फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   AMU: The demand for inquiry into the relief amount sent to Kashmir

एएमयू: कश्मीर भेजी गई राहत राशि की जांच की उठी मांग

Sat, 13 Jan 2018 02:06 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Sat, 13 Jan 2018 02:06 AM IST
विज्ञापन
AMU: The demand for inquiry into the relief amount sent to Kashmir
AMU GATE - फोटो : file foto
साढ़े तीन साल पहले जम्मू-कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से भेजे गए एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि में खेल की आशंका है। यह पैसे एएमयू के शिक्षकों ने अपने वेतन से कटाए थे। छात्र एवं कर्मचारियों ने भी जरूरी खर्चों में कटौती कर पैसे बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जुटाए थे। विश्वविद्यालय के शिक्षकों को संदेह है कि कहीं यह धन कश्मीर के गलत लोगों के हाथ में तो नहीं पहुंच गया। शोध छात्र मन्नान बशीर वानी के आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर आने के बाद बाढ़ राहत फंड की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग एक बार फिर शुरू हो गई है। पिछले साल इसकी शिकायत सीबीआई के निदेशक से की गई थी।  
विज्ञापन


जम्मू-कश्मीर में बाढ़ आने एवं भयानक तबाही होने से दुखी एएमयू के शिक्षकों ने सितंबर 2014 में अपने एक दिन का वेतन कटवाकर मदद के लिए भिजवाया था। इसके अतिरिक्त यहां के छात्रों एवं कर्मचारियों ने भी दिल खोल कर मदद की थी। 
विज्ञापन


एएमयू टीचर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी स्वयं जाकर बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन एएमयू के अधिकारी इस मामले में सक्रिय हो गए। इसको लेकर तत्कालीन कुलपति जमीरउद्दीन शाह, पीवीसी सैयद अहमद अली और अमुटा के नेताओं के बीच घमासान भी हुआ था। एक साल तक कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों की मदद नहीं होने पर विवाद ने काफी विकराल रूप धारण कर लिया। बाद में एएमयू प्रशासन द्वारा बताया गया कि करीब 1.10 करोड़ की धनराशि 100 बाढ़ पीड़ितों के खाते में भेज दी गई, ताकि वह इस धनराशि से अपने घर फिर से बना लें।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि शिक्षक नेता इंतजामिया के इस बयान से संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि उन्हें दाल में कुछ काला नजर आ रहा था। पिछले वर्ष एएमयू से एक व्यक्ति ने सीबीआई के निदेशक को खत लिखकर कश्मीर बाढ़ राहत फंड की जांच कराने की गुहार लगाई। 

उनका कहना था कि सारे नियम-कानून को ताक पर रखकर एक करोड़ से अधिक की धनराशि व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर कर दी गई। लाभार्थी का नाम व पता आदि की सूचना किसी को नहीं दी गई। दिलचस्प पहलू यह भी है धनराशि भी बाढ़ के एक साल से बाद दी गई। उस समय तक सरकार व अन्य संस्थाओं द्वारा बाढ़ पीड़ितों को काफी मदद की जा चुकी थी। शिकायतकर्ता का यह भी कहना था कि प्रधानमंत्री राहत कोष में भी यह धनराशि दी सकती थी। 


उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रविरोधी तत्व सक्रिय हैं और लाखों की धनराशि बिना सत्यापित किए कैसे निजी खातों में ट्रांसफर कर दी गई। खास बात यह भी है कि मदद के लिए बनी कमेटी में एक ऐसे शिक्षक भी शामिल थे, जो काफी विवादित हैं। उन पर छात्रों को देश एवं सेना के विरुद्ध भड़काने का आरोप लग चुका है। भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी फंड देने के तरीके पर सवाल उठाया था। 

इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। किसी को पता नहीं है कि यहां से कश्मीर भेजी गई धनराशि के लाभार्थी कौन हैं और कहां के रहने वाले हैं।
- मुस्तफा जैदी, पूर्व सचिव, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन
अभी इस मामले में जानकारी नहीं है। दो-तीन साल पुराना मामला है। इस मामले में  अधिकारियों से बात करने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
- प्रो. शाफे किदवई, मेंबर इंचार्ज, पीआरओ कार्यालय, एएमयू
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed