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अलीगढ़ : सपा-रालोद गठबंधन को जनता ने नकारा
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शहर विधानसभा की मतगणना के दौरान निराश हुए सपा प्रत्याशी जफर आलम।
- फोटो : CITY OFFICE
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इकराम वारिस
भले ही उत्तर प्रदेश में सपा-रालोद गठबंधन ने पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया हो, लेकिन जिले में लगातार दूसरी बार सपा रालोद गठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया। वर्ष 2012 में सपा को तीन सीटों पर सफलता मिली थी।
जिले में सपा-रालोद गठबंधन को एक भी सीट नहीं मिल पाई, यह पहली दफा नहीं हुआ है। वर्ष 2017 में भी सपा गठबंधन को सातों सीटों पर पराजय झेलनी पड़ी थी। अलीगढ़ में सपा को गठबंधन रास नहीं आया। इससे पहले वर्ष 2017 में सपा ने कांग्रेस के साथ महागठबंधन किया था। इस महागठबंधन को सातों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा था।
इस बार वर्ष 2022 में सपा ने सियासत में नया प्रयोग करते हुए रालोद से गठबंधन किया था। सपा ने चार सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे, जबकि तीन सीटों पर रालोद ने प्रत्याशी उतारे। सपा ने शहर व कोल विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2017 में प्रत्याशी रहे जफर आलम व अज्जू इशाक को चुनाव मैदान में उतारा था, जबकि छर्रा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक ठा. राकेश सिंह की जगह लक्ष्मी धनगर को प्रत्याशी बनाया था। अतरौली विधानसभा से वीरेश यादव को दोबारा प्रत्याशी बनाया था। इसी तरह खैर, इगलास व बरौली की सीट रालोद के खाते में गई थी।
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उम्मीद जताई जा रही थी सपा गठबंधन शहर, कोल सहित जाटलैंड खैर, इगलास में बेहतर प्रदर्शन करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सभी सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशी हार गए। हालांकि, शहर व कोल विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशियों की हार में मतों का अंतर कम रहा। वर्ष 2012 में सपा ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा था और छर्रा विधानसभा क्षेत्र से ठा. राकेश सिंह, कोल से जमीर उल्लाह खान व शहर से जफर आलम ने चुनाव जीता था।
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भले ही उत्तर प्रदेश में सपा-रालोद गठबंधन ने पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया हो, लेकिन जिले में लगातार दूसरी बार सपा रालोद गठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया। वर्ष 2012 में सपा को तीन सीटों पर सफलता मिली थी।
जिले में सपा-रालोद गठबंधन को एक भी सीट नहीं मिल पाई, यह पहली दफा नहीं हुआ है। वर्ष 2017 में भी सपा गठबंधन को सातों सीटों पर पराजय झेलनी पड़ी थी। अलीगढ़ में सपा को गठबंधन रास नहीं आया। इससे पहले वर्ष 2017 में सपा ने कांग्रेस के साथ महागठबंधन किया था। इस महागठबंधन को सातों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा था।
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इस बार वर्ष 2022 में सपा ने सियासत में नया प्रयोग करते हुए रालोद से गठबंधन किया था। सपा ने चार सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे, जबकि तीन सीटों पर रालोद ने प्रत्याशी उतारे। सपा ने शहर व कोल विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2017 में प्रत्याशी रहे जफर आलम व अज्जू इशाक को चुनाव मैदान में उतारा था, जबकि छर्रा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक ठा. राकेश सिंह की जगह लक्ष्मी धनगर को प्रत्याशी बनाया था। अतरौली विधानसभा से वीरेश यादव को दोबारा प्रत्याशी बनाया था। इसी तरह खैर, इगलास व बरौली की सीट रालोद के खाते में गई थी।
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उम्मीद जताई जा रही थी सपा गठबंधन शहर, कोल सहित जाटलैंड खैर, इगलास में बेहतर प्रदर्शन करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सभी सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशी हार गए। हालांकि, शहर व कोल विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशियों की हार में मतों का अंतर कम रहा। वर्ष 2012 में सपा ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा था और छर्रा विधानसभा क्षेत्र से ठा. राकेश सिंह, कोल से जमीर उल्लाह खान व शहर से जफर आलम ने चुनाव जीता था।