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अलीगढ़ : अग्रसेन द्वार विवाद...रात में धरने पर बैठे पूर्व विधाय
सार
इस खबर पर कुछ ही देर में विधायक अनिल पाराशर, पूर्व मेयर शकुंतला भारती के अलावा अग्रवाल समाज के तमाम लोग भी आ गए और धरने में शामिल हो गए। ऐसे में वे मांगें पूरी होने तक धरने से नहीं हटेंगे।अंदरखाने शासन से जांच के आदेश की चर्चाहालांकि इस बात की देर रात तक अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। हालांकि अधिकारिक स्तर पर इसकी देर रात तक पुष्टि नहीं हो सकी।महापुरुष के अपमान ने बनाया मुद्दाअंदरखाने की खबर यह भी है कि इस मामले में भाजपा, संघ, विहिप सहित सभी संगठन अपर नगर आयुक्त के खिलाफ खड़े हैं।
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अलीगढ़ : नगर निगम द्वारा अग्रवाल समाज के होड़िग तोड़ने के बाद दोबारा से होर्डिंग को लगवाते नगर नि?
- फोटो : CITY OFFICE
विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
अग्रसेन स्वागत द्वार विवाद में बृहस्पतिवार को हुए घटनाक्रम के बाद शुक्रवार को दिन भर की खामोशी ने देर रात सियासी तूफान खड़ा कर दिया। वायदे के बाद भी अपर नगर आयुक्त पर मुकदमा दर्ज न होने से आहत भाजपा के पूर्व शहर क्षेत्र के विधायक संजीव राजा अग्रसेन चौक रसलगंज में जाकर धरने पर बैठ गए। इस खबर पर विधायक अनिल पाराशर, पूर्व मेयर सहित अग्र समाज के तमाम लोग भी उनके समर्थन में पहुंचकर धरने में शामिल हो गए। इस कदम ने पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फुला दिए और देर रात तक डीएम-एसएसपी सहित पूरा अमला नेताओं को मनाने में जुटा था।
बृहस्पतिवार को रसलगंज चौक पर हुए धरना व जाम के दौरान विधायक अनिल पाराशर व पूर्व विधायक संजीव राजा की मौजूदगी में अधिकारियों ने तीन मांगों पर सहमति दी थी। जिसमें पहली महाराजा अग्रसेन का अपमान करने के आरोप में अपर नगर आयुक्त पर मुकदमा, नगर निगम द्वारा स्वागत द्वार लगवाया जाना और अपर नगर आयुक्त द्वारा माफी मांगा जाना।
हालांकि किसी तरह सहायक नगर आयुक्त के माफी मांगने व अन्य दो मांगों पर वायदा किए जाने पर धरना खत्म हुआ। इसके बाद देर रात पुलिस ने अपर नगर आयुक्त की तहरीर पर अज्ञात लोगों पर मौके पर हुई अभद्रता व हाथापाई के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया, मगर अग्रवाल समाज द्वारा दी गई तहरीर पर शुक्रवार को भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
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देर रात करीब सवा दस बजे रसलगंज अग्रसेन चौक पर पूर्व विधायक संजीव राजा अपने कुछ साथियों संग पहुंचे और वहीं कुर्सी डालकर धरने पर बैठ गए। इस खबर पर कुछ ही देर में विधायक अनिल पाराशर, पूर्व मेयर शकुंतला भारती के अलावा अग्रवाल समाज के तमाम लोग भी आ गए और धरने में शामिल हो गए। इन लोगों में विशाल गर्ग, ऋषभ गर्ग, शरद बंसल आदि प्रमुख हैं। इस खबर पर एसपी सिटी, एसीएम आदि उन्हें मनाने पहुंचे। मगर देर रात समाचार लिखे जाने तक वे धरने पर ही जमे रहे। देर रात 11:30 बजे डीएम इंद्र विक्रम सिंह व एसएसपी कलानिधि नैथानी भी उन्हें मनाने पहुंच गए थे। मगर वे अपने जिद पर अड़े थे।
यह है पूर्व विधायक की दलील
पूर्व विधायक संजीव राजा के अनुसार धरना स्थल पर हुए वायदे के अनुसार सुबह से उनके पास समाज के लोग फोन कर रहे थे कि उनकी तहरीर पर मुकदमा क्यों नहीं हुआ। नगर निगम ने स्वागत द्वार नहीं लगवाए, जबकि समाज के लोग अपने धन से स्वागत द्वार दोपहर से ही बनवाने में लगे हैं। अपर नगर आयुक्त ने अभी तक माफी मांगना तो दूर नगर निगम में कर्मचारियों की लामबंदी शुरू करा दी है। जब उन्होंने समाज को बृहस्पतिवार को वायदा किया था। बावजूद इसके इन मांगों पर शुक्रवार को पूरे दिन में कोई विचार नहीं हुआ। ऐसे में वे मांगें पूरी होने तक धरने से नहीं हटेंगे।
अंदरखाने शासन से जांच के आदेश की चर्चा
हालांकि इस बात की देर रात तक अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। मगर अंदरखाने चर्चा है कि पूर्व विधायक ने इस पूरे मामले को शासन स्तर पर अवगत कराया। मुख्यमंत्री तक के संज्ञान में लाया। जिसके बाद शासन ने इस मामले में जिला प्रशासन से जांच तलब की है। पूरा ब्योरा मांगा है। हालांकि अधिकारिक स्तर पर इसकी देर रात तक पुष्टि नहीं हो सकी।
महापुरुष के अपमान ने बनाया मुद्दा
अंदरखाने की खबर यह भी है कि इस मामले में भाजपा, संघ, विहिप सहित सभी संगठन अपर नगर आयुक्त के खिलाफ खड़े हैं। उनके स्तर से इसे महापुरुष के अपमान का मुद्दा बताया गया है। यही विषय शासन व संगठन में भी उच्च स्तर तक पहुंचा है। चूंकि नगर निगम में मेयर पद पर बसपा काबिज है।
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अग्रसेन स्वागत द्वार विवाद में बृहस्पतिवार को हुए घटनाक्रम के बाद शुक्रवार को दिन भर की खामोशी ने देर रात सियासी तूफान खड़ा कर दिया। वायदे के बाद भी अपर नगर आयुक्त पर मुकदमा दर्ज न होने से आहत भाजपा के पूर्व शहर क्षेत्र के विधायक संजीव राजा अग्रसेन चौक रसलगंज में जाकर धरने पर बैठ गए। इस खबर पर विधायक अनिल पाराशर, पूर्व मेयर सहित अग्र समाज के तमाम लोग भी उनके समर्थन में पहुंचकर धरने में शामिल हो गए। इस कदम ने पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फुला दिए और देर रात तक डीएम-एसएसपी सहित पूरा अमला नेताओं को मनाने में जुटा था।
बृहस्पतिवार को रसलगंज चौक पर हुए धरना व जाम के दौरान विधायक अनिल पाराशर व पूर्व विधायक संजीव राजा की मौजूदगी में अधिकारियों ने तीन मांगों पर सहमति दी थी। जिसमें पहली महाराजा अग्रसेन का अपमान करने के आरोप में अपर नगर आयुक्त पर मुकदमा, नगर निगम द्वारा स्वागत द्वार लगवाया जाना और अपर नगर आयुक्त द्वारा माफी मांगा जाना।
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हालांकि किसी तरह सहायक नगर आयुक्त के माफी मांगने व अन्य दो मांगों पर वायदा किए जाने पर धरना खत्म हुआ। इसके बाद देर रात पुलिस ने अपर नगर आयुक्त की तहरीर पर अज्ञात लोगों पर मौके पर हुई अभद्रता व हाथापाई के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया, मगर अग्रवाल समाज द्वारा दी गई तहरीर पर शुक्रवार को भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
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देर रात करीब सवा दस बजे रसलगंज अग्रसेन चौक पर पूर्व विधायक संजीव राजा अपने कुछ साथियों संग पहुंचे और वहीं कुर्सी डालकर धरने पर बैठ गए। इस खबर पर कुछ ही देर में विधायक अनिल पाराशर, पूर्व मेयर शकुंतला भारती के अलावा अग्रवाल समाज के तमाम लोग भी आ गए और धरने में शामिल हो गए। इन लोगों में विशाल गर्ग, ऋषभ गर्ग, शरद बंसल आदि प्रमुख हैं। इस खबर पर एसपी सिटी, एसीएम आदि उन्हें मनाने पहुंचे। मगर देर रात समाचार लिखे जाने तक वे धरने पर ही जमे रहे। देर रात 11:30 बजे डीएम इंद्र विक्रम सिंह व एसएसपी कलानिधि नैथानी भी उन्हें मनाने पहुंच गए थे। मगर वे अपने जिद पर अड़े थे।
यह है पूर्व विधायक की दलील
पूर्व विधायक संजीव राजा के अनुसार धरना स्थल पर हुए वायदे के अनुसार सुबह से उनके पास समाज के लोग फोन कर रहे थे कि उनकी तहरीर पर मुकदमा क्यों नहीं हुआ। नगर निगम ने स्वागत द्वार नहीं लगवाए, जबकि समाज के लोग अपने धन से स्वागत द्वार दोपहर से ही बनवाने में लगे हैं। अपर नगर आयुक्त ने अभी तक माफी मांगना तो दूर नगर निगम में कर्मचारियों की लामबंदी शुरू करा दी है। जब उन्होंने समाज को बृहस्पतिवार को वायदा किया था। बावजूद इसके इन मांगों पर शुक्रवार को पूरे दिन में कोई विचार नहीं हुआ। ऐसे में वे मांगें पूरी होने तक धरने से नहीं हटेंगे।
अंदरखाने शासन से जांच के आदेश की चर्चा
हालांकि इस बात की देर रात तक अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। मगर अंदरखाने चर्चा है कि पूर्व विधायक ने इस पूरे मामले को शासन स्तर पर अवगत कराया। मुख्यमंत्री तक के संज्ञान में लाया। जिसके बाद शासन ने इस मामले में जिला प्रशासन से जांच तलब की है। पूरा ब्योरा मांगा है। हालांकि अधिकारिक स्तर पर इसकी देर रात तक पुष्टि नहीं हो सकी।
महापुरुष के अपमान ने बनाया मुद्दा
अंदरखाने की खबर यह भी है कि इस मामले में भाजपा, संघ, विहिप सहित सभी संगठन अपर नगर आयुक्त के खिलाफ खड़े हैं। उनके स्तर से इसे महापुरुष के अपमान का मुद्दा बताया गया है। यही विषय शासन व संगठन में भी उच्च स्तर तक पहुंचा है। चूंकि नगर निगम में मेयर पद पर बसपा काबिज है।