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अलीगढ़: भारतीयों को यूरोपियों से आगे निकालना चाहते थे सर सैयद: शहजाद अलीम

Sat, 17 Oct 2020 12:22 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2020 12:22 AM IST
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Aligarh: Sir Syed wanted to overtake Indians from Europeans: Shahzad Alim
अलीगढ़: शहजाद अलीम सर सैयद अहमद खान की पर पौत्री। - फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा
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अलीगढ़। सर सैयद अहमद खान को समाज के लिए कुछ करने का जुनून था। वह भारतीयों को ब्रिटिश व अन्य यूरोपीय लोगों से आगे खड़ा देखना चाहते थे। उनको बखूबी पता था कि इसका सबसे अच्छा माध्यम शिक्षा ही है। उन्होंने विज्ञान के महत्व को समझा और इसीलिए साइंटिफि क सोसायटी की स्थापना की। जो आज की आवश्यकताएं हैं, उनको सर सैयद ने अपने जमाने में ही समझ लिया था।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान के 203वीं जयंती के अवसर पर उनके वंशजों में से एक उनकी परपौत्री शहजाद अलीम ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में ये बातें कही। शहजाद ने कहा, सर सैयद ने उदार और तार्किक माध्यम के साथ शिक्षा हासिल करने के महत्व को बखूबी जान लिया था और इसी दिशा में काम किया। सर सैयद अहमद खान के विचारों की प्रासंगिकता आज और भी ज्यादा है, आने वाली सदियों में भी बनी रहेगी।
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सर सैयद अहमद खान पर इतना लिखा जा चुका है कि लाइब्रेरी भरी पड़ी हैं। मुझसे ज्यादा लोग सर सैयद के बारे में जानते हैं। कहा, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय सदियों तक ज्ञान की तलाश में आने वाले युवाओं को रोशनी दिखाता रहेगा। वह सर सैयद डे के अवसर पर अलीगढ़ में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों और दुनिया में फैली अलीग बिरादरी को दिली मुबारकबाद देती हैं।
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कॉलेज की स्थापना के लिए पहले गाजीपुर के नाम पर विचार किया गया था
अलीगढ़। एएमयू के विषय में एक दिलचस्प तथ्य बताते हुए शहजाद अलीम ने कहा कि मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना के लिए पहले गाजीपुर के नाम पर विचार किया जा रहा था। लेकिन बाद में दिल्ली के नजदीक होने और रेलवे लाइन से सीधा संपर्क होने के चलते इस कॉलेज की स्थापना के लिए अलीगढ़ को चुना गया।
एएमयू के सफ र में अहम मुकाम
- 25 अगस्त1876 को करीब 37 साल की सरकारी सेवा के बाद रिटायर होने पर सर सैयद ने स्थायी रूप से अलीगढ़ को ही अपना आशियाना बना लिया।
- फ रवरी 1878 क्रिकेट क्लब की स्थापना की गई। इसके संरक्षक में सर सैयद, महबूब आलम और राम शंकर मिश्रा शामिल थे। यही लोग इसके सेक्रेटरी और कैप्टन भी बने।
- 1883 में राइडिंग स्कूल स्थापित किया गया। विश्व में केवल दो विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां पर हॉर्स राइडिंग क्लब हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अलावा दूसरा हॉर्स राइडिंग क्लब सऊदी अरब की एक यूनिवर्सिटी में संचालित होता है।

- 1884 को विक्टोरिया गेट का फ ाउंडेशन स्टोन रखा गया।
- 29 दिसंबर 1891 उस समय के इलाहाबाद के चीफ जस्टिस मिस्टर डग्लस स्ट्रेट एमएओ कॉलेज आए और कानून की कक्षाओं का शुभारंभ किया।
सर सैयद के सहयोगी और मित्र, जो उनके आंदोलन और लक्ष्य हासिल करने में साथ रहे
मौलाना अल्ताफ हुसैन हाली, नवाब आजम यार जंग मौलवी चिराग अली, मोहम्मद नियाज उद्दीन खान दानिशमंद, बाबू दुर्गा प्रसाद, सैयद हामिद, राजा जय किशन दास, नवाब मोहसिन उल मुल्क मौलवी मेहंदी अली खान, मौलाना सैयद मीर हसन सियालकोटी, मौलवी मोहम्मद अली, खान बहादुर मोहम्मद बरकत अली खान, मौलाना सैयद मोहम्मद बुखारी, मौलवी मोहम्मद फ ारूक चिरायाकोटी, मौलवी मोहम्मद हसन, सैयद मोहम्मद हसन, नवाब सरदार मोहम्मद हयात खान, मौलवी मोहम्मद हुसैन आजाद, खलीफ ा सैयद मोहम्मद हुसैन, मौलवी मोहम्मद इस्माइल, मौलाना मोहम्मद कासिम नानावती, मोहम्मद सईद खान, ख्वाजा मोहम्मद यूसुफ , मौलवी सैयद मुमताज अली, नवाब विकार उल मुल्क मौलवी मुस्ताक हुसैन, मौलवी नियाज मोहम्मद खान, मुंशी हाफि ज सईद अहमद, शमशुल उलमा मौलाना शिब्ली नोमानी, एचजीआई सिडन, मुंशी सिराजुद्दीन अहमद, खान बहादुर सैयद जैनुल आबदीन, मौलवी जकाउल्लाह आदि।
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