{"_id":"6140f4f38ebc3e88394c8908","slug":"aligarh-news-city-office-news-ali273196473","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ः मंच से जिस राजा का गुणगान, सामने बैठे उनके वंशजों से पीएम-सीएम रहे अंजान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ः मंच से जिस राजा का गुणगान, सामने बैठे उनके वंशजों से पीएम-सीएम रहे अंजान
विज्ञापन
राजा महेंद्र प्रताप सिंह के वशंज चरत प्रताप सिंह।
- फोटो : CITY OFFICE
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आशीष निगम
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विवि के शिलान्यास के मौके पर उनके वशंजों को यहां बुलाया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। ये भी कहना गलत न होगा कि पीएम और सीएम को कार्यक्रम में राजा के वशंजों की मौजूदगी की जानकारी ही न दी गई हो। अगर उनको जानकारी दी गई होती तो संभवत: राजा के वंशजों को भी मंच पर बुलाया जाता। दरअसल, प्रशासनिक अधिकारी इस वीवीआईपी कार्यक्रम की तैयारियों को पूरा करने और हर व्यवस्था को पुख्ता करने में इतना व्यस्त हो गए कि उनका ध्यान इस ओर नहीं गया। राजा के प्रपौत्र चरत प्रताप सिंह देहरादून से इस कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उनको वीआईपी पास भी जारी किया गया था।
जीटी रोड स्थित रमाडा होटल में ठहरे चरत प्रताप सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन ने उनको इस कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता दिया था। वीआईपी पास भी जारी किया, लेकिन वाहन का कोई पास नहीं दिया गया। जिससे उनको वाहन पार्क करने में खासी परेशानी हुई। उन्हें अपना वाहन वीआईपी पार्किंग से काफी दूर पार्क करना पड़ा। जब वो कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन की तैयारियां हो रही थीं। उनको मंच के पास तक पहुंचना था, लेकिन वीआईपी पास से मंच के पास जाना मुश्किल हो गया था, क्योंकि एसपीजी के अधिकारियों ने वहां सभी का प्रवेश रोक दिया था, केवल वही लोग मंच के पास जा रहे थे, जिनके पास मंच से संबंधित अलग पास था। जिसको चेक करने के बाद एसपीजी उनको अंदर जाने दे रही थी। चरत प्रताप सिंह ने बताया कि एक प्रशासनिक अधिकारी ने इस काम की जिम्मेदारी एक अन्य अधिकारी को दी थी, लेकिन संभवत: वह भी व्यस्त हो गए थे। इसके साथ ही सभास्थल पर जैमर चालू होने से मोबाइल फोन का नेटवर्क चला गया था, जिससे किसी से बात नहीं हो पा रही थी। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ गए और कार्यक्रम शुरू हो गया।
चरत प्रताप सिंह ने बताया कि वह वीआईपी दीर्घा में रहे और पूरा कार्यक्रम देखा। उन्हें बड़ा गर्व है कि दशकों बाद ही सही केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने उनके परदादा के त्याग और बलिदान को समझा तो सही। वह प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री से नहीं मिल सके। ये अलग बात है, लेकिन उनके परदादा का जो सम्मान आज हुआ है, वह उन्हें हमेशा याद रहेगा। आजादी की लड़ाई में लंबा संघर्ष करने वाले उनके परदादा को दशकों बाद वो सम्मान मिल पाया है, जिसके वह सच्चे हकदार थे। उनके नाम पर विवि की स्थापना के बाद युवा पीढ़ी को उनका आजादी की लड़ाई में योगदान याद रहेगा। ये मेरे पूरे परिवार के लिए बहुत गर्व की बात है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विवि के शिलान्यास के मौके पर उनके वशंजों को यहां बुलाया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। ये भी कहना गलत न होगा कि पीएम और सीएम को कार्यक्रम में राजा के वशंजों की मौजूदगी की जानकारी ही न दी गई हो। अगर उनको जानकारी दी गई होती तो संभवत: राजा के वंशजों को भी मंच पर बुलाया जाता। दरअसल, प्रशासनिक अधिकारी इस वीवीआईपी कार्यक्रम की तैयारियों को पूरा करने और हर व्यवस्था को पुख्ता करने में इतना व्यस्त हो गए कि उनका ध्यान इस ओर नहीं गया। राजा के प्रपौत्र चरत प्रताप सिंह देहरादून से इस कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उनको वीआईपी पास भी जारी किया गया था।
जीटी रोड स्थित रमाडा होटल में ठहरे चरत प्रताप सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन ने उनको इस कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता दिया था। वीआईपी पास भी जारी किया, लेकिन वाहन का कोई पास नहीं दिया गया। जिससे उनको वाहन पार्क करने में खासी परेशानी हुई। उन्हें अपना वाहन वीआईपी पार्किंग से काफी दूर पार्क करना पड़ा। जब वो कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन की तैयारियां हो रही थीं। उनको मंच के पास तक पहुंचना था, लेकिन वीआईपी पास से मंच के पास जाना मुश्किल हो गया था, क्योंकि एसपीजी के अधिकारियों ने वहां सभी का प्रवेश रोक दिया था, केवल वही लोग मंच के पास जा रहे थे, जिनके पास मंच से संबंधित अलग पास था। जिसको चेक करने के बाद एसपीजी उनको अंदर जाने दे रही थी। चरत प्रताप सिंह ने बताया कि एक प्रशासनिक अधिकारी ने इस काम की जिम्मेदारी एक अन्य अधिकारी को दी थी, लेकिन संभवत: वह भी व्यस्त हो गए थे। इसके साथ ही सभास्थल पर जैमर चालू होने से मोबाइल फोन का नेटवर्क चला गया था, जिससे किसी से बात नहीं हो पा रही थी। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ गए और कार्यक्रम शुरू हो गया।
विज्ञापन
चरत प्रताप सिंह ने बताया कि वह वीआईपी दीर्घा में रहे और पूरा कार्यक्रम देखा। उन्हें बड़ा गर्व है कि दशकों बाद ही सही केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने उनके परदादा के त्याग और बलिदान को समझा तो सही। वह प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री से नहीं मिल सके। ये अलग बात है, लेकिन उनके परदादा का जो सम्मान आज हुआ है, वह उन्हें हमेशा याद रहेगा। आजादी की लड़ाई में लंबा संघर्ष करने वाले उनके परदादा को दशकों बाद वो सम्मान मिल पाया है, जिसके वह सच्चे हकदार थे। उनके नाम पर विवि की स्थापना के बाद युवा पीढ़ी को उनका आजादी की लड़ाई में योगदान याद रहेगा। ये मेरे पूरे परिवार के लिए बहुत गर्व की बात है।
विज्ञापन