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अलीगढ़ः उच्च लवणता वाली भूमि को उपजाऊ बनाएगा नया प्रोटीन

Sat, 25 Sep 2021 12:44 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 12:44 AM IST
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डॉ. तारिक आफताब, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय। - फोटो : CITY OFFICE
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के खाते में बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। यहां के वनस्पति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तारिक आफताब ने जर्मनी के सहयोगियों के साथ मिलकर नए प्रोटीन की पहचान की है। इस नए प्रोटीन का नाम एचवीएचओआरसीएच रखा गया है। यह प्रोटीन फसली पौधों में नमक के प्रति सहनशीलता में सुधार करके उच्च लवणता वाली भूमि को खेती के योग्य बनाएगा। जिस मिट्टी में नमक (लवण) की मात्रा अधिक होती है, वहां पर पौधे वृद्धि नहीं कर पाते हैं और फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
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सीतापुर के मूल निवासी प्रोफेसर डॉ. तारिक आफताब ने विजिटिंग साइंटिस्ट के रूप में लाइबनिज इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट जेनेटिक्स एंड क्रॉप प्लांट रिसर्च गैटर्सलेबेन, जर्मनी में शोध कार्य शुरू किया था। डॉ. तारिक व उनके सहयोगी वर्ष 2013 से शोध कार्य में जुटे थे। कई वर्षों के अध्ययन और परीक्षणों के बाद उनको सफलता मिली। 23 सितंबर 2021 को उनकी यह रिपोर्ट इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर साइंसेज में प्रकाशित हुई है।
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इस संबंध में डॉ. तारिक ने बताया कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण लंबे समय तक तीव्र सूखे की भविष्यवाणी की गई है। सूखे से निपटने के लिए गहन सिंचाई के प्रयास मिट्टी की लवणता को बढ़ाते हैं और इस प्रकार खेती को बाधित करते हैं। लेकिन यह प्रोटीन उच्च लवणता वाली मिट्टी के बावजूद कृषि भूमि को अधिकाधिक उपजाऊ बनाने के लिए उत्तरदायी होगा।
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-- यह प्रोटीन जौ के पौधों में लवणता के प्रति सहिष्णुता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रोटीन की पहचान से तनाव प्रतिरोधी फसली पौधों के विकास में नए आयाम खुलेंगे। फिलहाल, अभी प्रयोग परीक्षण के दौर में है।

- डॉ. तारिक आफताब, एएमयू
समुद्र से सिंचाई वाली फसलों का उत्पादन बढ़ेगा
डॉ. तारिक के मुताबिक, समुद्र के आसपास के क्षेत्र की कृषि भूमि की सिंचाई समुद्री पानी से होती है। लेकिन समुद्र के पानी में नमक की मात्रा अधिक होती है। ऐसी स्थिति में नमक पौधे और जमीन में जम जाता है। इससे फसल का उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो पाता है। इस प्रोटीन के जरिये पौधे के जीन में परिवर्तन करके फसल का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, सामान्य इलाकों में भी सिंचाई के दौरान कृषि भूमि की लवणता बढ़ जाती है, जिसका असर फसल पर पड़ता है।
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