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अलीगढ़: मास्टर प्लान 2031 में फंस गए कई और प्लान
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आशीष निगम
अलीगढ़। अलीगढ़ शहर की सेटेलाइट इमेज में लगभग तीन लाख घर गिने गए हैं। मास्टर प्लान 2031 को डिजाइन करने के वास्ते नेशनल रिमोट सेंससिंग सेंटर (एनआरएससी) हैदराबाद से कराई गई मकानों, दुकानों, गोदामों की जीआईएस मैपिंग ये बड़ी संख्या सामने आयी है। (इससे पहले नगर निगम द्वारा कराए गए सर्वे में शहरी सीमा में 2.75 लाख मकान, दुकान, गोदाम सामने आ चुके हैं। ये सर्वे स्मार्ट सिटी योजना में हुआ था) इसी सर्वे के आधार पर नया मास्टर प्लान 2031 बनाया जा रहा है। जिसमें चारों ओर तेजी से विकसित हो रहे अलग-अलग प्रोजेक्ट, 600 से अधिक अवैध कॉलोनियां, बेतरतीब औद्योगिकीकरण को समाहित कर आधुनिक शहर बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
इन समस्याओं को सुलझाने के लिए आगामी 27 नवंबर को कमिश्नरी सभागार में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। जिसकी अध्यक्षता मंडलायुक्त जीएस प्रियदर्शी करेंगे। जिसमें शहर के विकास से सीधे तालुक्क रखने वाले सभी विभागों को बुलाया गया है, जहां एक बार फिर से अलीगढ़ को गढ़ने का चुनौतीपूर्ण काम होना है, जो किसी भी लिहाज से आसान नहीं है।
अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के एक्सईएन डीएस भदौरिया ने बताया कि आगरा अलीगढ़ मंडल के टाउन प्लानर अशोक कुमार मास्टर प्लान 2031 को तैयार करा रहे हैं। सरकार की ओर से इसकी जिम्मेदारी आल इंडिया लोकल सेल्फ गर्वमेंट नाम की एनजीओ को सौंपी गई है। टाउन प्लानर अशोक कुमार ने बताया कि उनके पास वर्तमान में आगरा और अलीगढ़ मंडल के सात शहरों का मास्टर प्लान बनवाने की जिम्मेदारी है। इसमें आगरा, मथुरा, मैनपुरी, फीरोजाबाद-शिकोहाबाद, अलीगढ़, हाथरस, एटा और कासगंज की महायोजनाएं शामिल हैं। अलीगढ़ को नया लुक देने वाली एनजीओ मुंबई को विकसित करने के साथ ही अरुणाचल प्रदेश के कई शहरों में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
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बहरहाल, वर्तमान में वर्ष 2001 में बना मास्टर प्लान 2021 लागू है, जो आने वाले कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा। नया प्लान इससे पहले तैयार होगा और राज्य सरकार की मुहर के बाद लागू होगा। यकीनन कोरोना संक्रमण काल के चलते इसको बनाने में देरी हो रही है, लेकिन एक बात काबिल ए गौर है कि स्मार्ट सिटी योजना के काम शुरू होने से पहले कभी ऐसी उच्च स्तरीय बैठक नहीं हुई, जिसमें मास्टर प्लान को लेकर भी चर्चा हुई हो, जबकि दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
ये प्रोजेक्ट होने हैं समाहित
अलीगढ़। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ट्रांसपोर्ट नगर, स्व. राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, धनीपुर हवाई पट्टी अपग्रेडेशन, स्मार्ट सिटी योजना, पैन सिटी प्रोजेक्ट, तालानगरी औद्योगिक अस्थान, आईटीआई औद्योगिक अस्थान, भदेसी में निर्माणाधीन रेलवे यार्ड, रेलवे का डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, मथुरा रोड की मीट इकाइयां, रेलवे स्टेशन विस्तार, नए और पुरान बस अड्डे, शहर के चारों ओर फोरलेन नेटवर्क, प्रस्तावित रिंग रोड।
कैसा होगा नया मास्टर प्लान 2031
अलीगढ़। अर्बन प्लानर संतोष चौधरी ने बताया कि अलीगढ़ के परंपरागत उद्योगों को बढ़ावा देने, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ ड्रेनेज, सीवरेज देना पहली प्राथमिकताओं में शुमार किया जाएगा। प्रदूषण स्तर कम कर हरियाली को बढ़ावा दिया जाएगा। शहरी आबादी में छोटे-छोटे पार्क विकसित होंगे। इमारतों पर हरियाली को बढ़ावा दिया जाएगा। मिश्रित आबादी में प्रदूषण नहीं करने वाली छोटी औद्योगिक इकाइयां चालू रहेंगी। प्रदूषण करने वाली शहर की सीमा से बाहर होंगी। उनको निकटवर्ती औद्योगिक अस्थान में जाना होगा। मथुरा रोड की मीट इकाइयां सुव्यवस्थित होंगी। लैंड यूज को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश होंगे। अवैध कॉलोनियों को वैध कराने का उपाय दिया जाएगा। नई बसावट करने वाले बिल्डरों को योजना में जोड़ा जाएगा। शहर के चारों ओर औद्योगिक अस्थान बनेंगे, उसके आसपास की इकाइयां वहां पर समाहित होंगी। इसके अलावा वर्तमान में जारी प्रोजेक्ट भी समाहित किए जाएंगे।
70 लाख रुपये में आल इंडिया लोकल
अलीगढ़। लगभग सौ वर्ष पुरानी आल इंडिया लोकल सेल्फ गर्वमेंट नाम की एनजीओ अलीगढ़ शहर का मास्टर प्लान 2031 तैयार कर रही है, जिसका मुख्यालय मुंबई और क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली में है। इस कंपनी की अर्बन प्लानर संतोष चौधरी ने बताया कि कंपनी अलीगढ़, खुर्जा और बुलंदशहर के लिए मास्टर प्लान 2031 तैयार कर रही है। जिसका अनुमानित खर्च लगभग 1.70 करोड़ रुपये है। इसमें अलीगढ़ का बजट लगभग 70 लाख के करीब है। बाकी धनराशि में दो शहर हैं। शहर को नई जरूरतों के अनुसार विकसित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने, लोगों को बेहतर पर्यावरण देने के मूल उद्देश्य के साथ मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। इसकी थीम जल्द सामने आएगी।
27 नवंबर को होगी मीटिंग
अलीगढ़। मास्टर प्लान 2031 को बेहतर ढंग से डिजाइन करने के लिए आगामी 27 नवंबर को एक आवश्यक बैठक बुलाई गई है। जिसमें नगर निगम, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट लिमिटेड, एडीए, जिला प्रशासन, टाउन प्लानर आगरा-अलीगढ़ मंडल शामिल होंगे। इस बैठक में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जलकल विभाग, बिजली विभाग, एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, जिला पंचायत, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी कार्यालय को भी बुलाया जा रहा है, ताकि आंकड़ों के साथ समग्रता से एक आधुनिक शहर का डिजाइन बन सके।
क्या हो रहा है मास्टर प्लान में..?
1-आल इंडिया लोकल सेल्फ गर्वमेंट नाम की एनजीओ बना रही मास्टर प्लान।
2-अब तक 1500 से अधिक आपत्तियां आ चुकी हैं मास्टर प्लान 2031 को लेकर।
3-चारों ओर तेजी से विकसित हो रहे शहर को मास्टर प्लान में समाहित करना चुनौती।
4-जीआईएस सर्वे से अब तक तीन लाख घरों का आंकलन किया जा चुका है।
5-केंद्र सरकार के दिशा निर्देश पर 70 चरण और 400 उपचरण में बनेगा नया प्लान।
6-नेशनल रिमोर्ट सेंससिंग सेंटर (एनआरएससी) हैदराबाद से जीआईएस मैपिंग हो रही।
7-अमृत योजना के तहत देश के 500 शहरों में मास्टर प्लान बन रहा, जिसमें 60 यूपी के।
8-अलीगढ़ मास्टर प्लान 2031 की नई थीम भी जल्द ही सामने आएगी, पर्यावरण पर जोर।
9-मिश्रित आबादी के तहत कुटीर उद्योगों को राहत, प्रदूषण फैलाने वालों को बाहर जाना होगा।
10-शहर की चारों दिशाओं में लगे उद्योगों को भी इस प्लान में एक सिस्टम में लाया जाएगा।
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अलीगढ़। अलीगढ़ शहर की सेटेलाइट इमेज में लगभग तीन लाख घर गिने गए हैं। मास्टर प्लान 2031 को डिजाइन करने के वास्ते नेशनल रिमोट सेंससिंग सेंटर (एनआरएससी) हैदराबाद से कराई गई मकानों, दुकानों, गोदामों की जीआईएस मैपिंग ये बड़ी संख्या सामने आयी है। (इससे पहले नगर निगम द्वारा कराए गए सर्वे में शहरी सीमा में 2.75 लाख मकान, दुकान, गोदाम सामने आ चुके हैं। ये सर्वे स्मार्ट सिटी योजना में हुआ था) इसी सर्वे के आधार पर नया मास्टर प्लान 2031 बनाया जा रहा है। जिसमें चारों ओर तेजी से विकसित हो रहे अलग-अलग प्रोजेक्ट, 600 से अधिक अवैध कॉलोनियां, बेतरतीब औद्योगिकीकरण को समाहित कर आधुनिक शहर बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
इन समस्याओं को सुलझाने के लिए आगामी 27 नवंबर को कमिश्नरी सभागार में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। जिसकी अध्यक्षता मंडलायुक्त जीएस प्रियदर्शी करेंगे। जिसमें शहर के विकास से सीधे तालुक्क रखने वाले सभी विभागों को बुलाया गया है, जहां एक बार फिर से अलीगढ़ को गढ़ने का चुनौतीपूर्ण काम होना है, जो किसी भी लिहाज से आसान नहीं है।
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अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के एक्सईएन डीएस भदौरिया ने बताया कि आगरा अलीगढ़ मंडल के टाउन प्लानर अशोक कुमार मास्टर प्लान 2031 को तैयार करा रहे हैं। सरकार की ओर से इसकी जिम्मेदारी आल इंडिया लोकल सेल्फ गर्वमेंट नाम की एनजीओ को सौंपी गई है। टाउन प्लानर अशोक कुमार ने बताया कि उनके पास वर्तमान में आगरा और अलीगढ़ मंडल के सात शहरों का मास्टर प्लान बनवाने की जिम्मेदारी है। इसमें आगरा, मथुरा, मैनपुरी, फीरोजाबाद-शिकोहाबाद, अलीगढ़, हाथरस, एटा और कासगंज की महायोजनाएं शामिल हैं। अलीगढ़ को नया लुक देने वाली एनजीओ मुंबई को विकसित करने के साथ ही अरुणाचल प्रदेश के कई शहरों में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
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बहरहाल, वर्तमान में वर्ष 2001 में बना मास्टर प्लान 2021 लागू है, जो आने वाले कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा। नया प्लान इससे पहले तैयार होगा और राज्य सरकार की मुहर के बाद लागू होगा। यकीनन कोरोना संक्रमण काल के चलते इसको बनाने में देरी हो रही है, लेकिन एक बात काबिल ए गौर है कि स्मार्ट सिटी योजना के काम शुरू होने से पहले कभी ऐसी उच्च स्तरीय बैठक नहीं हुई, जिसमें मास्टर प्लान को लेकर भी चर्चा हुई हो, जबकि दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
ये प्रोजेक्ट होने हैं समाहित
अलीगढ़। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ट्रांसपोर्ट नगर, स्व. राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, धनीपुर हवाई पट्टी अपग्रेडेशन, स्मार्ट सिटी योजना, पैन सिटी प्रोजेक्ट, तालानगरी औद्योगिक अस्थान, आईटीआई औद्योगिक अस्थान, भदेसी में निर्माणाधीन रेलवे यार्ड, रेलवे का डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, मथुरा रोड की मीट इकाइयां, रेलवे स्टेशन विस्तार, नए और पुरान बस अड्डे, शहर के चारों ओर फोरलेन नेटवर्क, प्रस्तावित रिंग रोड।
कैसा होगा नया मास्टर प्लान 2031
अलीगढ़। अर्बन प्लानर संतोष चौधरी ने बताया कि अलीगढ़ के परंपरागत उद्योगों को बढ़ावा देने, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ ड्रेनेज, सीवरेज देना पहली प्राथमिकताओं में शुमार किया जाएगा। प्रदूषण स्तर कम कर हरियाली को बढ़ावा दिया जाएगा। शहरी आबादी में छोटे-छोटे पार्क विकसित होंगे। इमारतों पर हरियाली को बढ़ावा दिया जाएगा। मिश्रित आबादी में प्रदूषण नहीं करने वाली छोटी औद्योगिक इकाइयां चालू रहेंगी। प्रदूषण करने वाली शहर की सीमा से बाहर होंगी। उनको निकटवर्ती औद्योगिक अस्थान में जाना होगा। मथुरा रोड की मीट इकाइयां सुव्यवस्थित होंगी। लैंड यूज को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश होंगे। अवैध कॉलोनियों को वैध कराने का उपाय दिया जाएगा। नई बसावट करने वाले बिल्डरों को योजना में जोड़ा जाएगा। शहर के चारों ओर औद्योगिक अस्थान बनेंगे, उसके आसपास की इकाइयां वहां पर समाहित होंगी। इसके अलावा वर्तमान में जारी प्रोजेक्ट भी समाहित किए जाएंगे।
70 लाख रुपये में आल इंडिया लोकल
अलीगढ़। लगभग सौ वर्ष पुरानी आल इंडिया लोकल सेल्फ गर्वमेंट नाम की एनजीओ अलीगढ़ शहर का मास्टर प्लान 2031 तैयार कर रही है, जिसका मुख्यालय मुंबई और क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली में है। इस कंपनी की अर्बन प्लानर संतोष चौधरी ने बताया कि कंपनी अलीगढ़, खुर्जा और बुलंदशहर के लिए मास्टर प्लान 2031 तैयार कर रही है। जिसका अनुमानित खर्च लगभग 1.70 करोड़ रुपये है। इसमें अलीगढ़ का बजट लगभग 70 लाख के करीब है। बाकी धनराशि में दो शहर हैं। शहर को नई जरूरतों के अनुसार विकसित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने, लोगों को बेहतर पर्यावरण देने के मूल उद्देश्य के साथ मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। इसकी थीम जल्द सामने आएगी।
27 नवंबर को होगी मीटिंग
अलीगढ़। मास्टर प्लान 2031 को बेहतर ढंग से डिजाइन करने के लिए आगामी 27 नवंबर को एक आवश्यक बैठक बुलाई गई है। जिसमें नगर निगम, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट लिमिटेड, एडीए, जिला प्रशासन, टाउन प्लानर आगरा-अलीगढ़ मंडल शामिल होंगे। इस बैठक में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जलकल विभाग, बिजली विभाग, एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, जिला पंचायत, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी कार्यालय को भी बुलाया जा रहा है, ताकि आंकड़ों के साथ समग्रता से एक आधुनिक शहर का डिजाइन बन सके।
क्या हो रहा है मास्टर प्लान में..?
1-आल इंडिया लोकल सेल्फ गर्वमेंट नाम की एनजीओ बना रही मास्टर प्लान।
2-अब तक 1500 से अधिक आपत्तियां आ चुकी हैं मास्टर प्लान 2031 को लेकर।
3-चारों ओर तेजी से विकसित हो रहे शहर को मास्टर प्लान में समाहित करना चुनौती।
4-जीआईएस सर्वे से अब तक तीन लाख घरों का आंकलन किया जा चुका है।
5-केंद्र सरकार के दिशा निर्देश पर 70 चरण और 400 उपचरण में बनेगा नया प्लान।
6-नेशनल रिमोर्ट सेंससिंग सेंटर (एनआरएससी) हैदराबाद से जीआईएस मैपिंग हो रही।
7-अमृत योजना के तहत देश के 500 शहरों में मास्टर प्लान बन रहा, जिसमें 60 यूपी के।
8-अलीगढ़ मास्टर प्लान 2031 की नई थीम भी जल्द ही सामने आएगी, पर्यावरण पर जोर।
9-मिश्रित आबादी के तहत कुटीर उद्योगों को राहत, प्रदूषण फैलाने वालों को बाहर जाना होगा।
10-शहर की चारों दिशाओं में लगे उद्योगों को भी इस प्लान में एक सिस्टम में लाया जाएगा।