आबादी को देखते हुए छर्रा को नगर पालिका का दर्जा मिलना चाहिए। इतना ही नहीं, छर्रा को तहसील बनाने की मांग कई बार उठाई गई। लेकिन अभी तक तहसील की मांग पूरी नहीं हुई है। तहसील बने तो क्षेत्रवासियों का भला होगा। लोगों की समस्याओं का समाधान तहसील स्तर पर होने लगेगा। छर्रा विधानसभा में एक भी तहसील नहीं है। जो कि विचारणीय है। जो भी क्षेत्रीय विधायक बने, उसे इन्हीं पहलुओं पर सबसे पहला काम करना होगा। तभी सर्व समाज के लोगों को इसका लाभ मिल पाएगा। यह बातें मंगलवार को छर्रा में कासगंज रोड पर चल रही चुनावी चाय के दौरान लोगों ने कहीं।
लालू महाजन ने कहा कि कस्बा की आबादी को देखते हुए छर्रा को नगर पालिका का दर्जा मिलना चाहिए। प्यारेलाल भारती ने कहा कि छर्रा को तहसील बनाने की मांग कई बार जोर पकड़ी है, लेकिन तहसील की मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है। छर्रा विधानसभा के लोग दो हिस्सों में अतरौली व कोल तहसील के चक्कर काटते हैं। पहली तहसील अतरौली में छर्रा, गंगीरी, बरला क्षेत्र के लोग काम कराते हैं। जबकि इसी विधानसभा के अकराबाद, पनैठी, जलाली, पिलखना, कौड़ियागंज, धनीपुर व विजयगढ़ के लोग कोल तहसील तक दौड़ लगाते हैं। अगर छर्रा तहसील बन जाए तो लोगों का समय और अतिरिक्त खर्चा बचने लगेगा। हरिश्चंद्र गुप्ता ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद प्रत्याशी को आम लोगों के दुख दर्द को समझना होगा। उनके साथ खड़ा होना होगा। प्रत्याशी शिक्षित होने के साथ क्षेत्रवासियों का मान सम्मान रखे। अपनी विधानसभा में बिना भेदभाव के विकास कार्य कराए। रोजगार पर चर्चा करते हुए राजा रावत ने कहा की सरकार जो भी बने। युवाओं के लिए रोजवार मुहैया कराए। बेरोजगारी पर काम करते हुए विधानसभा में औद्योगीकरण पर जोर दे। जिससे बेरोजगारों व बाहर कार्य करने जाने वाले लोगों को क्षेत्र से ही रोजगार मिल सके।