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नाशा की ‘मिशन टू मार्स स्टूडेंट चैलेंज’ में चमके अलीगढ़ के नीतेश
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अग्रसेन इंटर कॉलेज हरदुआगंज में स्थापित अटल टिकरिंग लैब में प्रयोग करते बच्चे ।
- फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम, अलीगढ़।
नासा की आनलाइन प्रतियोगिता ‘मिशन टू मार्स स्टूडेंट चैलेंज’ में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अलीगढ़ के नीतेश अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहते हैं। देश की युवा पीढ़ी को वैज्ञानिक बनने के लिए किशोरावस्था से ही प्रेरित करने के लिए इसरो भी प्रयासरत है। इसका असर भी हो रहा है और स्कूली बच्चों में इंजीनियर, डाक्टर के साथ अब वैज्ञानिक बनने की चाहत पनपने लगी है। नीतेश इसका ताजातरीन उदाहरण हैं।
ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल में 10वीं कक्षा के छात्र नीतेश बताते हैं बीती 18 फरवरी को नासा ‘मिशन टू मार्स स्टूडेंट चैलेंज’ शुरू हुआ था। इस ऑनलाइन प्रतियोगिता के लिए तैयारी 18 जनवरी से हुई थी। जिसमें सभी को बताया गया था कि मंगल ग्रह तक रोवर कैसे भेजा जाएगा। वह सतह पर कैसे उतरेगा। वहां के वातावरण के साथ किस तरह तालमेल बैठाएगा। नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटिव थामस जरबचेन ने इसका प्रमाण पत्र जारी किया है। अब वह 12वीं के बाद इंडियन इंस्टीटूयट ऑफ स्पेस टैक्नालाजी तिरुवंनतपुरम से बीटेक करना उसका लक्ष्य है, बीटेक करने के बाद इसरो में जॉब करना उसका सपना है।
जिले की तीन अटल टिकरिंग लैब में प्रयोग कर रहे 340 बच्चे
स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक बनने की ललक पैदा करने के लिए अटल टिकरिंग लैब की स्थापना हो रही है। जिले में वर्तमान में तीन स्कूलों में ये लैब संचालित है, जहां 340 बच्चे वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं। डीआईओएस धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि इस लैब में विभिन्न प्रकार के इनोवेशन के माध्यम से बच्चों की वैज्ञानिक सोच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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जैसे ब्रेड बोर्ड की जानकारी, थ्री डी प्रिंटर से लाइव मॉडल बनाना, थ्री डी ड्रोन को एसेंबल कर मोबाइल एप से संचालित करना आदि। जिले के महात्मा गांधी गुरुदत्त स्मारक इंटर कॉलेज के विक्त्रस्म सिंह, प्रियांश, अग्रसेन इंटर कॉलेज की आशा गोस्वामी, शीतल रावत भी ऐसे विद्यार्थी हैं, जो मन के विचारों को वैज्ञानिक मॉडल में बदलने में लगे हैं। सरस्वती विद्या मंदिर में इस लैब की स्थापना हाल ही में हुई है। यहां पर आगामी सत्र से प्रयोग शुरू होंगे।
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नासा की आनलाइन प्रतियोगिता ‘मिशन टू मार्स स्टूडेंट चैलेंज’ में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अलीगढ़ के नीतेश अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहते हैं। देश की युवा पीढ़ी को वैज्ञानिक बनने के लिए किशोरावस्था से ही प्रेरित करने के लिए इसरो भी प्रयासरत है। इसका असर भी हो रहा है और स्कूली बच्चों में इंजीनियर, डाक्टर के साथ अब वैज्ञानिक बनने की चाहत पनपने लगी है। नीतेश इसका ताजातरीन उदाहरण हैं।
ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल में 10वीं कक्षा के छात्र नीतेश बताते हैं बीती 18 फरवरी को नासा ‘मिशन टू मार्स स्टूडेंट चैलेंज’ शुरू हुआ था। इस ऑनलाइन प्रतियोगिता के लिए तैयारी 18 जनवरी से हुई थी। जिसमें सभी को बताया गया था कि मंगल ग्रह तक रोवर कैसे भेजा जाएगा। वह सतह पर कैसे उतरेगा। वहां के वातावरण के साथ किस तरह तालमेल बैठाएगा। नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटिव थामस जरबचेन ने इसका प्रमाण पत्र जारी किया है। अब वह 12वीं के बाद इंडियन इंस्टीटूयट ऑफ स्पेस टैक्नालाजी तिरुवंनतपुरम से बीटेक करना उसका लक्ष्य है, बीटेक करने के बाद इसरो में जॉब करना उसका सपना है।
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जिले की तीन अटल टिकरिंग लैब में प्रयोग कर रहे 340 बच्चे
स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक बनने की ललक पैदा करने के लिए अटल टिकरिंग लैब की स्थापना हो रही है। जिले में वर्तमान में तीन स्कूलों में ये लैब संचालित है, जहां 340 बच्चे वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं। डीआईओएस धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि इस लैब में विभिन्न प्रकार के इनोवेशन के माध्यम से बच्चों की वैज्ञानिक सोच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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जैसे ब्रेड बोर्ड की जानकारी, थ्री डी प्रिंटर से लाइव मॉडल बनाना, थ्री डी ड्रोन को एसेंबल कर मोबाइल एप से संचालित करना आदि। जिले के महात्मा गांधी गुरुदत्त स्मारक इंटर कॉलेज के विक्त्रस्म सिंह, प्रियांश, अग्रसेन इंटर कॉलेज की आशा गोस्वामी, शीतल रावत भी ऐसे विद्यार्थी हैं, जो मन के विचारों को वैज्ञानिक मॉडल में बदलने में लगे हैं। सरस्वती विद्या मंदिर में इस लैब की स्थापना हाल ही में हुई है। यहां पर आगामी सत्र से प्रयोग शुरू होंगे।

नीतेश कुमार । ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल- फोटो : CITY OFFICE