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आवारा गोवंश के पालन के लिए आगे नहीं रहे लोग
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आवारा गोवंश को गो प्रेमियों को देकर उनका पालन कराने के लिए लागू मुख्यमंत्री जन सहभागिता योजना में इस वित्तीय वर्ष में जिले की प्रगति शून्य है। पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के अथक प्रयासों के बाद भी लोग गो आश्रय स्थलों में रह रही गायों के पालन के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। इससे नाराज डीएम ने पशु चिकित्सा विभाग को गो प्रेमियों की खोज कर योजना में प्रगति लाने के आदेश जारी किए हैं।
आवारा गोवंश को आसरा देने के लिये सरकार ने गो आश्रय स्थल एवं गोशालाओं को खोलने के अलावा मुख्यमंत्री जन सहभागिता स्कीम लागू की थी। वर्ष 2019-20 में लागू इस योजना में गो आश्रय स्थल से कोई भी गो प्रेमी अधिकतम चार गाय पालन के लिए ले सकता है।
इसके एवज में सरकार प्रति गाय 30 रुपये प्रति दिन यानी 900 रुपये महीना भुगतान करती है। इस योजना में अब तक करीब एक हजार लोगों ने 1800 गोवंश पालन के लिए हैं। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस वित्तीय वर्ष में योजना की प्रगति शून्य पायी गई। इस पर डीएम सेल्वा कुमार जे ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से जवाब तलब किया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी चंद्रवीर सिंह ने बताया कि जन सहभागिता योजना में प्रगति लाने के लिए विभागीय टीमें लगा दी गई हैं।
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आवारा गोवंश को आसरा देने के लिये सरकार ने गो आश्रय स्थल एवं गोशालाओं को खोलने के अलावा मुख्यमंत्री जन सहभागिता स्कीम लागू की थी। वर्ष 2019-20 में लागू इस योजना में गो आश्रय स्थल से कोई भी गो प्रेमी अधिकतम चार गाय पालन के लिए ले सकता है।
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इसके एवज में सरकार प्रति गाय 30 रुपये प्रति दिन यानी 900 रुपये महीना भुगतान करती है। इस योजना में अब तक करीब एक हजार लोगों ने 1800 गोवंश पालन के लिए हैं। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस वित्तीय वर्ष में योजना की प्रगति शून्य पायी गई। इस पर डीएम सेल्वा कुमार जे ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से जवाब तलब किया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी चंद्रवीर सिंह ने बताया कि जन सहभागिता योजना में प्रगति लाने के लिए विभागीय टीमें लगा दी गई हैं।
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