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अलीगढ़ : अगर कैंपस में छात्र होते तो मुख्यमंत्री का एएमयू आना इतना सहज न होता
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
अगर महामारी का दौर न होता और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों की सामान्य संख्या होती, तो क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विश्वविद्यालय में आना इतना सहज होता? इसको लेकर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अपना-अपना मत व्यक्त कर रहे हैं।
छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी कहते हैं कि इस समय परिस्थितियां दूसरी अगर सामान्य परिस्थितियां होती तो छात्र नेता कई किस्म के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को मुखर कर सकते थे। जो कि स्वाभाविक भी था। क्योंकि जिन्ना से लेकर बीफ तक कई मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी के नेता और विधायक समय-समय पर बेहद भड़काऊ और अनर्गल बयान देते रहे हैं। छात्र नेता प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस संबंध में अपना मत स्पष्ट करने की मांग कर सकते थे, लेकिन एएमयू बिरादरी वक्त की नजाकत को समझती है। इन मुद्दों पर तो कभी भी बात हो सकती है। फिलहाल तो हम सबको मिलकर महामारी से लड़ना है।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी कहते हैं कि अगर कैंपस में छात्र होते तो कई तरह के सवालों का सामना मुख्यमंत्री को करना पड़ता और सवाल ही नहीं छात्रों के आक्रामक तेवर का सामना भी मुख्यमंत्री को करना पड़ सकता था। भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं का रवैया अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को लेकर गैर जिम्मेदाराना रहा है। इसी के चलते यह सब हालात पैदा हो सकते थे, लेकिन मौजूदा हालात ऐसे हैं कि उसमें प्राथमिकताएं बदली हुई है । पहले सभी को इन जटिल परिस्थितियों से निपटना है, बाकी के गिले-शिकवे बाद में होते रहेंगे।
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अगर महामारी का दौर न होता और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों की सामान्य संख्या होती, तो क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विश्वविद्यालय में आना इतना सहज होता? इसको लेकर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अपना-अपना मत व्यक्त कर रहे हैं।
छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी कहते हैं कि इस समय परिस्थितियां दूसरी अगर सामान्य परिस्थितियां होती तो छात्र नेता कई किस्म के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को मुखर कर सकते थे। जो कि स्वाभाविक भी था। क्योंकि जिन्ना से लेकर बीफ तक कई मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी के नेता और विधायक समय-समय पर बेहद भड़काऊ और अनर्गल बयान देते रहे हैं। छात्र नेता प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस संबंध में अपना मत स्पष्ट करने की मांग कर सकते थे, लेकिन एएमयू बिरादरी वक्त की नजाकत को समझती है। इन मुद्दों पर तो कभी भी बात हो सकती है। फिलहाल तो हम सबको मिलकर महामारी से लड़ना है।
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पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी कहते हैं कि अगर कैंपस में छात्र होते तो कई तरह के सवालों का सामना मुख्यमंत्री को करना पड़ता और सवाल ही नहीं छात्रों के आक्रामक तेवर का सामना भी मुख्यमंत्री को करना पड़ सकता था। भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं का रवैया अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को लेकर गैर जिम्मेदाराना रहा है। इसी के चलते यह सब हालात पैदा हो सकते थे, लेकिन मौजूदा हालात ऐसे हैं कि उसमें प्राथमिकताएं बदली हुई है । पहले सभी को इन जटिल परिस्थितियों से निपटना है, बाकी के गिले-शिकवे बाद में होते रहेंगे।
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