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चुनाव की घोषणा होते ही जिपं अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के दावेदार हुए सक्रिय
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कारोना की दूसरी घातक लहर के नियंत्रण में आते ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद और ब्लाक प्रमुख के चुनाव की तारीखों की घोषणा हो गई है। ये चुनाव 15 जून से 4 जुलाई के बीच होंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा के सामने सपा और रालोद की मजबूत दावेदारी है। वहीं बसपा और कुछ निर्दलीय इसको त्रिकोणीय कर सकते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा प्रत्याशी विजय देवी, सपा प्रत्याशी अर्चना यादव, रालोद में शामिल हुए पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंह के बीच में रोचक मुकाबला के आसार हैं।
अलीगढ़ में 47 सदस्यों का जिला पंचायत सदन है। जिसमें 24 सीट वाला दल ही विजयी हो जाएगा। भाजपा के नौ सदस्य पार्टी के समर्थन से, जबकि छह बागी होकर चुनाव जीते हैं। पार्टी का दावा है कि अब सभी 15 उसके साथ है। इसलिए पार्टी के पास 15 सदस्यों की ताकत है। पार्टी के पास कुछ निर्दलीय सदस्यों का समर्थन भी होना बताया जा रहा है। भाजपा की ओर से पूर्व सीएम कल्याण सिंह के पुत्र एटा सांसद राजवीर सिंह राजू की समधन विजय देवी प्रत्याशी हैं।
इधर, भाजपा को टक्कर दे रही सपा के साथ रालोद का गठबंधन है। दोनों ने 22 सदस्यों का समर्थन होने का सार्वजनिक दावा किया है। हालांकि सपा और रालोद के सात-सात प्रत्याशी विजयी हुए हैं, लेकिन दोनों ने 22 सदस्यों के समर्थन का दावा किया है। तीसरा गुट निर्दलीय प्रत्याशियों का है। जिसकी अगुवाई सुधीर सिंह कर रहे थे, लेकिन कुछ दिन पहले ही वह रालोद में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में अब निर्दलीय गुट कमजोर होता दिख रहा है। बसपा के पास भी सात प्रत्याशियों का बल है, लेकिन पार्टी की ओर से अभी तक कुछ खास एलान नहीं किया गया है। जिला पंचायत सदस्यों की 17 सीटें निर्दलियों के पास हैं। यही वजह है कि अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर घमासान मचा हुआ है। बहुमत न होने पर राजनीतिक दलों के नेता निर्दलियों को अपनी तरफ बुलाने में जुटे हैं। अब निर्दलीय ही अध्यक्ष का चुनाव तय करेंगे।
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इधर, जिले के 12 ब्लाकों में ब्लाक प्रमुख पदों को लेकर भी उठापटक शुरू हो गई है। भाजपा, सपा, बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी हर जोड़तोड़ कर कुर्सी की जुगाड़ में हैं। इसमें कुछ प्रत्याशी अपना गणित लगा चुके हैं तो चुनाव की घोषणा के इंतजार में रहे लोग अब जोर आजमाइश कर रहे हैं।
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अलीगढ़ में 47 सदस्यों का जिला पंचायत सदन है। जिसमें 24 सीट वाला दल ही विजयी हो जाएगा। भाजपा के नौ सदस्य पार्टी के समर्थन से, जबकि छह बागी होकर चुनाव जीते हैं। पार्टी का दावा है कि अब सभी 15 उसके साथ है। इसलिए पार्टी के पास 15 सदस्यों की ताकत है। पार्टी के पास कुछ निर्दलीय सदस्यों का समर्थन भी होना बताया जा रहा है। भाजपा की ओर से पूर्व सीएम कल्याण सिंह के पुत्र एटा सांसद राजवीर सिंह राजू की समधन विजय देवी प्रत्याशी हैं।
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इधर, भाजपा को टक्कर दे रही सपा के साथ रालोद का गठबंधन है। दोनों ने 22 सदस्यों का समर्थन होने का सार्वजनिक दावा किया है। हालांकि सपा और रालोद के सात-सात प्रत्याशी विजयी हुए हैं, लेकिन दोनों ने 22 सदस्यों के समर्थन का दावा किया है। तीसरा गुट निर्दलीय प्रत्याशियों का है। जिसकी अगुवाई सुधीर सिंह कर रहे थे, लेकिन कुछ दिन पहले ही वह रालोद में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में अब निर्दलीय गुट कमजोर होता दिख रहा है। बसपा के पास भी सात प्रत्याशियों का बल है, लेकिन पार्टी की ओर से अभी तक कुछ खास एलान नहीं किया गया है। जिला पंचायत सदस्यों की 17 सीटें निर्दलियों के पास हैं। यही वजह है कि अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर घमासान मचा हुआ है। बहुमत न होने पर राजनीतिक दलों के नेता निर्दलियों को अपनी तरफ बुलाने में जुटे हैं। अब निर्दलीय ही अध्यक्ष का चुनाव तय करेंगे।
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इधर, जिले के 12 ब्लाकों में ब्लाक प्रमुख पदों को लेकर भी उठापटक शुरू हो गई है। भाजपा, सपा, बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी हर जोड़तोड़ कर कुर्सी की जुगाड़ में हैं। इसमें कुछ प्रत्याशी अपना गणित लगा चुके हैं तो चुनाव की घोषणा के इंतजार में रहे लोग अब जोर आजमाइश कर रहे हैं।