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अलीगढ़ : आर्थिक क्षतिपूर्ति के प्रति निराश किसानों को पीएम फसल बीमा योजना से आस
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रविवार रात हुई बेमौसम बारिश एवं तेज हवाओं से बड़े पैमाने पर धान की फसलों में नुकसान झेलने के बाद आर्थिक क्षतिपूर्ति से वंचित किसानों का रुख प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की ओर हो गया है। अब तक इस योजना के प्रति बेरुखी दिखा रहे किसान अब इस योजना के सहारे नुकसान की भरपाई की कोशिश में लग गए हैं। इसके चलते पिछले तीन दिनों में 2657 किसानों ने आवेदन किए हैं। अब बीमा कंपनी इन आवेदनों के सत्यापन में जुट गई है।
तीन व चार अक्तूबर को हुई भारी वर्षा एवं तेज हवाओं से जिले में 9125.99 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल बर्बाद हुई थी। इससे 29142 किसानों का नुकसान हुआ। इसके लिए राजस्व टीमों के सर्वे में प्रभावित किसानों के लिए 12 करोड़ 36 लाख 93 हजार रुपये की आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रस्तावित की गई।
24 अक्तूबर को एक बार फिर बारिश ने कहर बरपाया। इससे भी बड़े पैमाने पर धान समेत अन्य फसलों का नुकसान हुआ। इसका सर्वे कराया गया तो पता चला कि पूर्व में प्रभावित किसानों के अलावा किसी नए किसान का 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान नहीं हुआ है।
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इन किसानों के लिए पहले से ही आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रस्तावित थी। ऐसे में नियमानुसार इन्हें दोबारा क्षतिपूर्ति नहीं दी जा सकती। प्रशासन की इस घोषणा से निराश किसान अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति आकर्षित हो गए हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व में हुई बारिश के बाद लगातार पांच दिन तक आवेदन मांगने के बावजूद मात्र 700 के करीब आवेदन आए थे।
अब इनकी संख्या 2657 तक पहुंच गई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामप्रवेश ने बताया कि बीमा कंपनी इन सभी आवेदनों का सत्यापन कर रही है। सत्यापन के बाद कुल नुकसान का 90 फीसदी मुआवजा किसानों के खाते में डाल दिया जाएगा।
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तीन व चार अक्तूबर को हुई भारी वर्षा एवं तेज हवाओं से जिले में 9125.99 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल बर्बाद हुई थी। इससे 29142 किसानों का नुकसान हुआ। इसके लिए राजस्व टीमों के सर्वे में प्रभावित किसानों के लिए 12 करोड़ 36 लाख 93 हजार रुपये की आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रस्तावित की गई।
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24 अक्तूबर को एक बार फिर बारिश ने कहर बरपाया। इससे भी बड़े पैमाने पर धान समेत अन्य फसलों का नुकसान हुआ। इसका सर्वे कराया गया तो पता चला कि पूर्व में प्रभावित किसानों के अलावा किसी नए किसान का 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान नहीं हुआ है।
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इन किसानों के लिए पहले से ही आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रस्तावित थी। ऐसे में नियमानुसार इन्हें दोबारा क्षतिपूर्ति नहीं दी जा सकती। प्रशासन की इस घोषणा से निराश किसान अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति आकर्षित हो गए हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व में हुई बारिश के बाद लगातार पांच दिन तक आवेदन मांगने के बावजूद मात्र 700 के करीब आवेदन आए थे।
अब इनकी संख्या 2657 तक पहुंच गई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामप्रवेश ने बताया कि बीमा कंपनी इन सभी आवेदनों का सत्यापन कर रही है। सत्यापन के बाद कुल नुकसान का 90 फीसदी मुआवजा किसानों के खाते में डाल दिया जाएगा।