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जहरीली शराब प्रकरणः कागजों में ही दम तोड़ गई तीन सदस्यीय टीम, क्यों नहीं की छापेमारी
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जिले में जहरीली शराब का कहर एकाएक जो बरपा है, उसके पीछे अधिकारियों की पुरानी लापरवाही है। आलाधिकारियों के निर्देशों का कागजों में ही गला घोंट दिया जा रहा था। इसका नतीजा यह हुआ कि शराब तस्करों, नकली शराब के माफियाओं का हौसला बढ़ता गया।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले जिलाधिकारी व एसएसपी स्तर पर तय हुआ था कि जिले में चुनाव के दौरान शराब की तस्करी न हो, लोभ-प्रलोभन के लिए लोगों को शराब न बांटी जाए। इसकी निगरानी के लिए आबकारी विभाग, पुलिस व ड्रग इंस्पेक्टर को मिलाकर एक टीम बनाई गई। इसमें आबकारी व लोकल पुलिस को काम सौंपा गया कि वह इनपुट जुटाएं कि कौन-कौन पुराने शराब तस्कर सक्रिय हैं, नकली शराब, कच्ची शराब कहां-कहां बिकती है, कौन इसके पीछे हैं आदि। इस इनपुट के आधार पर ड्रग इंस्पेक्टर को साथ लेकर छापामारी करनी है।
मगर, इस टीम ने एक भी काम ऐसा नहीं किया, जिससे कि शराब पर अंकुश लगा हो, चुनाव प्रचार के दौरान खूब शराब बांटी गई, इसके अलावा हरियाणा की शराब की जमकर तस्करी हुई, सांकरा में कच्ची शराब बनाने का खेल खुलेआम हो रहा है। इन अधिकारियों की यह लापरवाही उन जिंदगियों पर भारी पड़ गई, जिन्होंने लाइसेंसी ठेके से शराब खरीदकर पी। यह असमय मौत के आगोश में जा रहे हैं। मृतक मनोज चौहान निवासी छेरत के परिवार वालों ने तो अधिकारियों के सामने पोस्टमार्टम हाउस पर ही सरेआम कहा कि प्रशासन से लेकर पुलिस की मिलीभगत से अवैध शराब का काम हो रहा है। गांव में नकली शराब बड़े स्तर पर बिकती है। 24 घंटे शराब के ठेके से शराब की बिक्री होती है। इसकी शिकायत करने वाले ग्रामीणों को पुलिस व आबकारी, प्रशासन के द्वारा ही शांत कर दिया जाता है।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले जिलाधिकारी व एसएसपी स्तर पर तय हुआ था कि जिले में चुनाव के दौरान शराब की तस्करी न हो, लोभ-प्रलोभन के लिए लोगों को शराब न बांटी जाए। इसकी निगरानी के लिए आबकारी विभाग, पुलिस व ड्रग इंस्पेक्टर को मिलाकर एक टीम बनाई गई। इसमें आबकारी व लोकल पुलिस को काम सौंपा गया कि वह इनपुट जुटाएं कि कौन-कौन पुराने शराब तस्कर सक्रिय हैं, नकली शराब, कच्ची शराब कहां-कहां बिकती है, कौन इसके पीछे हैं आदि। इस इनपुट के आधार पर ड्रग इंस्पेक्टर को साथ लेकर छापामारी करनी है।
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मगर, इस टीम ने एक भी काम ऐसा नहीं किया, जिससे कि शराब पर अंकुश लगा हो, चुनाव प्रचार के दौरान खूब शराब बांटी गई, इसके अलावा हरियाणा की शराब की जमकर तस्करी हुई, सांकरा में कच्ची शराब बनाने का खेल खुलेआम हो रहा है। इन अधिकारियों की यह लापरवाही उन जिंदगियों पर भारी पड़ गई, जिन्होंने लाइसेंसी ठेके से शराब खरीदकर पी। यह असमय मौत के आगोश में जा रहे हैं। मृतक मनोज चौहान निवासी छेरत के परिवार वालों ने तो अधिकारियों के सामने पोस्टमार्टम हाउस पर ही सरेआम कहा कि प्रशासन से लेकर पुलिस की मिलीभगत से अवैध शराब का काम हो रहा है। गांव में नकली शराब बड़े स्तर पर बिकती है। 24 घंटे शराब के ठेके से शराब की बिक्री होती है। इसकी शिकायत करने वाले ग्रामीणों को पुलिस व आबकारी, प्रशासन के द्वारा ही शांत कर दिया जाता है।
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