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पीपीई किट चिता में डाली और पिता को दी मुखाग्नि

Fri, 15 May 2020 12:21 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2020 12:21 AM IST
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Aligarh news
कोरोना वायरस से संक्रमित होकर जान गंवाने वाले मामू भांजा के पानी कारोबारी के अंतिम संस्कार के दौरान मुखागिभन देने पहुंचे बेटे की हरकत ने सभी को हैरान कर दिया। जब मुखागिभन से पहले उसे पीपीई किट पहनने को दी गई तो उसने उसे चिता में डाल दिया और पिता को मुखागिभन दे दी। यह देख अधिकारी उसे रोकते टोकते रह गए। मगर तब तक देर हो चुकी थी। इस तरह 68 वर्षीय कारोबारी के बेटे ने बिना पीपीई किट पहने ही मुखागिभन दे दी।
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मामू भांजा के 68 वर्षीय पानी कारोबारी की मौत कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण बृहस्पतिवार को जेएन मेडिकल कॉलेज में हुई।
नुमाइश मैदान स्थित मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुक्तिधाम में बिना पूर्व सूचना दिए जब सील शव को लाया गया। उस समय वहां अशोकनगर के एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसकी वजह से वहां अफरा-तफरी मच गई। मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी यह देखकर नाराज हो गए। एंबुलेंस से उतर चुके शव को पुन: अंदर रखवाया गया। अशोक नगर के व्यक्ति के शव के अंतिम संस्कार के बाद सैनिटाइज कर पानी कारोबारी के शव का अंतिम संस्कार किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि पानी कारोबारी के बेटे ने बिना पीपीई किट पहने पिता को मुखागिभन दी। विष्णु कुमार बंटी का कहना है कि पुत्र को पीपीई किट दी गई थी, लेकिन उसने उसे पहनने के बजाय उसे चिता में डाल दिया। वहां पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।
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मृतक के पुत्र को जिला प्रशासन द्वारा पीपीई किट पहनने के लिए दी थी, परंतु मृतक के पुत्र ने न तो किट का उपयोग किया और न मास्क पहना। किट न दिए जाने या बिना किट अंतिम संस्कार को लेकर फैलाई जा रही खबरें भ्रामक हैं।-चंद्रभूषण सिंह डीएम
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गाइडलाइन इस प्रकार हैं
1-शव को सिर्फ एक बार परिजनों को देखने की इजाजत होगी।
2. यदि कोई धार्मिक रीति रिवाज है तो उसे किया जा सकता है, लेकिन उसके लिए शव को जिस बैग में रखा गया है उसे खोला नहीं जाएगा।
3. शव को स्नान कराने, गले लगाने (किस करने) की मनाही है।
4. शव यात्रा में शामिल लोग अंतिम क्रिया के बाद सभी पूरी तरह से हाथ-मुंह को साफ करेंगे और सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
5. शव को जलाने के बाद राख को नदी में प्रवाहित कर सकते हैं। इससे कोई खतरा नहीं है। शव जलने के बाद किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है।
6. जितना हो सके कम से कम संख्या में लोग शवयात्रा में जाएं।
7. अस्पताल से शव को खास तरह के बॉडी बैग में ले जाया जाए।
8. जो कोई भी शव लेकर चले वह सर्जिकल मास्क, ग्लब्स और जरूरी कपड़े बिना पहने नहीं आए।
9. शव यात्रा में शामिल गाड़ी को भी बाद में सेनेटाइज किया जाए।
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