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अलीगढ़ः 79 में से 32 एंबुलेंस चालक काम पर, 26 नए चालक आ गए बाहर से
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हड़ताली एंबुलेंस चालकों पर गाज गिरने की आशंका है। कई को रोजगार से हाथ धोना पड़ सकता है। प्रशासन की सख्ती के बाद जनपद में संचालित 79 में से 32 एंबुलेंस चालक काम पर लौट आए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चालकों को आवास खाली करने एवं गाड़ी की चाबी सौंपने का निर्देश दिया गया है। नई तैनाती के लिए बाहर से 26 चालक भी बुला लिए गए हैं।
विभिन्न मांगों को लेकर तीन दिन से एंबुलेंस चालक (102, 108 और एएसएस) हड़ताल पर हैं। तालानगरी में सेंट फिदेलिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के समीप खाली मैदान में सभी एंबुलेंस लगाकर धरने पर बैठे थे। मंगलवार रात्रि में मैदान को खाली करा लिया गया। सभी एंबुलेंस को साइट पर भेज दिया गया। बुधवार को 32 एंबुलेंस काम पर लौट आए हैं, जबकि अन्य एंबुलेंस चालक अभी भी आंदोलित हैं। आंदोलित कर्मचारियों से निपटने के लिए सख्त रूप अख्तियार किया जा रहा है। एंबुलेंस कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष अजीत कौर का कहना है कि जवां व चंडौस सहित कई सीएचसी के अधिकारियों द्वारा एंबुलेंस कर्मियों से आवास खाली करने एवं गाड़ी की चाबी सौंपने का निर्देश दिया गया है। संघ अध्यक्ष का कहना है कि कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय का कहना है कि बुधवार को 32 एंबुलेंस चालक (20 एंबुलेंस 102, 12 एंबुलेंस 108) काम पर लौट आए हैं। एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) के एक भी एंबुलेंस चालक काम पर नहीं लौटे हैं। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी। जिला मैनेजर अरशद ने बताया कि बाहर से 26 एंबुलेंस चालक आ गए हैं और कुछ लोग आने वाले हैं। हड़ताली कर्मियों से एंबुलेंस की चाबी लेकर नए लोगों को काम पर रख लिया जाएगा। एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अधिकतर नेताओं ने अपना मोबाइल बंद कर लिया है।
क्या है मामला
एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस का संचालन जीवीके ईएमआरआई द्वारा किया जा रहा था। अब नेशनल हेल्थ मिशन द्वारा टेंडर जिगित्सा हेल्थ लिमिटेड कंपनी को दिया गया है। जिसकी वजह से करीब 1200 कर्मचारियों की नौकरी के ऊपर तलवार लटक रही है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि नई कंपनी द्वारा एएलएस गाड़ियों पर पायलट और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन की नियुक्तियों के लिए विज्ञापन निकाला गया है। नए कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। पहले से काम कर रहे कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है।
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प्रमुख मांगें....
- कंपनी बदलने पर एएलएस पर कार्यरत कर्मचारियों को न बदला जाए।
- कंपनी बदलने पर वेतन में किसी भी तरह की कटौती न की जाए।
- हरियाणा की भांति नेशनल हेल्थ मिशन के अधीन एंबुलेंस का संचालन।
- अगर ठेके पर रखने की मजबूरी हो तो कर्मचारियों को एनएचएम के अधीन ठेके पर रखा जाए।
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विभिन्न मांगों को लेकर तीन दिन से एंबुलेंस चालक (102, 108 और एएसएस) हड़ताल पर हैं। तालानगरी में सेंट फिदेलिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के समीप खाली मैदान में सभी एंबुलेंस लगाकर धरने पर बैठे थे। मंगलवार रात्रि में मैदान को खाली करा लिया गया। सभी एंबुलेंस को साइट पर भेज दिया गया। बुधवार को 32 एंबुलेंस काम पर लौट आए हैं, जबकि अन्य एंबुलेंस चालक अभी भी आंदोलित हैं। आंदोलित कर्मचारियों से निपटने के लिए सख्त रूप अख्तियार किया जा रहा है। एंबुलेंस कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष अजीत कौर का कहना है कि जवां व चंडौस सहित कई सीएचसी के अधिकारियों द्वारा एंबुलेंस कर्मियों से आवास खाली करने एवं गाड़ी की चाबी सौंपने का निर्देश दिया गया है। संघ अध्यक्ष का कहना है कि कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय का कहना है कि बुधवार को 32 एंबुलेंस चालक (20 एंबुलेंस 102, 12 एंबुलेंस 108) काम पर लौट आए हैं। एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) के एक भी एंबुलेंस चालक काम पर नहीं लौटे हैं। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी। जिला मैनेजर अरशद ने बताया कि बाहर से 26 एंबुलेंस चालक आ गए हैं और कुछ लोग आने वाले हैं। हड़ताली कर्मियों से एंबुलेंस की चाबी लेकर नए लोगों को काम पर रख लिया जाएगा। एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अधिकतर नेताओं ने अपना मोबाइल बंद कर लिया है।
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क्या है मामला
एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस का संचालन जीवीके ईएमआरआई द्वारा किया जा रहा था। अब नेशनल हेल्थ मिशन द्वारा टेंडर जिगित्सा हेल्थ लिमिटेड कंपनी को दिया गया है। जिसकी वजह से करीब 1200 कर्मचारियों की नौकरी के ऊपर तलवार लटक रही है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि नई कंपनी द्वारा एएलएस गाड़ियों पर पायलट और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन की नियुक्तियों के लिए विज्ञापन निकाला गया है। नए कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। पहले से काम कर रहे कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है।
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प्रमुख मांगें....
- कंपनी बदलने पर एएलएस पर कार्यरत कर्मचारियों को न बदला जाए।
- कंपनी बदलने पर वेतन में किसी भी तरह की कटौती न की जाए।
- हरियाणा की भांति नेशनल हेल्थ मिशन के अधीन एंबुलेंस का संचालन।
- अगर ठेके पर रखने की मजबूरी हो तो कर्मचारियों को एनएचएम के अधीन ठेके पर रखा जाए।