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अलीगढ़ : मासूम की अपहरण के बाद हत्या में हत्यारे को उम्रकैद
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हरदुआगंज के गांव नारौली में पिता द्वारा की गई बेइज्जती के बदले चार साल के मासूम की अपहरण के बाद हत्या के मामले में हत्यारे को उम्रकैद व जुर्माने से दंडित किया गया है। यह फैसला एडीजे-17 मनोज कुमार सिद्धू की अदालत से सुनाया गया है। साथ में जुर्माना राशि में से 80 फीसदी पीड़ित परिवार को देने के निर्देश दिए गए हैं।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी सुधांशु अग्रवाल के अनुसार, वादी अनिल कुमार की ओर से 25 फरवरी 2014 को हरदुआगंज में मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें कहा गया कि उनकी पत्नी अपने चार साल के बेटे नितिन उर्फ रतन को लेकर गांव में भागवत कथा सुनने गई थी।
इसी बीच बच्चा कहीं गुम हो गया, जिसकी गुमशुदगी थाने में दर्ज कराई गई। साथ में यह भी सूचना दी कि उनके पास गुम बच्चा तलाशे जाने के दौरान एक कॉल आई, जिसमें फोन करने वाले ने कहा कि आपका बच्चा गलती से हमारे घर आ गया है। इसे ले जाओ। जब उस नंबर पर वापस फोन किया गया तो वह बंद था। इसके बाद पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी गई।
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पुलिस ने फोन नंबर के आधार पर गांव के अजय कुमार को गिरफ्तार किया गया और उसकी निशानदेही से गांव के ही खेतों से बच्चे का शव तीसरे दिन बरामद किया, जिसमें उजागर हुआ कि नितिन की गला दबाकर हत्या की गई है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकारा कि नितिन के पिता अनिल कुमार उसके साथ मजाक करते थे।
कुछ दिन पहले इसी मजाक को लेकर उसका अनिल कुमार से झगड़ा हो गया था। अनिल ने उसकी बेइज्जती कर दी थी। इसी बेइज्जती का बदला लेने के लिए उसने इस घटना को अंजाम दिया। न्यायालय में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर आरोपी को दोषी करार देकर उम्रकैद व 45 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। अदालत ने 80 फीसदी जुर्माना राशि पीड़ित पक्ष को देने के आदेश दिए हैं।
अभियोजन ने मांगी फांसी
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी सुधांशु अग्रवाल के अनुसार इस घटना में धारा 364ए व 302 दोनों में ही आरोपी को मृत्युदंड या उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। साक्ष्यों व गवाही के आधार पर घटना को जघन्य माना गया है। मासूम बच्चे की गला दबाकर हत्या की गई है। इसलिए आरोपी को कम से कम मृत्युदंड की सजा सुनाई जाए। न्यायालय ने आरोपी को कठोरतम उम्रकैद की सजा से दंडित किया है।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी सुधांशु अग्रवाल के अनुसार, वादी अनिल कुमार की ओर से 25 फरवरी 2014 को हरदुआगंज में मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें कहा गया कि उनकी पत्नी अपने चार साल के बेटे नितिन उर्फ रतन को लेकर गांव में भागवत कथा सुनने गई थी।
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इसी बीच बच्चा कहीं गुम हो गया, जिसकी गुमशुदगी थाने में दर्ज कराई गई। साथ में यह भी सूचना दी कि उनके पास गुम बच्चा तलाशे जाने के दौरान एक कॉल आई, जिसमें फोन करने वाले ने कहा कि आपका बच्चा गलती से हमारे घर आ गया है। इसे ले जाओ। जब उस नंबर पर वापस फोन किया गया तो वह बंद था। इसके बाद पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी गई।
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पुलिस ने फोन नंबर के आधार पर गांव के अजय कुमार को गिरफ्तार किया गया और उसकी निशानदेही से गांव के ही खेतों से बच्चे का शव तीसरे दिन बरामद किया, जिसमें उजागर हुआ कि नितिन की गला दबाकर हत्या की गई है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकारा कि नितिन के पिता अनिल कुमार उसके साथ मजाक करते थे।
कुछ दिन पहले इसी मजाक को लेकर उसका अनिल कुमार से झगड़ा हो गया था। अनिल ने उसकी बेइज्जती कर दी थी। इसी बेइज्जती का बदला लेने के लिए उसने इस घटना को अंजाम दिया। न्यायालय में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर आरोपी को दोषी करार देकर उम्रकैद व 45 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। अदालत ने 80 फीसदी जुर्माना राशि पीड़ित पक्ष को देने के आदेश दिए हैं।
अभियोजन ने मांगी फांसी
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी सुधांशु अग्रवाल के अनुसार इस घटना में धारा 364ए व 302 दोनों में ही आरोपी को मृत्युदंड या उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। साक्ष्यों व गवाही के आधार पर घटना को जघन्य माना गया है। मासूम बच्चे की गला दबाकर हत्या की गई है। इसलिए आरोपी को कम से कम मृत्युदंड की सजा सुनाई जाए। न्यायालय ने आरोपी को कठोरतम उम्रकैद की सजा से दंडित किया है।