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अलीगढ़: कोरोना ही नहीं, ब्लड से जुड़ी अन्य बीमारियों में भी कारगर है प्लाजमा थैरेपी
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी से सिर्फ कोविड-19 के मरीजों का ही इलाज नहीं, बल्कि ब्लड से संबंधित जितनी भी बीमारियां हैं उन सभी का उपचार हो रहा है।
जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं हीमोफीलिया, प्रोटीन की कमी, शॉक्ड आदि कई तरह की बीमारियों में प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि जेएन मेडिकल कॉलेज में गैर कोरोना मरीजों का प्लाज्मा थेरेपी से उपचार पिछले सात-आठ वर्षों से किया जा रहा है, लेकिन कोविड-19 के समय में एक नई मशीन खरीदी गई और इसको महामारी को ध्यान में रखते ही खरीदा गया। इस तरह यह थेरेपी चर्चा में आ गई।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में अब तक कोविड-19 के मामले में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग का उपचार प्लाज्मा थेरेपी से किया गया था। जिनको अन्य कई प्रकार की बीमारियां थी। इनकी मल्टी ऑर्गन फैलियर के चलते मृत्यु हो गई थी। इस समय जेएन मेडिकल कॉलेज के प्लाज्मा बैंक में पांच यूनिट ब्लड मौजूद है। यह ब्लड भी मेडिकल कॉलेज के संक्रमित होकर स्वस्थ हो चुके स्टाफ ने डोनेट किया है । प्लाज्मा देने आने वालों में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो स्वस्थ होकर अपने घर गया हो और बाद में प्लाज्मा डोनेट करने आया हो।
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संक्रमण से स्वस्थ हुए हर मरीज में एंटीबॉडी बने जरूरी नहीं
प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि यह जरूरी नहीं कि संक्रमण से स्वस्थ हुए प्रत्येक मरीज के शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो जाए । इसलिए प्लाज्मा डोनेट करने से पहले हम डोनेट करने आए व्यक्ति में एंटीबॉडी की जांच करते हैं। दो तरह की एंटीबॉडी होती है एक्टिव और पैसिव। जांच करने के बाद ही यह तय किया जाता है कि हम प्लाज्मा लेंगे या नहीं।
प्लाज्मा डोनेट करने के लिए लोग आगे आएं, यह मानवता की सेवा होगी
जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि जो लोग संक्रमण से स्वस्थ हो गए हैं वह लोग प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आएं। यह मानवता की सच्ची सेवा होगी। अभी तक मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा बैंक में जो भी प्लाज्मा आया है वह मेडिकल के डॉक्टर और स्टाफ का ही है।
संक्रमण से ठीक होने के बाद दोबारा चपेट में नहीं आएंगे जरूरी नहीं: प्रिंसिपल
यह न समझें कि एक बार कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद दोबारा उसकी चपेट में नहीं आ सकते। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि अभी यह बिल्कुल भी नहीं कहा जा सकता कि एक बार संक्रमण से ठीक होने के बाद फिर से व्यक्ति कोरोना की चपेट में नहीं आ सकता। क्योंकि संक्रमण से ठीक होने के बाद शरीर में पैदा हुई एंटीबॉडी 2 से 6 महीने तक ही रहती है। अभी विश्व में इस पर परीक्षण चल रहा है कि मरीज सही होने के बाद फिर से संक्रमित हो सकता है या नहीं। प्रोफेसर सिद्दीकी कहते हैं कि यह वायरस लगातार अपनी प्रकृति को बदल रहा है, जिसके चलते इसके संबंध में किसी भी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने में कठिनाई आ रही है।
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जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं हीमोफीलिया, प्रोटीन की कमी, शॉक्ड आदि कई तरह की बीमारियों में प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि जेएन मेडिकल कॉलेज में गैर कोरोना मरीजों का प्लाज्मा थेरेपी से उपचार पिछले सात-आठ वर्षों से किया जा रहा है, लेकिन कोविड-19 के समय में एक नई मशीन खरीदी गई और इसको महामारी को ध्यान में रखते ही खरीदा गया। इस तरह यह थेरेपी चर्चा में आ गई।
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उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में अब तक कोविड-19 के मामले में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग का उपचार प्लाज्मा थेरेपी से किया गया था। जिनको अन्य कई प्रकार की बीमारियां थी। इनकी मल्टी ऑर्गन फैलियर के चलते मृत्यु हो गई थी। इस समय जेएन मेडिकल कॉलेज के प्लाज्मा बैंक में पांच यूनिट ब्लड मौजूद है। यह ब्लड भी मेडिकल कॉलेज के संक्रमित होकर स्वस्थ हो चुके स्टाफ ने डोनेट किया है । प्लाज्मा देने आने वालों में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो स्वस्थ होकर अपने घर गया हो और बाद में प्लाज्मा डोनेट करने आया हो।
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संक्रमण से स्वस्थ हुए हर मरीज में एंटीबॉडी बने जरूरी नहीं
प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि यह जरूरी नहीं कि संक्रमण से स्वस्थ हुए प्रत्येक मरीज के शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो जाए । इसलिए प्लाज्मा डोनेट करने से पहले हम डोनेट करने आए व्यक्ति में एंटीबॉडी की जांच करते हैं। दो तरह की एंटीबॉडी होती है एक्टिव और पैसिव। जांच करने के बाद ही यह तय किया जाता है कि हम प्लाज्मा लेंगे या नहीं।
प्लाज्मा डोनेट करने के लिए लोग आगे आएं, यह मानवता की सेवा होगी
जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि जो लोग संक्रमण से स्वस्थ हो गए हैं वह लोग प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आएं। यह मानवता की सच्ची सेवा होगी। अभी तक मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा बैंक में जो भी प्लाज्मा आया है वह मेडिकल के डॉक्टर और स्टाफ का ही है।
संक्रमण से ठीक होने के बाद दोबारा चपेट में नहीं आएंगे जरूरी नहीं: प्रिंसिपल
यह न समझें कि एक बार कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद दोबारा उसकी चपेट में नहीं आ सकते। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि अभी यह बिल्कुल भी नहीं कहा जा सकता कि एक बार संक्रमण से ठीक होने के बाद फिर से व्यक्ति कोरोना की चपेट में नहीं आ सकता। क्योंकि संक्रमण से ठीक होने के बाद शरीर में पैदा हुई एंटीबॉडी 2 से 6 महीने तक ही रहती है। अभी विश्व में इस पर परीक्षण चल रहा है कि मरीज सही होने के बाद फिर से संक्रमित हो सकता है या नहीं। प्रोफेसर सिद्दीकी कहते हैं कि यह वायरस लगातार अपनी प्रकृति को बदल रहा है, जिसके चलते इसके संबंध में किसी भी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने में कठिनाई आ रही है।