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नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में एएमयू के छात्रों ने खाना पीना छोड़ बुलंद की आवाज
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अब्दुल्ला कॉलेज में विरोध प्रर्दशन करती छात्राएं।
- फोटो : CITY OFFICE
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नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में एएमयू में बुधवार को विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। विरोध में छात्राएं भी शामिल हुईं। छात्रों ने दोपहर से देर शाम तक बाब ए सैयद गेट पर धरना दिया, जिसमें जेएनयू के छात्र नेता भी पहुंचे और उन्होंने इस संघर्ष को दूसरे स्वतंत्रता संग्राम का नाम देते हुए इसमें शामिल होने की अपील की।
छात्रों ने डायनिंग का बहिष्कार किया और बना हुआ खाना गरीबों में बंटवा दिया। इसके साथ ही बाब ए सैयद पर धरना दिया। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा और केंद्र सरकार विरोधी नारेबाजी की। साथ ही बिल को वापस लेने की मांग की। छात्रों के रुख को देखते हुए यूनिवर्सिटी सर्किल पर बड़ी संख्या में फोर्स की तैनाती रही। देर शाम बाब ए सैयद गेट पर धरना समाप्त कर दिया गया। बृहस्पतिवार को आगे की रणनीति पर विचार करने के लिए छात्र एक बार फिर से इकट्ठा होंगे।
बुधवार को दोपहर को छात्र बाब ए सैयद गेट पर इकट्ठा होना शुरू हुए। उनके हाथों में बिल के विरोध में लिखे पोस्टर, बैनर आदि थे। सूचना पर प्रोक्टर प्रो. अफीफउल्लाह, डॉ. नवेद आदि के साथ पूरी टीम पहुंच गई। यहां पर छात्रों के साथ छात्राओं ने भी विरोध प्रदर्शन और धरने में भाग लिया। वक्ताओं ने भाजपा और उससे जुड़े संगठनों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नागरिकता संशोधन बिल के संभावित खतरों से आगाह कराया। वक्ताओं का कहना था कि यह बिल मुसलमानों को निशाना बना कर बनाया गया है। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में छात्र बाब ए सैयद के गेट पर बैनर आदि लेकर बैठ गए। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी दिल्ली से धरने पर वहां के छात्र नेता शरजील इमाम, आफरीन फातिमा, जितेंद्र सूना, सुहेब पीवी सहित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से शोध कर रहे और एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल्ला आजम ने धरने को संबोधित किया। सभी छात्र नेताओं ने इन्हें जनसंहार करार देते हुए दूसरे स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने का आह्वान किया।
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वीमेंस कालेज में भी छात्राओं ने विरोध जताया
अलीगढ़। बाब ए सैयद गेट पर भी छात्राएं विरोध प्रदर्शन में शामिल थीं। इसके साथ ही वीमेंस कालेज में भी बिल के विरोध में छात्राओं ने अपना स्वर मुखर किया। छात्रों ने बिल का विरोध अभियान में भाग लेने का प्रण लिया और इसके वापस नहीं होने तक संघर्ष का ऐलान किया।
25 हजार छात्रों ने डाइनिंग का बहिष्कार किया
अलीगढ़। एएमयू में 19 आवासीय हालों में खाना नहीं बना। जहां पर थोड़ा बहुत खाना बना भी उसे गरीबों में बाट दिया। छात्रों ने एक ई रिक्शा पर बैनर लगाया जिस पर लिखा हुआ था कि एएमयू के छात्र भूख हड़ताल पर हैं। डाइनिंग हाल का खाना हम गरीबों में बांट रहे हैं। नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में हम खाने का बहिष्कार कर दिया गया है। एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि अभी जमीर जिंदा है। अभी मरे नहीं हैं। हमें इस हद तक मजबूर करने के लिए अमित शाह एंड कंपनी को बहुत बहुत मुबारक हो। 25 हजार छात्रों ने डाइनिंग का बहिष्कार किया है। लड़ेंगे।
फोर्स रहा बेहद सतर्क
एएमयू में बिल के विरोध को देखते हुए शहर में भी फोर्स बेहद सतर्क रही। शहर के सभी प्रवेश मार्गों पर देहात से फोर्स बुला कर शहर में तैनात किया गया। इसके अलावा रैपिड एक्शन फोर्स सहित प्रशासनिक अधिकारियों की भी तैनाती रही। इसके अलावा यूनिवर्सिटी सर्किल, अब्दुल्ला कालेज, डिग्गी चौराहा, तस्वीर महल पर भी पुलिस के साथ साथ रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती रही। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी भी पूरी तरह मुस्तैद रहे। क्योंकि मंगलवार की रात छात्रों का सैलाब यूनिवर्सिटी सर्किल तक आ गया था। उस दौरान पुलिस फोर्स कम था।
दिल्ली कूच की रही चर्चा
एएमयू छात्रों के दिल्ली कूच करने की चर्चा रही लेकिन छात्र नेताओं ने इस बात को आधारहीन बताया, कहा कोई भी दिल्ली नहीं गया। सुबह इस चर्चा ने इसलिए जोर पकड़ा क्योंकि मंगलवार को दिल्ली कूच करने की बात कही जा रही थी। लेकिन दोपहर बात तक छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वह दिल्ली नहीं गए हैं।
माइक को लेकर भी हुई नोकझोंक
बाब ए सैयद धरना स्थल पर माइक बंद कराने को लेकर छात्रों और प्राक्टोरियल टीम के बीच नोकझोंक भी हुई। बाद में छात्रों के द्वारा पहले भी माइक लगाने की दलीलें देने और अपना प्रदर्शन संयमित रखने का भरोसा देने के बाद माइक लगने दिया।
बिल देश के लिए बड़ा खतरा: पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष
नागरिकता संशोधन बिल को एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा विधायक नफीस अहमद ने संविधान की आत्मा के विपरीत बताया तो पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी ने भी भारत के लिए विघटनकारी बताया।
‘ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में स्पष्ट है कि राज्य धर्म, जाति, लिंग और जन्म के स्थान को लेकर कानून के समक्ष समानता के अधिकार में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करेगा। भाजपा संविधान की शपथ लेती है लेकिन संविधान को नहीं मानती। यह बिल देश को कमजोर बनाने का बिल है’
- नफीस अहमद, पूर्व अध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ
‘नागरिकता संशोधन बिल हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए बड़ा खतरा है और संविधान के साथ साथ देश की सदियों पुरानी परंपरा के खिलाफ है। देश हित के लिए इस बिल का विरोध होना बहुत जरूरी है’
- शहजाद अलाम बरनी, पूर्व अध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ
फासीवादी ताकतें ला रहीं निरंकुश बिल: हमजा
एएमयू छात्र संघ के उपाध्यक्ष हमजा सूफियान ने कहा कि यह देखना दुखद है कि फासीवादी और राष्ट्र विरोधी ताकतें भारत के संविधान में एक निरंकुश बिल लाने की कोशिश कर रही हैं। इससे भी बुरी बात यह है कि लोगों के प्रभावित वर्ग की आवाज को चुप कराने के लिए सरकार सख्त कानून लागू कर रही है। जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों ने बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया तो पुलिस ने मेरे और अन्य छात्रों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर दी। यह स्पष्ट रूप से हमें चुप कराने के लिए किया गया है और हम चाहते हैं कि हम सरकार के इस व्यवहार को स्वीकार कर लें। उन्होंने मैं लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के ऐसे कार्यों से वंचित न हों और राष्ट्र विरोधी शक्तियों को परास्त करने के लिए देश भर में विरोध को मजबूत करें जो हमारे देश को दो टुकड़ों में तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
छात्रों पर दर्ज रिपोर्ट वापस ली जाए: सलमान इम्तियाज
मशाल जुलूस निकालने वाले छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की एएमयू छात्र संघ के निवर्तमान अध्यक्ष मो. सलमान इम्तियाज ने निंदा की है। उन्होंने कहा है कि सभी छात्र शांतिपूर्वक तरीके से जुलूस निकाल रहे थे। यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। उनकी पुलिस और प्रशासन से अपील है कि दर्ज की गई रिपोर्ट को तुरंत ही रद किया जाए नहीं तो पुलिस के खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि वह फिर कहते हैं कि यह बिल असंवैधानिक है। पुलिस ने 20 नामजद छात्रों सहित सैकड़ों छात्रों पर धारा 144 का उल्लंघन करने पर 188 और सरकारी कार्य में बाधा डालने पर धारा 353 में मुकदमा दर्ज किया गया था।
धर्म के आधार पर नारेबाजी पहले क्यों नहीं: अजय सिंह
एएमयू के ला फैकल्टी के निलंबित छात्र नेता ठा. अजय सिंह ने कहा है कि नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में एएमयू में हिंदुत्व मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। सन 1971 में जब बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना ने लाखों हिंदुओं को मारा था। महिलाओं से दुष्कर्म हुए। तब अपराधियों की पहचान के खिलाफ कोई नारेबाजी नहीं हुई। 90 के दशक में जब लाखों कश्मीरी पंडितों को निकाल के बाहर किया गया था, तब भी दोषी समाज के धर्म को लेकर कोई नारेबाजी नहीं हुई। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादी हमला हुआ लेकिन तब भी एएमयू से आतंकियों की मजहबी पहचान के खिलाफ कोई नारेबाजी नहीं हुई। मुंबई में आतंकी हमला, आईएसआईएस द्वारा किया जा रहा नरसंहार, पाकिस्तान में शिया और अहमदियों पर अत्याचार, चीन में 10 लाख मुसलमानों के कंसंट्रेंट कैंप में डाल देने के बाद भी यहां से कोई आवाज नहीं उठी। जब भारत की संसद पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कानून बना रही है तो कैंपस में हिंदुत्व मुर्दाबाद के नारे लग रहे हैं।
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छात्रों ने डायनिंग का बहिष्कार किया और बना हुआ खाना गरीबों में बंटवा दिया। इसके साथ ही बाब ए सैयद पर धरना दिया। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा और केंद्र सरकार विरोधी नारेबाजी की। साथ ही बिल को वापस लेने की मांग की। छात्रों के रुख को देखते हुए यूनिवर्सिटी सर्किल पर बड़ी संख्या में फोर्स की तैनाती रही। देर शाम बाब ए सैयद गेट पर धरना समाप्त कर दिया गया। बृहस्पतिवार को आगे की रणनीति पर विचार करने के लिए छात्र एक बार फिर से इकट्ठा होंगे।
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बुधवार को दोपहर को छात्र बाब ए सैयद गेट पर इकट्ठा होना शुरू हुए। उनके हाथों में बिल के विरोध में लिखे पोस्टर, बैनर आदि थे। सूचना पर प्रोक्टर प्रो. अफीफउल्लाह, डॉ. नवेद आदि के साथ पूरी टीम पहुंच गई। यहां पर छात्रों के साथ छात्राओं ने भी विरोध प्रदर्शन और धरने में भाग लिया। वक्ताओं ने भाजपा और उससे जुड़े संगठनों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नागरिकता संशोधन बिल के संभावित खतरों से आगाह कराया। वक्ताओं का कहना था कि यह बिल मुसलमानों को निशाना बना कर बनाया गया है। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में छात्र बाब ए सैयद के गेट पर बैनर आदि लेकर बैठ गए। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी दिल्ली से धरने पर वहां के छात्र नेता शरजील इमाम, आफरीन फातिमा, जितेंद्र सूना, सुहेब पीवी सहित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से शोध कर रहे और एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल्ला आजम ने धरने को संबोधित किया। सभी छात्र नेताओं ने इन्हें जनसंहार करार देते हुए दूसरे स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने का आह्वान किया।
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वीमेंस कालेज में भी छात्राओं ने विरोध जताया
अलीगढ़। बाब ए सैयद गेट पर भी छात्राएं विरोध प्रदर्शन में शामिल थीं। इसके साथ ही वीमेंस कालेज में भी बिल के विरोध में छात्राओं ने अपना स्वर मुखर किया। छात्रों ने बिल का विरोध अभियान में भाग लेने का प्रण लिया और इसके वापस नहीं होने तक संघर्ष का ऐलान किया।
25 हजार छात्रों ने डाइनिंग का बहिष्कार किया
अलीगढ़। एएमयू में 19 आवासीय हालों में खाना नहीं बना। जहां पर थोड़ा बहुत खाना बना भी उसे गरीबों में बाट दिया। छात्रों ने एक ई रिक्शा पर बैनर लगाया जिस पर लिखा हुआ था कि एएमयू के छात्र भूख हड़ताल पर हैं। डाइनिंग हाल का खाना हम गरीबों में बांट रहे हैं। नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में हम खाने का बहिष्कार कर दिया गया है। एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि अभी जमीर जिंदा है। अभी मरे नहीं हैं। हमें इस हद तक मजबूर करने के लिए अमित शाह एंड कंपनी को बहुत बहुत मुबारक हो। 25 हजार छात्रों ने डाइनिंग का बहिष्कार किया है। लड़ेंगे।
फोर्स रहा बेहद सतर्क
एएमयू में बिल के विरोध को देखते हुए शहर में भी फोर्स बेहद सतर्क रही। शहर के सभी प्रवेश मार्गों पर देहात से फोर्स बुला कर शहर में तैनात किया गया। इसके अलावा रैपिड एक्शन फोर्स सहित प्रशासनिक अधिकारियों की भी तैनाती रही। इसके अलावा यूनिवर्सिटी सर्किल, अब्दुल्ला कालेज, डिग्गी चौराहा, तस्वीर महल पर भी पुलिस के साथ साथ रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती रही। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी भी पूरी तरह मुस्तैद रहे। क्योंकि मंगलवार की रात छात्रों का सैलाब यूनिवर्सिटी सर्किल तक आ गया था। उस दौरान पुलिस फोर्स कम था।
दिल्ली कूच की रही चर्चा
एएमयू छात्रों के दिल्ली कूच करने की चर्चा रही लेकिन छात्र नेताओं ने इस बात को आधारहीन बताया, कहा कोई भी दिल्ली नहीं गया। सुबह इस चर्चा ने इसलिए जोर पकड़ा क्योंकि मंगलवार को दिल्ली कूच करने की बात कही जा रही थी। लेकिन दोपहर बात तक छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वह दिल्ली नहीं गए हैं।
माइक को लेकर भी हुई नोकझोंक
बाब ए सैयद धरना स्थल पर माइक बंद कराने को लेकर छात्रों और प्राक्टोरियल टीम के बीच नोकझोंक भी हुई। बाद में छात्रों के द्वारा पहले भी माइक लगाने की दलीलें देने और अपना प्रदर्शन संयमित रखने का भरोसा देने के बाद माइक लगने दिया।
बिल देश के लिए बड़ा खतरा: पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष
नागरिकता संशोधन बिल को एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा विधायक नफीस अहमद ने संविधान की आत्मा के विपरीत बताया तो पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी ने भी भारत के लिए विघटनकारी बताया।
‘ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में स्पष्ट है कि राज्य धर्म, जाति, लिंग और जन्म के स्थान को लेकर कानून के समक्ष समानता के अधिकार में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करेगा। भाजपा संविधान की शपथ लेती है लेकिन संविधान को नहीं मानती। यह बिल देश को कमजोर बनाने का बिल है’
- नफीस अहमद, पूर्व अध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ
‘नागरिकता संशोधन बिल हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए बड़ा खतरा है और संविधान के साथ साथ देश की सदियों पुरानी परंपरा के खिलाफ है। देश हित के लिए इस बिल का विरोध होना बहुत जरूरी है’
- शहजाद अलाम बरनी, पूर्व अध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ
फासीवादी ताकतें ला रहीं निरंकुश बिल: हमजा
एएमयू छात्र संघ के उपाध्यक्ष हमजा सूफियान ने कहा कि यह देखना दुखद है कि फासीवादी और राष्ट्र विरोधी ताकतें भारत के संविधान में एक निरंकुश बिल लाने की कोशिश कर रही हैं। इससे भी बुरी बात यह है कि लोगों के प्रभावित वर्ग की आवाज को चुप कराने के लिए सरकार सख्त कानून लागू कर रही है। जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों ने बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया तो पुलिस ने मेरे और अन्य छात्रों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर दी। यह स्पष्ट रूप से हमें चुप कराने के लिए किया गया है और हम चाहते हैं कि हम सरकार के इस व्यवहार को स्वीकार कर लें। उन्होंने मैं लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के ऐसे कार्यों से वंचित न हों और राष्ट्र विरोधी शक्तियों को परास्त करने के लिए देश भर में विरोध को मजबूत करें जो हमारे देश को दो टुकड़ों में तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
छात्रों पर दर्ज रिपोर्ट वापस ली जाए: सलमान इम्तियाज
मशाल जुलूस निकालने वाले छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की एएमयू छात्र संघ के निवर्तमान अध्यक्ष मो. सलमान इम्तियाज ने निंदा की है। उन्होंने कहा है कि सभी छात्र शांतिपूर्वक तरीके से जुलूस निकाल रहे थे। यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। उनकी पुलिस और प्रशासन से अपील है कि दर्ज की गई रिपोर्ट को तुरंत ही रद किया जाए नहीं तो पुलिस के खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि वह फिर कहते हैं कि यह बिल असंवैधानिक है। पुलिस ने 20 नामजद छात्रों सहित सैकड़ों छात्रों पर धारा 144 का उल्लंघन करने पर 188 और सरकारी कार्य में बाधा डालने पर धारा 353 में मुकदमा दर्ज किया गया था।
धर्म के आधार पर नारेबाजी पहले क्यों नहीं: अजय सिंह
एएमयू के ला फैकल्टी के निलंबित छात्र नेता ठा. अजय सिंह ने कहा है कि नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में एएमयू में हिंदुत्व मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। सन 1971 में जब बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना ने लाखों हिंदुओं को मारा था। महिलाओं से दुष्कर्म हुए। तब अपराधियों की पहचान के खिलाफ कोई नारेबाजी नहीं हुई। 90 के दशक में जब लाखों कश्मीरी पंडितों को निकाल के बाहर किया गया था, तब भी दोषी समाज के धर्म को लेकर कोई नारेबाजी नहीं हुई। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादी हमला हुआ लेकिन तब भी एएमयू से आतंकियों की मजहबी पहचान के खिलाफ कोई नारेबाजी नहीं हुई। मुंबई में आतंकी हमला, आईएसआईएस द्वारा किया जा रहा नरसंहार, पाकिस्तान में शिया और अहमदियों पर अत्याचार, चीन में 10 लाख मुसलमानों के कंसंट्रेंट कैंप में डाल देने के बाद भी यहां से कोई आवाज नहीं उठी। जब भारत की संसद पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कानून बना रही है तो कैंपस में हिंदुत्व मुर्दाबाद के नारे लग रहे हैं।

नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन करते एएमयू के छात्र।- फोटो : CITY OFFICE

सर सैयद हॉस्टल के डायनिंग रूम में पसरा सन्नाटा।- फोटो : CITY OFFICE

नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करतीं एएमयू की छात्राएं। फोटो नीरज कुमार- फोटो : CITY OFFICE