{"_id":"67e4d94f398c8991a4052a55","slug":"amu-theatre-artists-in-the-world-2025-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Theatre Day: सर सैयद ने एएमयू के लिए जुटाया था नाटक से चंदा, दुनिया में यहां के रंग कर्मियों ने छोड़ी छाप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Theatre Day: सर सैयद ने एएमयू के लिए जुटाया था नाटक से चंदा, दुनिया में यहां के रंग कर्मियों ने छोड़ी छाप
Thu, 27 Mar 2025 10:21 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Thu, 27 Mar 2025 10:21 AM IST
सार
रंगमंच की दुनिया में अनुभव सिन्हा, नसीरुद्दीन शाह, सुरेखा सिकरी, दिलीप ताहिल, मुजफ्फर अली, सईद जाफरी, एन चंद्रा, मंजर जमाल, मुजीब खान, तबस्सुम, शेख मुख्तार मुराद (रजा मुराद के पिता), बेगम पारा और कैफ़ी आज़मी ने अपनी अलग छाप छोड़ी है।
विज्ञापन
नाटक मंचन करते हुए थिएटर कलाकार
- फोटो : प्रतीकात्मक
विस्तार
आज से करीब 137 साल पहले फरवरी का सर्द मौसम था। एक बुजुर्ग शख्श दान में मिली फौजी छावनी की 78 एकड़ जमीन पर बनाए गए मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल (एमएओ) कॉलेज के विस्तार के लिए चंदा जुटाने की कवायद कर रहा था। इस क्रम में उसने अलीगढ़ में लगने वाली नुमाइश में चंदा जुटाने के लिए लैला मजनू नाटक का मंचन किया।
विज्ञापन
यह शख्स महान समाज सुधारक और शिक्षाविद सर सैयद थे। नाटक में कलाकार के गायब हो जाने पर लैला का किरदार भी उन्होंने ही निभाया। उनके स्थापित किए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नाट्य कला को समृद्ध करने की परंपरा आज भी जीवित है। दुनिया के रंगमंच पर एएमयू की नाट्यशाला से निकली हस्तियों ने अपनी कला और अदाकारी का जलवा दिखाया है।
विज्ञापन
इन्होंने किया नाम रोशन
यूनिवर्सिटी का नाम रोशन करने वालों में अनुभव सिन्हा, नसीरुद्दीन शाह, सुरेखा सिकरी, दिलीप ताहिल, मुजफ्फर अली, सईद जाफरी, एन चंद्रा, मंजर जमाल, मुजीब खान, तबस्सुम, शेख मुख्तार मुराद (रजा मुराद के पिता), बेगम पारा और कैफ़ी आज़मी जैसे दिग्गज रंगमंच से जुड़े नाम शामिल हैं। एएमयू में ड्रामा क्लब की शुरुआत 1967 से हुई। एएमयू के प्रो. एफएस शीरानी बताते हैं कि नाटकों को मंच प्रदान करने वाले कैनेडी हॉल का अब चेहरा-मोहरा बदल गया है।
विज्ञापन
बड़े नाटकों का एएमयू में हो चुका है मंचन
एएमयू के कैनेडी हॉल में कई नाटकों का मंचन हो चुका है। इनमें मुगल-ए-आजम, अनार कली, करवल कथा, ताजमहल का टेंडर, चरनदास चोर, सर सैयद, रंग नगरी, फुटपाथ, शतरंज के मोहरे, दरवाजे खोल दो, लाल किले का आखिरी मुशायरा आदि शामिल हैं।