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अलीगढ़ः बदलाव के दौर में पीछे रह गए सिनेमाघरों में लगा ताला

Sat, 17 Jul 2021 12:57 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jul 2021 12:57 AM IST
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Aligarh's Cinema Hall
दीपक शर्मा
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राज कपूर, दिलीप कुमार, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन... जैसे बड़े अभिनेताओं की फिल्में जब रिलीज होती थीं तो सिनेमाघरों के बाहर मेले जैसा माहौल होता था। वस वक्त सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर थे। पसंदीदा हीरो की फिल्म देखने के लिए टिकटघरों पर ऐसी भीड़ उमड़ती थी कि पुलिस को लाठियां तक फटकारनी पड़ती थीं। लोग ब्लैक में टिकट खरीदकर फिल्म देखते थे। सिनेमा हॉल सीटियों से गूंज उठते थे। एक-एक फिल्म कई-कई हफ्तों तक लगी रहती थी। लोग अपने परिवार के साथ इन फिल्मों का आनंद लेते थे।
आलम ये था कि जिस चौराहे पर तस्वीर महल सिनेमा था, उसका नाम तस्वीर महल चौराहा ही कर दिया गया, जबकि मीनाक्षी सिनेमा की वजह से फ्लाईओवर का नाम मीनाक्षी पुल कहा जाने लगा। लेकिन बदलाव के दौर में कुछ सिनेमाघर पिछड़ते गए। शहर में कुछ सिंगल स्क्रीन सिनेमा तो पहले ही बंद हो चुके थे, अब जो बचे हैं, उनके सामने अस्तित्व का संकट है। यही हालात रहे तो जल्द ही सिंगल स्क्रीन सिनेमा अतीत की यादों में सिमट कर रह जाएंगे। सिंगल स्क्रीन सिनेमा के परदे से लोगों की आज भी खुशनुमा यादें जुड़ी हुई हैं। इन सिनेमाघरों के जर्जर भवन इस बात की गवाही देते हैं कि कभी यहां पर फिल्मी सितारों का दीदार करने के लिए दर्शकों का मेला लगता था।
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अलीगढ़ में सिनेमाघरों का सफरनामा (बुजुर्ग और सिनेमा थिएटर से जुड़े लोगों की स्मृति के आधार पर)
1947 में अलीगढ़ के अंदर किसी भी सिनेमाघर की बिल्डिंग होने का जिक्र नहीं मिलता है। हां, टेंट लगाकर सिनेमा दिखाया जाता था। ये टेंट कई महीनों तक लगे रहते थे।
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सबसे पहले सिनेमाघर के रूप में रूबी सिनेमा का जिक्र मिलता है, वर्तमान में उसका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। उसकी जगह होटल खुल चुका है।
1950 के बाद हिंदुस्तान थिएटर के नाम से सिविल कोर्ट के पास उस वक्त का आधुनिक थिएटर बना था। जिसे तस्वीर महल के नाम से जाना जाता है। आज इसके नाम से ही उस जगह का चौराहा भी है।
शहर के सिनेमाघरों की स्थिति
अचल ताल पर सूर्य थिएटर, दुबे के पड़ाव पर चंद्रा सिनेमा, रॉयल सिनेमा, रूबी सिनेमा बंद हो चुके हैं। निशात, नंदन, तस्वीर महल, कृष्णा, लक्ष्मी सिनेमा में किसी भी फिल्म का प्रदर्शन नहीं हो रहा है।
शादी के बाद अप्सरा सिनेमा में देखी थी पहली फिल्म
शहर के प्रसिद्ध व्यापारी नेता और समाजसेवी मास्टर ओमप्रकाश और उनकी पत्नी राधा रानी कहती हैं कि शादी के बाद उन्होंने अप्सरा सिनेमा में पहली फिल्म नसीब अपना अपना देखी थी। उस समय मनोरंजन के साधन बहुत ही सीमित थे। सिनेमा देखने का अपना ही रोमांच था। अभी भी वह यादें सजों कर रखी हुई हैं।
1976 में फिल्म कभी कभी के साथ शुरू हुआ सफर, आज वीरानी है
अप्सरा सिनेमा में कार्यरत बुजुर्ग मैनेजर बांकेलाल कहते हैं कि एक वक्त था, जब यहां पर सिनेमा का प्रत्येक शो एक शानदार महफिल की तरह हुआ करता था। महामारी शुरू होने से पहले यहां पर फिल्म ग्रैंड मस्ती आखिरी फिल्म थी। अब यहां पर कोई भी फिल्म प्रदर्शित नहीं हो रही है। आगे क्या हालात रहेंगे, इसको लेकर भी निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।

तस्वीर महल में लंदन से सिनेमा प्रोजेक्टर मंगाया गया था
40 साल तक सिनेमा थिएटर पर कार्यरत रहे पूर्व मैनेजर बुजुर्ग कांतिलाल शर्मा उर्फ लल्लो गुरु कहते हैं कि तस्वीर महल सिनेमा का थिएटर हॉल इस तरह बनाया गया था कि दर्शक कहीं भी बैठे उसको पर्दे पर विजन एक जैसा ही दिखाई देता था। इसके अलावा, तस्वीर महल में लंदन से सिनेमा प्रोजेक्टर मंगाया गया था। यह अपने समय की बहुत आधुनिक तकनीक थी।
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