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अलीगढ़ : घरों पर अदा की नमाज...फिर बोले, ईद मुबारक
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
कोरोना संक्रमण काल में दूसरी बार ईद उल फितर की खुशियां घरों में कैद होकर रह गईं। शहर की प्रमुख जामा मस्जिद ऊपरकोट, शहजमाज ईदगाह, शीशे वाली मस्जिद सहित सभी प्रमुख मस्जिदों में पांच-पांच लोगों ने नमाज अदा की। ज्यादातर लोगों ने सुबह अपने ही घरों पर ईद की नमाज अदा की। उसके बाद शाहजमाल कब्रिस्तान, जमालपुर कब्रिस्तान, क्वार्सी फार्म कब्रिस्तान में लोगों ने बुजुर्गों की कब्रों पर पहुंच कर फूल चढ़ा कर उनका याद किया। उनके लिए दुआ मांगी। इस दौरान लोगों ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया।
इसके बाद घरों में परिजनों से मुबारकबाद और कुछ रिश्तेदारों से मिलने जुलने का सिलसिला शुरू हो गया। ये सिलसिला आने वाले पांच छह दिनों तक चलता रहेगा। कामधंधे, सिनेमाघर, बाजार, पार्क और अधिकांश यातायात के साधन बहुत सीमित होने से अधिकांश लोगों ने ई रिक्शा से ही नये से पुराने शहर के बीच का सफर तय किया।
बच्चों का उत्साह देखते बनता था, लेकिन मास्क के कारण वह कुछ बेचैन से दिखे। शाहजमाल ईदगाह में ईद की नमाज नहीं होने से शाहजमाल से लेकर यूनिवर्सिटी सर्किल तक मांगने खाने वालों को परेशानी हुई क्योंकि रोजेदार जरूरतमंदों को सदका ए फितर नहीं दे पाए हैं। लगातार दूसरी बार ईद का त्योहार कोरोना कर्फ्यू में पड़ा है। वर्ष 2020 में भी ईद के मौके पर जिले में लॉकडाउन की पाबंदियां लागू थीं।
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समाजसेवी गुलजार अहमद ने बताया कि इस दौरान शाहजमाल कब्रिस्तान जाने वाले रास्ते पर लोगों के वाहन फंस गए। क्योंकि नाले पर लगाए गए पाइप टूट गए हैं, जिससे परेशानी हो रही है। नगर निगम ने शाहजमाल कब्रिस्तान को कोविड डेडिकेटेड कब्रिस्तान घोषित करा दिया है, लेकिन अभी तक नियमों के अनुसार सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
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कोरोना संक्रमण काल में दूसरी बार ईद उल फितर की खुशियां घरों में कैद होकर रह गईं। शहर की प्रमुख जामा मस्जिद ऊपरकोट, शहजमाज ईदगाह, शीशे वाली मस्जिद सहित सभी प्रमुख मस्जिदों में पांच-पांच लोगों ने नमाज अदा की। ज्यादातर लोगों ने सुबह अपने ही घरों पर ईद की नमाज अदा की। उसके बाद शाहजमाल कब्रिस्तान, जमालपुर कब्रिस्तान, क्वार्सी फार्म कब्रिस्तान में लोगों ने बुजुर्गों की कब्रों पर पहुंच कर फूल चढ़ा कर उनका याद किया। उनके लिए दुआ मांगी। इस दौरान लोगों ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया।
इसके बाद घरों में परिजनों से मुबारकबाद और कुछ रिश्तेदारों से मिलने जुलने का सिलसिला शुरू हो गया। ये सिलसिला आने वाले पांच छह दिनों तक चलता रहेगा। कामधंधे, सिनेमाघर, बाजार, पार्क और अधिकांश यातायात के साधन बहुत सीमित होने से अधिकांश लोगों ने ई रिक्शा से ही नये से पुराने शहर के बीच का सफर तय किया।
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बच्चों का उत्साह देखते बनता था, लेकिन मास्क के कारण वह कुछ बेचैन से दिखे। शाहजमाल ईदगाह में ईद की नमाज नहीं होने से शाहजमाल से लेकर यूनिवर्सिटी सर्किल तक मांगने खाने वालों को परेशानी हुई क्योंकि रोजेदार जरूरतमंदों को सदका ए फितर नहीं दे पाए हैं। लगातार दूसरी बार ईद का त्योहार कोरोना कर्फ्यू में पड़ा है। वर्ष 2020 में भी ईद के मौके पर जिले में लॉकडाउन की पाबंदियां लागू थीं।
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समाजसेवी गुलजार अहमद ने बताया कि इस दौरान शाहजमाल कब्रिस्तान जाने वाले रास्ते पर लोगों के वाहन फंस गए। क्योंकि नाले पर लगाए गए पाइप टूट गए हैं, जिससे परेशानी हो रही है। नगर निगम ने शाहजमाल कब्रिस्तान को कोविड डेडिकेटेड कब्रिस्तान घोषित करा दिया है, लेकिन अभी तक नियमों के अनुसार सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।