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Board Exam: पहली बार एआई की निगरानी में होंगी कॉपी चेक, रिजल्ट पर भी पड़ेगा असर, ऐसे जांची जाएंगी कॉपियां
Thu, 19 Feb 2026 02:31 PM IST
चमन शर्मा
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Thu, 19 Feb 2026 02:31 PM IST
सार
नई व्यवस्था में परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी कॉपियां पहले स्कैन की जाएंगी। प्रत्येक कॉपी को एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिससे परीक्षार्थी की पहचान गोपनीय रहेगी। इसके बाद स्कैन की गई कॉपियां सुरक्षित सर्वर के माध्यम से सीधे परीक्षक की स्क्रीन पर उपलब्ध होंगी।
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यूपी बोर्ड उत्तर पुस्तिका।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में तकनीकी बदलाव करते हुए इस बार कॉपियों की जांच एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) निगरानी में करने का निर्णय लिया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश सहित देशभर के मूल्यांकन केंद्रों पर तैयारियां पूरी कर ली गईं।
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नई व्यवस्था में परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी कॉपियां पहले स्कैन की जाएंगी। प्रत्येक कॉपी को एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिससे परीक्षार्थी की पहचान गोपनीय रहेगी। इसके बाद स्कैन की गई कॉपियां सुरक्षित सर्वर के माध्यम से सीधे परीक्षक की स्क्रीन पर उपलब्ध होंगी। परीक्षक को लॉग-इन आईडी और पासवर्ड के जरिए सिस्टम में प्रवेश कर प्रश्नवार अंक दर्ज करने होंगे। फिलहाल यह व्यवस्था केवल 12वीं कक्षा के लिए लागू की गई है। 10वीं की कॉपियों की जांच पूर्ववत ऑफलाइन पद्धति से ही होगी।
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सीबीएसई ने अंकन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए मार्किंग स्कीम और मॉडल आंसर पहले से ही सिस्टम में अपलोड किए हैं। एआई आधारित मॉड्यूल मूल्यांकन के पैटर्न पर नजर रखेगा और असामान्य अंकन पर अलर्ट भी जारी कर सकेगा। यदि किसी प्रश्न में अंकन असामान्य रूप से कम या अधिक पाया जाता है, तो सिस्टम अलर्ट जारी कर सकता है। साथ ही कुल अंक स्वतः जुड़ जाएंगे, जिससे अंक जोड़ने में होने वाली मानवीय त्रुटियां लगभग समाप्त हो जाएंगी।
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दरअसल अब तक ऑफलाइन जांच में कई बार यह शिकायत आती रही कि एक ही प्रकार के उत्तर पर अलग-अलग परीक्षक अलग अंक दे देते थे। कुछ परीक्षक स्टेप-वाइज अंक देते थे, जबकि कुछ सीधे अंतिम उत्तर पर ही अंक देते थे। इससे आंशिक रूप से सही उत्तर लिखने वाले छात्रों को नुकसान होता था। नई प्रणाली में हर सही प्रक्रिया पर अंक देना अनिवार्य होगा। इससे मूल्यांकन अधिक समान और निष्पक्ष होने की संभावना है। स्कूल संचालकों का कहना है कि सीबीएसई का यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में अन्य कक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में भी इसी तरह की तकनीकी प्रणाली लागू किए जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
रिजल्ट पर पड़ेगा असर
भारत में सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों की संख्या उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक है। यहां नौ हजार से ज्यादा स्कूल द्वितीय व तृतीय शहरों में तेजी से बढ़े हैं। अलीगढ़ मंडल सहित प्रदेश भर में हर साल हजारों विद्यार्थी 12वीं की परीक्षा देते हैं। अलीगढ़ में विजडम पब्लिक स्कूल के सह-निदेशक अतिन अग्रवाल का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और विद्यार्थियों को उनके वास्तविक प्रदर्शन के अनुसार अंक मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। पुनर्मूल्यांकन और अंकों की विसंगतियों की शिकायतें कम हो सकती हैं। साथ ही भविष्य में डिजिटल मूल्यांकन की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।