बहुत कामयाब रहा। इस तरह मुर्गी दाने के रूप में इस्तेमाल करने से टिड्डी दल पर नियंत्रण पाया जा सकता है और इनका उपयोग भी किया जा सकता है।
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एएमयू वाइल्ड लाइफ साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अफीफुल्ला ने बताया कि नीम, नींबू आदि जैसे पेड़ों की पत्तियों में औषधीय गुण होते हैं। इनमें पेस्टिसाइड जैसे रासायनिक तत्व भी पाए जाते हैं, जो टिड्डी दल के हमले के लिए एक डिफेंस सिस्टम का काम करते हैं। इसलिए इस तरह के पेड़ फसलों के लिए एक डिफेंस सिस्टम के तौर पर काम कर सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं कि अगर इन पेड़ों को हम लगा देंगे तो टिड्डी दल हमला ही नहीं करेगा। यह व्यवस्था एक प्रतिरोधी व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती है। प्रोफेसर अफीफुल्ला ने बताया कि टिड्डी दल दिन में यात्रा करता है और एक दिन में यह डेढ़ सौ किलोमीटर तक का सफर कर सकता है, अगर हवा का साथ मिल जाए। रात को यह दल अपना पड़ाव डालता है।
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रात को इनको इकट्ठा किया जा सकता है और मुर्गी दाने के रूप में इसका इस्तेमाल बहुत अच्छे से किया जा सकता है। क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। पाकिस्तान में एक जगह इस तरह का प्रयोग किया गया और वह बहुत कामयाब रहा। इस तरह मुर्गी दाने के रूप में इस्तेमाल करने से टिड्डी दल पर नियंत्रण पाया जा सकता है और इनका उपयोग भी किया जा सकता है।
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