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अलीगढ़ में बिना अनुमति किसान पंचायतः रालोद नेता जयंत चौधरी सहित पांच-छह हजार पर मुकदमा
Thu, 11 Feb 2021 02:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 11 Feb 2021 02:12 AM IST
सार
- जयंत के अलावा तीन नामजद, 5-6 हजार अज्ञात आरोपी
- मुरवार पैंठ में आयोजित की गई थी यह किसान पंचायत
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jayant chaudhary
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गोंडा के मुरवार में मंगलवार को किसान पंचायत आयोजित करने के फेर में रालोद नेता फंस गए हैं। पुलिस ने बिना अनुमति पंचायत के आयोजन को लेकर रालोद उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद जयंत चौधरी सहित 5-6 हजार अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। यह मुकदमा निषेधाज्ञा उल्लंघन व महामारी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।
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यह मुकदमा थाने के एसआई सोहनवीर सिंह की ओर से एक राय होकर निषेधाज्ञा उल्लंघन करने, महामारी अधिनियम आदि के तहत दर्ज किया गया है। जिसमें उल्लेख है कि रालोद के तत्वावधान में और पूर्व रालोद जिलाध्यक्ष रामबहादुर चौधरी की देखरेख में मुरवार पैंठ मैदान में यह पंचायत आयोजित की गई, जिसमें रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के अलावा स्थानीय नेता राज सिंह सभा अध्यक्ष, नवाब सिंह छौंकर संचालक के रूप में आरोपी बनाए गए हैं। इसके अलावा भीड़ में शामिल 5-6 हजार अज्ञात लोग आरोपी बनाए गए हैं। सीओ इगलास मोहसिन खान ने गोंडा में जयंत चौधरी सहित तीन नामजद रालोद नेताओं व अज्ञात पर मुकदमा दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।
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बता दें कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में गोंडा क्षेत्र के मुरवार कस्बे में मंगलवार को आयोजित किसान महापंचायत में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने किसानों का आह्वान किया था कि वह लक्ष्मण रेखा खींच लें कि कौन तुम्हारा है, कौन विरोधी? पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के कथन- ‘किसान एक आंख खेत पर रखे और एक सत्ता पर रखे’ को याद दिलाते हुए कहा कि अभी समय है। स्थितियों को पहचानो। किसानों को राजनीतिक ताकत का अहसास होना चाहिए। भेड़ की तरह पीछे चलना छोड़ दो।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 'किसान आंदोलनजीवी नहीं हैं। हम राजनीतिक रोटियां नहीं सेक रहे।' परिस्थितियां ऐसी बन चुकी हैं कि सारी बातें भूलकर एक हो जाएं। सरकार की ठोकर के कारण एक होने का मौका मिला है। विदाई समारोह में आंसू बहाने वाले प्रधानमंत्री किसान की बात करने पर ठहाका लगाकर उन्हें आंदोलनजीवी बताते हैं। पहले किसान आंदोलन वोट क्लब पर होते थे। अब तो दिल्ली में भी नहीं घुस सकते। चौ. चरण सिंह की जयंती पर किसान घाट जाने से रोका गया।