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13.32 लाख के गबन में फंसे प्रधान और सचिव
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शौचालय निर्माण में एक और घोटाला सामने आया है। हजियापुर प्रधान ने सचिव के साथ मिलकर कागजों में शौचालय बना दिये। जांच में 13.32 लाख का घोटाला सामने आने पर डीएम ने सात दिन में रिकवरी के आदेश जारी कर दिये हैं। पैसा न लौटने पर मुकद्दमा दर्ज कराने को कहा है।
टप्पल ब्लॉक के गांव हजियापुर में ग्राम प्रधान ने ग्राम सचिव के साथ मिलकर शौचालय निर्माण में 13.32 लाख रुपए का घोटाला कर दिया। इस बात का खुलासा तब हुआ कि जब ग्रामीणों की शिकायत पर जिले के अधिकारियों ने गांव में बने शौचालयों की जांच की थी। अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम चन्द्रभूषण ने सात दिन के अंदर रिकवरी के आदेश दिए है। साथ ही सात दिन में धनराशि नहीं लौटाने पर मुकदमा दर्ज किया जाने की बात कही है।
यह है मामला
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में शौचालयों का निर्माण होना था। योजना में लाभार्थी को शौचालय निर्माण के लिए 12000 रुपए दिए जाने का प्रावधान है। इस योजना के तहत ग्राम पंचायत हजियापुर को सरकार द्वारा 38.52 लाख रुपए की राशि जारी की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लाभार्थियों को शौचालयों नहीं मिले और अपात्रों को योजना का लाभ दे दिया गया। अधिकांश शौचालयों का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं किया गया, जबकि कई काग़जों में बन गए। इस मामले में शिकायतकर्ता देवेश मालान एडवोकेट ने एसडीएम, डीएम, सीडीओ, मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत की।
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शिकायत का सीडीओ अनुनय झा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए डीपीआरओ को जांच सौंपी। जांच अधिकारी डीसी जिया अहमद खान ने बताया कि गांव में ग्राम प्रधान ने 13.32 लाख रुपए के शौचालयों का निर्माण ही नहीं कराया और खाते से धनराशि निकाल ली गई। अपात्रों को शौचालय आवंटित किए गए और ग्राम निधि का प्रधान ने सचिव के साथ मिलकर धनराशि का दुरुपयोग किया है। अपनी जांच में प्रधान व सचिव द्वारा ग्राम निधि के गबन होने की बात कही है। इसके बाद दो बार एडीओ स्तर से जांच का सत्यापन करा कर डीपीआरओ ने डीएम को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम चन्द्रभूषण सिंह ने प्रधान, तत्कालीन सचिव व वर्तमान सचिव से गबन की गई राशि के सात दिन में रिकवरी के आदेश दिए हैं।
डीपीआरओ पारुल सिसौदिया ने बताया कि गबन की गई आधी रकम 6.66 लाख रुपए प्रधान रजनीश कुमार उर्फ सोनू, 5.16 लाख रुपए तत्कालीन सचिव डोरीलाल व 1.50 लाख रुपए की धनराशि वर्तमान सचिव महर सिंह से सात दिन के अंदर वसूल किए जाएंगे। वहीं शिकायकर्ता देवेश मालान का ने प्रशासन से मांग की है कि भ्रष्टाचारियों से धनराशि की वसूली के साथ ही उनके खिलाफ कानून कार्रवाई की जानी चाहिए।
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टप्पल ब्लॉक के गांव हजियापुर में ग्राम प्रधान ने ग्राम सचिव के साथ मिलकर शौचालय निर्माण में 13.32 लाख रुपए का घोटाला कर दिया। इस बात का खुलासा तब हुआ कि जब ग्रामीणों की शिकायत पर जिले के अधिकारियों ने गांव में बने शौचालयों की जांच की थी। अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम चन्द्रभूषण ने सात दिन के अंदर रिकवरी के आदेश दिए है। साथ ही सात दिन में धनराशि नहीं लौटाने पर मुकदमा दर्ज किया जाने की बात कही है।
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यह है मामला
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में शौचालयों का निर्माण होना था। योजना में लाभार्थी को शौचालय निर्माण के लिए 12000 रुपए दिए जाने का प्रावधान है। इस योजना के तहत ग्राम पंचायत हजियापुर को सरकार द्वारा 38.52 लाख रुपए की राशि जारी की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लाभार्थियों को शौचालयों नहीं मिले और अपात्रों को योजना का लाभ दे दिया गया। अधिकांश शौचालयों का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं किया गया, जबकि कई काग़जों में बन गए। इस मामले में शिकायतकर्ता देवेश मालान एडवोकेट ने एसडीएम, डीएम, सीडीओ, मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत की।
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शिकायत का सीडीओ अनुनय झा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए डीपीआरओ को जांच सौंपी। जांच अधिकारी डीसी जिया अहमद खान ने बताया कि गांव में ग्राम प्रधान ने 13.32 लाख रुपए के शौचालयों का निर्माण ही नहीं कराया और खाते से धनराशि निकाल ली गई। अपात्रों को शौचालय आवंटित किए गए और ग्राम निधि का प्रधान ने सचिव के साथ मिलकर धनराशि का दुरुपयोग किया है। अपनी जांच में प्रधान व सचिव द्वारा ग्राम निधि के गबन होने की बात कही है। इसके बाद दो बार एडीओ स्तर से जांच का सत्यापन करा कर डीपीआरओ ने डीएम को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम चन्द्रभूषण सिंह ने प्रधान, तत्कालीन सचिव व वर्तमान सचिव से गबन की गई राशि के सात दिन में रिकवरी के आदेश दिए हैं।
डीपीआरओ पारुल सिसौदिया ने बताया कि गबन की गई आधी रकम 6.66 लाख रुपए प्रधान रजनीश कुमार उर्फ सोनू, 5.16 लाख रुपए तत्कालीन सचिव डोरीलाल व 1.50 लाख रुपए की धनराशि वर्तमान सचिव महर सिंह से सात दिन के अंदर वसूल किए जाएंगे। वहीं शिकायकर्ता देवेश मालान का ने प्रशासन से मांग की है कि भ्रष्टाचारियों से धनराशि की वसूली के साथ ही उनके खिलाफ कानून कार्रवाई की जानी चाहिए।