{"_id":"61292dda8ebc3e79ca1fb756","slug":"aligarh-poll-open-in-mock-drill-ventilator-off-not-even-face-mask-city-office-news-ali2717144122","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ : मॉक ड्रिल में खुली पोल : वेंटिलेटर बंद, फेस मास्क तक नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ : मॉक ड्रिल में खुली पोल : वेंटिलेटर बंद, फेस मास्क तक नहीं
विज्ञापन
अलीगढ़ : पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय मॉक ड्रिल में पीटू आईसीयू में बच्ची का चेकअप ?
- फोटो : CITY OFFICE
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
संभावित तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय सहित अन्य अस्पतालों में बनाए गए पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) में तैयारियां अभी अधूरी हैं। इसका खुलासा पीकू में मॉक ड्रिल के दौरान हुआ। यहां पर वेंटिलेटर बंद मिले, जबकि संक्रमित बच्चों के लिए फेस मास्क तक नहीं थे। दो दिन में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के पीकू वार्ड में 47 बेड हैं। 23 बेड आईसीयू के हैं, जिसमें 14 बेड बड़े एवं 10 बेड दो साल से छोटे बच्चों के लिए हैं। इसके अतिरिक्त 24 बेड एचडीयू के है। पीकू में छोटे बच्चों का एक भी वेंटिलेटर चालू स्थिति में नहीं है। इसकी वजह वाइटल मॉनिटर है, जिसके आने का इंतजार है। नेजल प्रोंग और फेस मास्क तक उपलब्ध नहीं है। एचएफएनसी कैनुला मशीन का भी इंतजार है। इसके अतिरिक्त अन्य कई उपकरण, दवाएं, इंजेक्शन का अभाव देखा गया।
आईसीयू में डॉक्टरों के हाथ धोने के लिए बेसिन मानक के अनुसार नहीं है। डॉक्टरों के लिए रेस्ट रूम नहीं है। नर्सिंग स्टेशन में हाथ धोने आदि का इंतजाम नहीं है। आईसीयू के दो चेंबर में एयर कंडीशन लगे हैं। बाकी में बजट मिलने का इंतजार है। डॉक्टर व स्टाफ की कमी मॉक ड्रिल में साफ-साफ दिखाई दी। लखनऊ से आए संयुक्त निदेशक डॉ. विकास सिंघल ने कहा कि अभी सुधार की जरूरत है। वह अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को देंगे।
विज्ञापन
मॉक ड्रिल में गंभीरता का अभाव
दीनदयाल अस्पताल में मॉक ड्रिल को भी किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। बीमार मां के साथ आई श्यामनगर की आठ वर्षीय सोनी पुत्री राजू को स्वास्थ्यकर्मियों ने स्ट्रेचर पर लिटाकर आईसीयू में ले गए। ऑक्सीजन मास्क लगा दिया गया। आईसीयू में पहुंचते ही बच्ची घबरा कर रोने लगी। पिता राजू उसे दूर से सांत्वना दे रहे थे। दरअसल मॉक ड्रिल के पहले तय नहीं था कि सोनी ही मरीज बनकर आईसीयू में जाएगी। आईसीयू में आने के पहले गेट पर ऑक्सीजन का स्तर एवं तापमान आदि देखकर तय करना होता है कि मरीज आईसीयू में जाएगा या नहीं। वहां पर मरीज का नाम-पता आदि भी नोट करना होता है। डॉक्टर व स्टाफ न तो पीपीई किट में थे और न ही कोरोना से संबंधित अन्य प्रोटोकाल का पालन कर रहे थे। मॉक ड्रिल के दौरान आईसीयू में बच्ची के पहुंचने पर नर्स तक मौजूद नहीं थी। एनेस्थेटिक एवं अन्य स्टाफ की कमी थी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. के शर्मा ही जानकारी दे रहे थे। बीच-बीच में सीएमएस डॉ. एसके उपाध्याय उनका सहयोग कर रहे थे। इमरजेंसी ट्रे में सभी जरूरी दवा एवं इंजेक्शन नहीं थे।
उपकरण, दवाओं की सभी जगह कमी
पीकू की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय, जेएन मेडिकल कॉलेज (दोनो एल-2) के अतिरिक्त अतरौली, खैर, इगलास एवं चंडौस (सभी एल-1) में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में संयुक्त निदेशक मलेरिया डॉ. विकास सिंघल मॉक ड्रिल में शामिल हुए। जेएन मेडिकल कॉलेज में डॉ. शोएब अंसारी एवं डॉ. अब्दुर्रहमान, इगलास में डॉ. रोहित माथुर, खैर में डॉ. एसपी सिंह, अतरौली में डॉ. दुर्गेश एवं चंडौस में डॉ. बीके राजपूत के नेतृत्व में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। सीएचसी खैर में स्टाफ पीपीई किट पहने थे। जेएन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक एवं स्टाफ यूनिफार्म में थे। एसीएमओ डॉ. अनुपम भास्कर ने बताया कि सभी जगह कुछ कमियों को चिन्हित किया गया है, जिसे दो दिन में दूर करने का निर्देश दिया गया है। अतरौली में वेंटिलेटर नहीं लगाया गया है। उपकरण व जरूरी दवा आदि की कमी सभी जगह देखी गई।
विज्ञापन
संभावित तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय सहित अन्य अस्पतालों में बनाए गए पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) में तैयारियां अभी अधूरी हैं। इसका खुलासा पीकू में मॉक ड्रिल के दौरान हुआ। यहां पर वेंटिलेटर बंद मिले, जबकि संक्रमित बच्चों के लिए फेस मास्क तक नहीं थे। दो दिन में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के पीकू वार्ड में 47 बेड हैं। 23 बेड आईसीयू के हैं, जिसमें 14 बेड बड़े एवं 10 बेड दो साल से छोटे बच्चों के लिए हैं। इसके अतिरिक्त 24 बेड एचडीयू के है। पीकू में छोटे बच्चों का एक भी वेंटिलेटर चालू स्थिति में नहीं है। इसकी वजह वाइटल मॉनिटर है, जिसके आने का इंतजार है। नेजल प्रोंग और फेस मास्क तक उपलब्ध नहीं है। एचएफएनसी कैनुला मशीन का भी इंतजार है। इसके अतिरिक्त अन्य कई उपकरण, दवाएं, इंजेक्शन का अभाव देखा गया।
विज्ञापन
आईसीयू में डॉक्टरों के हाथ धोने के लिए बेसिन मानक के अनुसार नहीं है। डॉक्टरों के लिए रेस्ट रूम नहीं है। नर्सिंग स्टेशन में हाथ धोने आदि का इंतजाम नहीं है। आईसीयू के दो चेंबर में एयर कंडीशन लगे हैं। बाकी में बजट मिलने का इंतजार है। डॉक्टर व स्टाफ की कमी मॉक ड्रिल में साफ-साफ दिखाई दी। लखनऊ से आए संयुक्त निदेशक डॉ. विकास सिंघल ने कहा कि अभी सुधार की जरूरत है। वह अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को देंगे।
विज्ञापन
मॉक ड्रिल में गंभीरता का अभाव
दीनदयाल अस्पताल में मॉक ड्रिल को भी किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। बीमार मां के साथ आई श्यामनगर की आठ वर्षीय सोनी पुत्री राजू को स्वास्थ्यकर्मियों ने स्ट्रेचर पर लिटाकर आईसीयू में ले गए। ऑक्सीजन मास्क लगा दिया गया। आईसीयू में पहुंचते ही बच्ची घबरा कर रोने लगी। पिता राजू उसे दूर से सांत्वना दे रहे थे। दरअसल मॉक ड्रिल के पहले तय नहीं था कि सोनी ही मरीज बनकर आईसीयू में जाएगी। आईसीयू में आने के पहले गेट पर ऑक्सीजन का स्तर एवं तापमान आदि देखकर तय करना होता है कि मरीज आईसीयू में जाएगा या नहीं। वहां पर मरीज का नाम-पता आदि भी नोट करना होता है। डॉक्टर व स्टाफ न तो पीपीई किट में थे और न ही कोरोना से संबंधित अन्य प्रोटोकाल का पालन कर रहे थे। मॉक ड्रिल के दौरान आईसीयू में बच्ची के पहुंचने पर नर्स तक मौजूद नहीं थी। एनेस्थेटिक एवं अन्य स्टाफ की कमी थी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. के शर्मा ही जानकारी दे रहे थे। बीच-बीच में सीएमएस डॉ. एसके उपाध्याय उनका सहयोग कर रहे थे। इमरजेंसी ट्रे में सभी जरूरी दवा एवं इंजेक्शन नहीं थे।
उपकरण, दवाओं की सभी जगह कमी
पीकू की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय, जेएन मेडिकल कॉलेज (दोनो एल-2) के अतिरिक्त अतरौली, खैर, इगलास एवं चंडौस (सभी एल-1) में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में संयुक्त निदेशक मलेरिया डॉ. विकास सिंघल मॉक ड्रिल में शामिल हुए। जेएन मेडिकल कॉलेज में डॉ. शोएब अंसारी एवं डॉ. अब्दुर्रहमान, इगलास में डॉ. रोहित माथुर, खैर में डॉ. एसपी सिंह, अतरौली में डॉ. दुर्गेश एवं चंडौस में डॉ. बीके राजपूत के नेतृत्व में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। सीएचसी खैर में स्टाफ पीपीई किट पहने थे। जेएन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक एवं स्टाफ यूनिफार्म में थे। एसीएमओ डॉ. अनुपम भास्कर ने बताया कि सभी जगह कुछ कमियों को चिन्हित किया गया है, जिसे दो दिन में दूर करने का निर्देश दिया गया है। अतरौली में वेंटिलेटर नहीं लगाया गया है। उपकरण व जरूरी दवा आदि की कमी सभी जगह देखी गई।