अलीगढ़ः आपसी रेस में फंसी साईकिल कैसे निकले आगे

Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 21 Sep 2021 06:47 PM IST
Aligarh news
विज्ञापन
ख़बर सुनें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में प्रस्तावित है। जिसमें भाजपा को कड़ी टक्कर देने का दावा कर रही सपा के कार्यकर्ताओं में जोश चरम पर है, लेकिन पदाधिकारियों और नेताओं की खुद की राजनीतिक आकांक्षाओं ने पार्टी के जमीनी कामकाज को प्रभावित कर दिया है। आलम यह है कि बूथ कमेटियां नहीं बन पाई हैं। जिलाध्यक्ष की कई पदाधिकारियों से तीखी बहस हो चुकी है। जिला और महानगर कमेटी के बीच भी कई जगह तालमेल नहीं दिखता है।
विज्ञापन

बीती 26 अगस्त को ख्वाजा जिबरान हसन के आवास पर ही यूथ बिग्रेड के प्रदेश अध्यक्ष अनीस राजा को अतरौली के आलमपुर ले जाने की पेशकश पर जिलाध्यक्ष का विरोध हुआ था। उस वक्त जिलाध्यक्ष के बातचीत करने के लहजे पर भी तीखी नोंकझोक हुई थी। ठीक दूसरे दिन 27 अगस्त को पूर्व विधायक जफर आलम ने अपने कार्यालय पर हुई पत्रकारवार्ता में कहा था कि सपा पदाधिकारियों को माला पहनने और फोटो खिंचाने का शौक ज्यादा है। जमीन पर उतना काम नहीं हो रहा है। उनके इस चेतावनी भरे बयान के बाद भी संगठन में खींचतान जारी है। पूर्व विधायक जमीरउल्लाह भी मानते हैं कि वर्तमान में पार्टी में काम करने वाले नेता और कुछ पदाधिकारी खुद का चेहरा चमकाने में ज्यादा जोर दे रहे हैं। संगठन मजबूत करने या बूथ स्तर पर काम करने में लोग मेहनत नहीं कर रहे हैं। वोट बढ़वाने के काम भी बहुत मेहनत से नहीं हो रहे हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि सभी को मिल कर सपा सरकार बनाने के लिए काम करना होगा, तभी चुनाव में जीत होगी। वरना नतीजा कुछ भी हो सकता है।

जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने कहा है कि समन्वय की कोई कमी नहीं है। सभी अपना अपना काम कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष और विधानसभा प्रभारी बूथ कमेटियां बना रहे हैं। हरेक विधानसभा में लगभग 380 से 400 बूथ कमेटियां बननी हैं। महानगर कमेटी कोल और शहर विधानसभा पर काम कर रही है। जिला और महानगर कमेटी में काम को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोषी ने कहा कि शहर में 391 बूथों पर और कोल में 399 बूथों पर कमेटियां बन चुकी है। अब अगर बूथ बढ़ेंगे तो कुछ नई कमेटियां बनेंगी। जिला कमेटी के साथ समन्वय पर उन्होंने कहा कि सभी अपना अपना काम कर रहे हैं। बड़ी पार्टी है इसलिए कुछ न कुछ होता रहता है। एक पूर्व विधायक ने कहा कि चुनाव लड़ने वाले दावेदार खुद ही अपनी कमेटियां बना रहे हैं। जो पहले से एक या दो बार से अधिक चुनाव लड़ चुके हैं उनकी कमेटियां बन चुकी हैं। इसलिए उनको जिला या महानगर संगठन की कमेटियों से बस थोड़ा सहयोग चाहिए। बाकी संगठन क्या कर रहा है ये सभी देख रहे हैं।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00