पीएम ने कहा कि एएमयू में एक तरफ उर्दू पढ़ाई जाती है दूसरी तरफ हिंदी भी। यहां अरबी पढ़ाई जाती है तो संस्कृत भी। यह सदी पुराना संस्थान है। यहां की लाइब्रेरी में कुरान की पांडुलिपि है तो दूसरी तरफ गीता और रामायण के अनुवाद भी सहेज कर रखे गए हैं। यह विविधता एएमयू जैसे संस्थान की ही नहीं बल्कि पूरे देश की ताकत है। हमें इस शक्ति को नहीं भूलना है और न कमजोर पड़ने देना है।
एएमयू के कैंपस में एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना है। हमें मिलकर इसके लिए काम करना होगा। बीते सौ वर्षों में एएमयू ने दुनिया के देशों से भारत के संबंधों को बेहतर और मजबूत करने का काम किया है। उर्दू, अरबी और फारसी भाषा पर यहां पर जो रिसर्च होती है, इस्लामिक साहित्य पर यहां पर जो रिसर्च होती है, वह इस्लामिक दुनिया के साथ भारत के संबंधों को नई ऊर्जा देती है। आपको एक तरफ अपनी यूनिवर्सिटी के साफ्ट पावर को और निखारना है और दूसरी तरफ राष्ट्र निर्माण के अपने दायित्व को निरंतर पूरा करना है।
मुझे विश्वास है कि एएमयू से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक छात्र छात्रा अपने कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेगा। पीएम ने एएमयू द्वारा कोरोना काल में किए गए कार्य, महिला शिक्षा, स्वास्थ्य, ब्रिज कोर्स, आधुनिक शिक्षा में एएमयू में सराहनीय और प्रशंसनीय कार्य हुआ है।