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अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी निलंबित
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
Updated Tue, 27 Oct 2015 01:26 AM IST
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन के सचिव एस मुस्तफा के क्यू जैदी को कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले की जांच पूरी होने तक वह निलंबित रहेंगे। मुस्तफा जैदी पर कुलपति के साथ दुर्व्यवहार का आरोप है। निलंबन की अवधि तक बिना कुलपति की अनुमति के वह शहर से बाहर भी नहीं जा सकेंगे। उन्हें यूनिवर्सिटी नियमों के अनुसार गुजारा भत्ता दिया जाएगा, जिसके लिए प्रत्येक माह उन्हें अपने विभाग के अध्यक्ष के माध्यम से दावा पेश करना होगा।
मुस्तफा जैदी को अपने शैक्षिक दायित्वों का निर्वाह न करने और बिना पूर्व सूचना के कक्षा से गायब रहने का आरोप है। इसको लेकर 20 अक्टूबर 2015 को एक्जीक्यूटिव काउंसिल की विशेष मीटिंग के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया था। साथ ही काउंसिल ने कुलपति को उनके विरुद्ध निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हेें नोटिस का जवाब 23 अक्टूबर की दोपहर 1 बजे तक देने के निर्देश दिए थे। लेकिन कुलपति श्री जैदी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हुए। कुलपति ने इस बारे में लिए अपने निर्णय में कहना है कि जैदी कक्षा से अनुपस्थिति रहकर इसे गलत ढंग से प्रस्तुत कर रहे थे। अवकाश के कानून का भी उन्होंने गलत व्याख्या किया।
इसके अलावा उन्हाेंने कुलपति कार्यालय में आकर उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया। अमुटा सचिव के निलंबन के बाद विश्वविद्यालय की राजनीति गरमा गई है। इसको लेकर संगठन के कार्यकारिणी की बैठक सोमवार देर रात तक चली। इस मामला को शिक्षक राष्ट्रीय स्तर पर उठा सकते हैं। पहले भी जेएनयू, डीयू एवं जामिया मिलिया टीचर्स एसोसिएशन के साथ फेडकुटा द्वारा अमुटा सचिव के पक्ष में बयान जारी कराया जा चुका है। अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी का कहना है कि वीसी कानून नहीं जानते। यूनिवर्सिटी को नहीं वीसी को उनसे शिकायत है। उन्होंने स्वयं मेरे खिलाफ शिकायत की और स्वयं जांच कर फैसला भी सुना दिया।
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उल्लेखनीय है कि एएमयू एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा की जांच सीबीआई से कराने समेत अन्य कई मांगों को लेकर अमुटा द्वारा 13 अक्टूबर को एक दिवसीय धरना दिया गया था। शिक्षकों ने धरना सभा में कुलपति पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उस दिन ही कुलपति ने अमुटा सचिव के विभाग में जाकर औचक निरीक्षण किया था। अमुटा सचिव बिना छुट्टी के धरना में शामिल हुए थे।
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मुस्तफा जैदी को अपने शैक्षिक दायित्वों का निर्वाह न करने और बिना पूर्व सूचना के कक्षा से गायब रहने का आरोप है। इसको लेकर 20 अक्टूबर 2015 को एक्जीक्यूटिव काउंसिल की विशेष मीटिंग के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया था। साथ ही काउंसिल ने कुलपति को उनके विरुद्ध निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हेें नोटिस का जवाब 23 अक्टूबर की दोपहर 1 बजे तक देने के निर्देश दिए थे। लेकिन कुलपति श्री जैदी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हुए। कुलपति ने इस बारे में लिए अपने निर्णय में कहना है कि जैदी कक्षा से अनुपस्थिति रहकर इसे गलत ढंग से प्रस्तुत कर रहे थे। अवकाश के कानून का भी उन्होंने गलत व्याख्या किया।
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इसके अलावा उन्हाेंने कुलपति कार्यालय में आकर उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया। अमुटा सचिव के निलंबन के बाद विश्वविद्यालय की राजनीति गरमा गई है। इसको लेकर संगठन के कार्यकारिणी की बैठक सोमवार देर रात तक चली। इस मामला को शिक्षक राष्ट्रीय स्तर पर उठा सकते हैं। पहले भी जेएनयू, डीयू एवं जामिया मिलिया टीचर्स एसोसिएशन के साथ फेडकुटा द्वारा अमुटा सचिव के पक्ष में बयान जारी कराया जा चुका है। अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी का कहना है कि वीसी कानून नहीं जानते। यूनिवर्सिटी को नहीं वीसी को उनसे शिकायत है। उन्होंने स्वयं मेरे खिलाफ शिकायत की और स्वयं जांच कर फैसला भी सुना दिया।
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उल्लेखनीय है कि एएमयू एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा की जांच सीबीआई से कराने समेत अन्य कई मांगों को लेकर अमुटा द्वारा 13 अक्टूबर को एक दिवसीय धरना दिया गया था। शिक्षकों ने धरना सभा में कुलपति पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उस दिन ही कुलपति ने अमुटा सचिव के विभाग में जाकर औचक निरीक्षण किया था। अमुटा सचिव बिना छुट्टी के धरना में शामिल हुए थे।