{"_id":"5f7cbf588ebc3ea372521084","slug":"aligarh-hathras-connection-being-investigated-by-pfi-agents","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएफआई एजेंटों के खंगाले जा रहे अलीगढ़-हाथरस कनेक्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएफआई एजेंटों के खंगाले जा रहे अलीगढ़-हाथरस कनेक्शन
Wed, 07 Oct 2020 12:45 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Wed, 07 Oct 2020 12:45 AM IST
विज्ञापन
हाथरस कांड पर पीएफआई की फंडिंग और जातीय दंगे फैलाने की साजिश का खुलासा होने के बीच मथुरा में पीएफआई के चार एजेंट पकड़े गए हैं। एजेंसियों द्वारा इन चारों के अलीगढ़-हाथरस कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं। पूछताछ के अलावा इनसे मिले मोबाइल और दस्तावेजों के जरिये यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि इनके अलीगढ़-हाथरस जिलों में किन लोगों से संपर्क थे और ये हाथरस किस मंशा से जा रहे थे।
मथुरा पुलिस ने संदेह के आधार पर पीएफआई से जुड़े जो चार लोग दबोचे हैं, वे यूपी के मुजफ्फरनगर, बहराइच व रामपुर और केरल के रहने वाले हैं। चूंकि, जांच में व दंगे फैलाने की साजिश में यह खुलासा हुआ है कि अलीगढ़ व हाथरस जिले इस साजिश का केंद्र थे। यहां सहारनपुर जैसे दंगे कराने की साजिश थी। इस वजह से अलीगढ़-हाथरस जिले की जांच पर विशेष फोकस रखा जा रहा है। एजेंसियों का हर संभव यह प्रयास है कि आखिर किन लोगों के जरिये दोनों जिलों में यह अपने संदेश, धन पहुंचा रहे थे। आने वाले समय में इनकी क्या योजना थी। ताकि यहां स्लीपर सेल के रूप में जमे लोगों पर शिकंजा कसा जा सके।
मेडिकल कॉलेज से सफदरजंग तक मिलने आने वाले कौन थे
एजेंसियों की जांच में जेएन मेडिकल कॉलेज से लेकर सफदरजंग तक बेटी के परिवार से मिलने आने वाले लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। देखा जाएगा कि उनमें से कौन कौन लोग इस दिशा में परिवार से मिली सूचनाओं को आगे प्रसारित कर लोगों को भड़काने व बरगलाने का काम कर सकते हैं। इतना ही नहीं, अब इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि जब चंद्रशेखर आजाद मेडिकल कॉलेज में बेटी के परिवार से मिलने आए थे। उस समय कड़ा सुरक्षा घेरा रखा गया था। हालांकि, खुफिया लापरवाही के चलते वे गुप्त रास्ते से मेडिकल में प्रवेश कर गए थे। अब देखा जा रहा है कि गुप्त रास्तों को बताने में किन लोगों ने मदद की थी।
विज्ञापन
सीएए-एनआरसी विरोध के दौरान फंडिंग करने वालों पर भी ध्यान
पीएफआई की जांच के दौरान इस बात का ध्यान भी रखा जा रहा है कि सीएए-एनआरसी के विरोध के दौरान जिन लोगों ने फंडिंग की थी। उनकी अनुसूचित जाति वर्ग के इलाकों में किस तरह की घुसपैठ है। कहीं उन्हीं माध्यमों से भी इस बार तो फंडिंग नहीं की जा रही है। इसके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग के इस कांड में सक्रिय नेताओं की बराबर निगरानी रखी जा रही है। उनकी गतिविधियों पर भी ध्यान रखा जा रहा है।
गांव-गांव मुखबिरों को किया गया सक्रिय
इस कांड के अनुसार, शहरी व ग्रामीण इलाकों के अनुसूचित जाति वर्ग के इलाकों में मुखबिरों का जाल सक्रिय किया गया है। यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि उन इलाकों में क्या गतिविधियां हैं। कहीं दिन या रात में बाहरी लोगों की आवाजाही तो नहीं हो रही है। अगर वे आ रहे हैं तो किस मंशा से आ रहे हैं।
विज्ञापन
मथुरा पुलिस ने संदेह के आधार पर पीएफआई से जुड़े जो चार लोग दबोचे हैं, वे यूपी के मुजफ्फरनगर, बहराइच व रामपुर और केरल के रहने वाले हैं। चूंकि, जांच में व दंगे फैलाने की साजिश में यह खुलासा हुआ है कि अलीगढ़ व हाथरस जिले इस साजिश का केंद्र थे। यहां सहारनपुर जैसे दंगे कराने की साजिश थी। इस वजह से अलीगढ़-हाथरस जिले की जांच पर विशेष फोकस रखा जा रहा है। एजेंसियों का हर संभव यह प्रयास है कि आखिर किन लोगों के जरिये दोनों जिलों में यह अपने संदेश, धन पहुंचा रहे थे। आने वाले समय में इनकी क्या योजना थी। ताकि यहां स्लीपर सेल के रूप में जमे लोगों पर शिकंजा कसा जा सके।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज से सफदरजंग तक मिलने आने वाले कौन थे
एजेंसियों की जांच में जेएन मेडिकल कॉलेज से लेकर सफदरजंग तक बेटी के परिवार से मिलने आने वाले लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। देखा जाएगा कि उनमें से कौन कौन लोग इस दिशा में परिवार से मिली सूचनाओं को आगे प्रसारित कर लोगों को भड़काने व बरगलाने का काम कर सकते हैं। इतना ही नहीं, अब इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि जब चंद्रशेखर आजाद मेडिकल कॉलेज में बेटी के परिवार से मिलने आए थे। उस समय कड़ा सुरक्षा घेरा रखा गया था। हालांकि, खुफिया लापरवाही के चलते वे गुप्त रास्ते से मेडिकल में प्रवेश कर गए थे। अब देखा जा रहा है कि गुप्त रास्तों को बताने में किन लोगों ने मदद की थी।
विज्ञापन
सीएए-एनआरसी विरोध के दौरान फंडिंग करने वालों पर भी ध्यान
पीएफआई की जांच के दौरान इस बात का ध्यान भी रखा जा रहा है कि सीएए-एनआरसी के विरोध के दौरान जिन लोगों ने फंडिंग की थी। उनकी अनुसूचित जाति वर्ग के इलाकों में किस तरह की घुसपैठ है। कहीं उन्हीं माध्यमों से भी इस बार तो फंडिंग नहीं की जा रही है। इसके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग के इस कांड में सक्रिय नेताओं की बराबर निगरानी रखी जा रही है। उनकी गतिविधियों पर भी ध्यान रखा जा रहा है।
गांव-गांव मुखबिरों को किया गया सक्रिय
इस कांड के अनुसार, शहरी व ग्रामीण इलाकों के अनुसूचित जाति वर्ग के इलाकों में मुखबिरों का जाल सक्रिय किया गया है। यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि उन इलाकों में क्या गतिविधियां हैं। कहीं दिन या रात में बाहरी लोगों की आवाजाही तो नहीं हो रही है। अगर वे आ रहे हैं तो किस मंशा से आ रहे हैं।