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अलीगढ़ : 24 घंटे में दीनदयाल अस्पताल में हो गये 123 बेड
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अब तक कबाड़ बने पंडित दीन दयाल संयुक्त चिकित्सालय के तीन वार्ड मात्र 24 घंटे की मेहनत में ही चमकने लगे हैं । 24 घंटे में ही अब तक 59 कोविड मरीजों के बेड का यह अस्पताल 123 बेड के अस्पताल में तब्दील हो गया है। 32 बेड लग गये हैं, अगले 48 घंटे में 32 और बेड लग जाएंगे। काम दिन-रात चल रहा है। ऐसे में इसके पूरे होने में कोई संदेह भी नजर नहीं आ रहा है।
करीब 21 साल पहले पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय का भवन बना था। राजस्थान के पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूजी कल्याण सिंह का सपना था कि इस अस्पताल को मेडिकल कालेज में तब्दील करा दिया जाए। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से ऐसा न हो सका। मुख्य अस्पताल परिसर से अलग 20 हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में 36-36 बेड के तीन वार्ड सालों तक कबाड़ बने रहे । यहां बेड, गद्दा व अन्य मेडिकल उपकरण धूल फांकते रहे और स्वास्थ्य विभाग सोता रहा। कोल विधायक अनिल पाराशर ने यह मुद्दा कई बार उठाया। शनिवार को पीडब्लूडी के प्रमुख सचिव और जिले के नोडल अफसर नितिन रमेश गोकर्ण ने इन खाली पड़े वार्डों की जानकारी ली तो स्वास्थ्य अफसरों में खलबली मच गई।
वह खाली वार्ड देखना चाहते थे, लेकिन चॉबियां न होने के कारण ऐसा न हो सका। महिला वार्ड की गोल सीढ़ी के पास स्थित तीनों वार्डों को कोविड मरीजों के माफिक बनाने को डीएम ने एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह को जिम्मेदारी सौंपी। एसीएम ने बताया कि सोमवार तक 32 बेड का एक वार्ड तैयार हो चुका है। मेल वार्ड के ऊपर 32 बेड का एक और वार्ड दो दिन के अंदर तैयार हो जाएगा। इस भवन में काफी जगह है। प्रशासन की कोशिश है कि यहां कम से कम 300 बेड का अस्पताल बन जाए।
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करीब 21 साल पहले पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय का भवन बना था। राजस्थान के पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूजी कल्याण सिंह का सपना था कि इस अस्पताल को मेडिकल कालेज में तब्दील करा दिया जाए। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से ऐसा न हो सका। मुख्य अस्पताल परिसर से अलग 20 हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में 36-36 बेड के तीन वार्ड सालों तक कबाड़ बने रहे । यहां बेड, गद्दा व अन्य मेडिकल उपकरण धूल फांकते रहे और स्वास्थ्य विभाग सोता रहा। कोल विधायक अनिल पाराशर ने यह मुद्दा कई बार उठाया। शनिवार को पीडब्लूडी के प्रमुख सचिव और जिले के नोडल अफसर नितिन रमेश गोकर्ण ने इन खाली पड़े वार्डों की जानकारी ली तो स्वास्थ्य अफसरों में खलबली मच गई।
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वह खाली वार्ड देखना चाहते थे, लेकिन चॉबियां न होने के कारण ऐसा न हो सका। महिला वार्ड की गोल सीढ़ी के पास स्थित तीनों वार्डों को कोविड मरीजों के माफिक बनाने को डीएम ने एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह को जिम्मेदारी सौंपी। एसीएम ने बताया कि सोमवार तक 32 बेड का एक वार्ड तैयार हो चुका है। मेल वार्ड के ऊपर 32 बेड का एक और वार्ड दो दिन के अंदर तैयार हो जाएगा। इस भवन में काफी जगह है। प्रशासन की कोशिश है कि यहां कम से कम 300 बेड का अस्पताल बन जाए।
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