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अपना बर्तन लाओ तो मिड डे मील खाओ

Thu, 28 Nov 2019 01:51 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 28 Nov 2019 01:51 AM IST
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Aligarh: Mid day meal news
हिन्दू इंटर कॉलेज में बर्तन ना होने पर दौने में दूध लेता छात्र। - फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी
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बर्तन लाओ खाना खाओण्ण्। जी हां मिड डे मील में कुछ ऐसी ही व्यवस्था है। जिससे सरकारी व एडेड इंटर कालेज के विद्यार्थी खुद को मन ही मन अपमानित सा महसूस करते हैं। बच्चे एमडीएम खाने के लिए घर से खाली टिफिन लेकर आते हैं। इस टिफिन में ही खाना खाते हैंए दूध पीते हैं। कहीं कहीं तो बर्तन नहीं ला पाने वाले बच्चे मुंह ताकते रहते हैं कि किसी का टिफिन खाली हो तो उसमें एमडीएम खाएं। जिले के अधिकांश स्कूलों में मिड डे मील बंटते वक्त यही नजारा होता है।
अमर उजाला ने बुधवार को 11.40 बजे शहर के एसएमबी इंटर कालेज में इसकी जमीनी पड़ताल की। ठीक 12 बजे लंच होने पर यहां बच्चे घर से लाया हुआ टिफिन लेक र आए और तहरी के लिए लाइन में लग गए। जिन बच्चों के पास टिफिन नहीं थेए उन बच्चों ने दोस्त के खाने के बाद उसका टिफिन धोकर तहरी ली। 12 बजकर 15 मिनट पर हिंदू इंटर कालेज में लंच में बच्चे घर से ही टिफिन लेकर आए थे। जिन पर बर्तन नहीं थेए वह इधर उधर से डिस्पोजल बर्तन मांगकर लाए। दूध बांटने को लेकर यहां असमंजस की स्थिति रही।
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एक में पहुंचा नहीं तो दूसरे पहली बार आधा ही दूध पहुंचा
एसएमबी इंटर कालेज में बच्चों को पीने के लिए दूध नहीं पहुंचा। वहीं हिंदू इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डॉ दिनेश शर्मा ने बताया कि दूध पहली बार स्कूल में आया है। वह भी आधा। उपस्थित 69 बच्चों के लिए 150 एमएल के हिसाब से 10.35 लीटर दूध पहुंचना था। लेकिन मिड डे मील देने वाली संस्था ने पानी वाला पांच लीटर दूध ही पहुंचाया।
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यह बोले बच्चे
जब सरकार खाना दे रही है तो बर्तन भी होनेे चाहिए। चिराग सैनी
घर से बर्तन लाना बुरा लगता है, मगर मजबूरी में खाने के लिए लाना भी पड़ता है। अनीमेश कुमार गुप्ता
यह है बर्तनों की स्थिति
जिले में अखिलेश यादव की सपा सरकार के समय वित्तीय वर्ष 2016.17 में तकरीबन एक लाख बर्तन बेसिक स्कूलों के लिए भेजे गए। इनमें से लगभग दस हजार बर्तन टूट फूट चुके हैं या गायब हो चुके हैं। जबकि सरकारी विद्यालय तथा एडेड इंटर कालेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए आज तक बर्तन नहीं दिए गए। यही वजह है कि बच्चे घर से बर्तन लाने को मजबूर है।

मिड डे मील के बर्तनों के लिए शासन से अधिष्ठान को कोई अतिरिक्त बजट नहीं मिलता है। पुराने जीओ के अनुसार स्कूलों में कुछ बर्तन बंटेथे, लेकिन ये पर्याप्त नहीं हैं। स्कूल मानीटरिंग कमेटी अगर प्रस्ताव भेजती है तो उसे शासन को भिजवा दिया जाएगा।
अनुनय झा, सीडीओ

एसएमबी इंटर कॉलेज में घर से लाए हुए टिफिन में एमडीएम लेते बच्चे।

एसएमबी इंटर कॉलेज में घर से लाए हुए टिफिन में एमडीएम लेते बच्चे। - फोटो : CITY OFFICE

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