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जीपीएफ घोटाला: रिकवरी कब-किससे हुई, अलीगढ़ बीएसए के बयान पर उठ रहे सवाल

Sat, 22 Mar 2025 11:10 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 22 Mar 2025 11:10 AM IST
सार

बीएसए राकेश कुमार सिंह ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा है कि गबन राशि अब सिर्फ दो करोड़ रुपये रह गई है, बाकी 2.92 करोड़ की रिकवरी हो गई है। जब बीएसए डा.राकेश सिंह से सवाल किया गया कि रिकवरी कब और किससे हुई, तो वे कुछ भी बताने के बजाय इसे शासन का मामला बताकर टाल गए।

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Aligarh BSA statement on GPF scam
घोटाला सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

अलीगढ़ जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में वर्ष 2003 से 2013 के मध्य हुए 4.92 करोड़ रुपये के जीपीएफ घोटाले में खुद मुकदमा दर्ज कराने वाले बीएसए राकेश सिंह के बयान ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ मुकदमे की विवेचना राज्य स्तरीय एजेंसी को सौंपने की कवायद चल रही है। वहीं, बीएसए ने मीडिया को बयान दे दिया कि घोटाले की रकम से 2.92 करोड़ रुपये की रिकवरी व समायोजन हो गया है।

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शहर के बन्नादेवी थाने में इस घोटाले का मुकदमा दर्ज है। पुलिस ने इसकी जांच राज्य स्तरीय एसआईटी या आर्थिक अपराध शाखा से कराए जाने की संस्तुति कर दी है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द एजेंसी जांच शुरू कर देगी। इसलिए पुलिस ने फिलहाल अपनी विवेचना को रोक दिया है। इधर, बीएसए राकेश कुमार सिंह ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा है कि शासन स्तर से हुई जांच के बाद मामले में बन्नादेवी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। गबन राशि अब सिर्फ दो करोड़ रुपये रह गई है, बाकी 2.92 करोड़ की रिकवरी हो गई है। 
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बीएसए के इस बयान से वे लोग खफा हैं, जिन्होंने इस घोटाले को उजागर किया है। आरोप यहां तक लग रहे हैं कि इस गबन पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है। जब बीएसए डा.राकेश सिंह से सवाल किया गया कि रिकवरी कब और किससे हुई, तो वे कुछ भी बताने के बजाय इसे शासन का मामला बताकर टाल गए। बोले-पुलिस जांच कर रही है, इसलिए अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

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इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हम मुख्यमंत्री से यह मांग करते हैं कि इस प्रकरण की जांच सीबीआई द्वारा कराई जाए इस प्रकरण को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। अभी तक इसमें सही जांच नहीं हुई है। इसमें 500 से अधिक शिक्षकों के जीपीएफ के पैसे का बंदर बाट किया गया है। कार्रवाई होने तक हम शांत नहीं रहेंगे।-प्रशांत शर्मा, जिलाध्यक्ष जूनियर शिक्षक संघ

बीएसए ने ऐसा बयान क्यों दिया है। इस पर उनसे सवाल जवाब किया जाएगा। ऐसे बयानों से उन्हें बचना चाहिए।-संजीव रंजन, डीएम

वीआरएस लेने वाले कर्मी की जांच कब

इस मामले में एक सवाल उस कर्मचारी को लेकर भी उठ रहा है, जिसने अपनी सेवानिवृत्ति से पहले ही वीआरएस लिया व 14 लाख रुपये का ऋण भी लिया था। इस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर शहर से टप्पल तक वसूली करने के लिए जाने का भी आरोप था। इस तथ्य को जांच में शामिल नहीं किया गया है। कब शामिल किया जाएगा। ये भी सवाल उठ रहा है।

ये है प्रकरण
बेसिक शिक्षा विभाग में सन 2003 से लेकर 20013 तक शिक्षकों के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खातों में घोटाला हुआ। इस अवधि में तैनात रहे 11 बीएसए, 30 बीईओ, 10 वित्त एवं लेखा अधिकारी समेत 61 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। वर्ष 2003 से 2013 तक 520 शिक्षकों के डमी खाते खोले गए। इसके बाद उनमें चार करोड़ 92 लाख 39 हजार 749 रुपये का लेनदेन किया गया।

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