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अलीगढ़ः भाजपा विधायक के खिलाफ गवाही देने पहुंचे एडीजी जोन
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शहर क्षेत्र से भाजपा विधायक संजीव राजा के खिलाफ दर्ज मुकदमे में गवाही देने मंगलवार को एडीजी जोन राजीव कृष्ण दीवानी न्यायालय पहुंचे। वह एडीजे-4 (एमपी/एमएलए कोर्ट) की अदालत में पेश हुए। मगर बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश का हवाला दिए जाने के कारण न्यायालय में गवाही नहीं हो सकी। अब इस मामले में 5 जनवरी अगली तारीख नियत कर दी गई है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी रविकांत शर्मा के अनुसार, थाना देहली गेट में वर्ष 2005 में तत्कालीन एसओ कप्तान सिंह चौहान की ओर से धारा 147, 148, 323, 504 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें मौजूदा विधायक संजीव राजा आरोपी हैं। इस मुकदमे में एडीजी आगरा जोन राजीव कृष्ण (आईपीएस, तत्कालीन एसपी सिटी अलीगढ़) भी गवाह हैं। इस मुकदमे का ट्रायल एमपी/एमएलए कोर्ट में चल रहा है। न्यायालय ने मंगलवार को गवाही के लिए आईपीएस राजीव कृष्ण को तलब कर रखा था। इसी नियत तारीख पर एडीजी जोन न्यायालय पहुंचे। इस दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने यह अनुरोध अर्जी न्यायालय में दी कि 24 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने माननीयों/पूर्व माननीयों के मुकदमों की सुनवाई को लेकर एक आदेश दिया है। जिसमें कहा गया है कि मजिस्ट्रेट न्यायालय में सुनवाई योग्य मुकदमों की सुनवाई सत्र न्यायालयों/अपर सत्र न्यायालयों में करने के बजाय मजिस्ट्रेट न्यायालयों में किया जाना उचित है। इसलिए इस मुकदमे की सुनवाई भी यहां न होने के बजाय मजिस्ट्रेट न्यायालय में हो। न्यायालय ने बचाव पक्ष के इस अनुरोध और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए बतौर गवाह पेश हुए राजीव कृष्ण बयान दर्ज नहीं किए और 5 जनवरी 2022 अगली तारीख नियत कर दी है।
महंगाई विरोधी जुलूस निकालने पर हुआ था मुकदमा
विधायक संजीव राजा के अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार अग्रवाल के अनुसार मुकदमे में लगे आरोपों के अनुसार भाजपा ने उस समय महंगाई के विरोध में जुलूस निकाला था। इसकी पुलिस प्रशासन से अनुमति थी। मगर पुलिस ने यह कहते हुए जुलूस रोकने का प्रयास किया था कि अनुमति वाले नियत मार्ग के अलावा दूसरे मार्ग पर जुलूस निकाला जा रहा है। इसे लेकर रोकने पर भी जुलूस न रोकने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन एसओ कप्तान सिंह चौहान की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। चूंकि, तत्कालीन एसपी सिटी राजीव कृष्ण जुलूस रोकने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे थे। इसलिए उन्हें भी गवाह बनाया गया था। मुकदमे में वादी कप्तान सिंह चौहान की गवाही हो चुकी है।
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सुप्रीम कोर्ट से आए अधिवक्ता ने दी यह दलील
इस मुकदमे में विधायक संजीव राजा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गोपाल कृष्ण, स्थानीय अधिवक्ता प्रवीन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 24 नवंबर को दिए गए आदेश का हवाला देते हुए लिखित अनुरोध दलील दी। इस पर न्यायालय ने गवाही दर्ज कराने के बजाय अभियोजन पक्ष से अपनी सहमति या असहमति देने को कहा है और 5 जनवरी तारीख नियत की है।
न्यायालय में तैनात रहा पुलिस बल
एडीजी जोन के न्यायालय में गवाही के लिए पहुंचने की खबर पर काफी संख्या में पुलिस बल दीवानी न्यायालय परिसर में तैनात रहा। इस दौरान पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने भी दीवानी के सुरक्षा इंतजामों पर कड़ी नजर रखी।
अब 10 मुकदमों की सुनवाई पर होगा निर्णय
एमपी/एमएलए कोर्ट में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी रविकांत शर्मा बताते हैं कि इस मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते गवाही नहीं हो सकी है। साथ में न्यायालय में ऐसे 10 मुकदमे माननीयों व पूर्व माननीयों के खिलाफ लंबित हैं, जो मजिस्ट्रेट न्यायालयों में सुनवाई योग्य हैं। अब इन मुकदमों पर न्यायालय स्तर से ही निर्णय लिया जाएगा। इनमें संजीव राजा के अलावा पूर्व सांसद चौ. बिजेंद्र सिंह, पूर्व विधायक जमीरउल्लाह, विधायक ठा. दलवीर सिंह से जुड़े मुकदमे भी शामिल हैं।
पूर्व सांसद के मुकदमे में भी नहीं हो सकी गवाही
इसी न्यायालय में गभाना थाने का वर्ष 2009 का आचार संहिता उल्लंघन व बिना अनुमति कार्यक्रम करने संबंधी मुकदमा पूर्व सांसद चौ.बिजेंद्र सिंह के खिलाफ भी विचाराधीन है। एडीजीसी रविकांत शर्मा के अनुसार उस मुकदमे में भी गवाही की तारीख नियत थी। पूर्व सांसद भी न्यायालय में हाजिर हुए। मगर उस मामले में भी न्यायालय में आज गवाही नहीं हो सकी है। उसमें न्यायालय ने 9 दिसंबर अगली तारीख नियत कर दी है।
पूर्व विधायक नहीं हुए हाजिर, तारीख नियत
इसी न्यायालय से पूर्व विधायक वीरेश यादव के खिलाफ न्यायालय स्तर से गैर जमानती वारंट जारी हैं। साथ में गिरफ्तारी के संबंध में डीजीपी तक को पत्र लिखा गया है। एडीजीसी रविकांत शर्मा के अनुसार इस मामले में 28 नवंबर तारीख नियत थी। मगर नियत तारीख पर न तो वे हाजिर हुए और न पुलिस ने उन्हें पेश किया है। इसलिए न्यायालय ने इस मामले में भी 9 दिसंबर तारीख नियत कर दी है। बता दें कि वीरेश पर हमला आदि के मुकदमे न्यायालय में लंबित हैं।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी रविकांत शर्मा के अनुसार, थाना देहली गेट में वर्ष 2005 में तत्कालीन एसओ कप्तान सिंह चौहान की ओर से धारा 147, 148, 323, 504 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें मौजूदा विधायक संजीव राजा आरोपी हैं। इस मुकदमे में एडीजी आगरा जोन राजीव कृष्ण (आईपीएस, तत्कालीन एसपी सिटी अलीगढ़) भी गवाह हैं। इस मुकदमे का ट्रायल एमपी/एमएलए कोर्ट में चल रहा है। न्यायालय ने मंगलवार को गवाही के लिए आईपीएस राजीव कृष्ण को तलब कर रखा था। इसी नियत तारीख पर एडीजी जोन न्यायालय पहुंचे। इस दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने यह अनुरोध अर्जी न्यायालय में दी कि 24 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने माननीयों/पूर्व माननीयों के मुकदमों की सुनवाई को लेकर एक आदेश दिया है। जिसमें कहा गया है कि मजिस्ट्रेट न्यायालय में सुनवाई योग्य मुकदमों की सुनवाई सत्र न्यायालयों/अपर सत्र न्यायालयों में करने के बजाय मजिस्ट्रेट न्यायालयों में किया जाना उचित है। इसलिए इस मुकदमे की सुनवाई भी यहां न होने के बजाय मजिस्ट्रेट न्यायालय में हो। न्यायालय ने बचाव पक्ष के इस अनुरोध और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए बतौर गवाह पेश हुए राजीव कृष्ण बयान दर्ज नहीं किए और 5 जनवरी 2022 अगली तारीख नियत कर दी है।
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महंगाई विरोधी जुलूस निकालने पर हुआ था मुकदमा
विधायक संजीव राजा के अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार अग्रवाल के अनुसार मुकदमे में लगे आरोपों के अनुसार भाजपा ने उस समय महंगाई के विरोध में जुलूस निकाला था। इसकी पुलिस प्रशासन से अनुमति थी। मगर पुलिस ने यह कहते हुए जुलूस रोकने का प्रयास किया था कि अनुमति वाले नियत मार्ग के अलावा दूसरे मार्ग पर जुलूस निकाला जा रहा है। इसे लेकर रोकने पर भी जुलूस न रोकने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन एसओ कप्तान सिंह चौहान की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। चूंकि, तत्कालीन एसपी सिटी राजीव कृष्ण जुलूस रोकने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे थे। इसलिए उन्हें भी गवाह बनाया गया था। मुकदमे में वादी कप्तान सिंह चौहान की गवाही हो चुकी है।
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सुप्रीम कोर्ट से आए अधिवक्ता ने दी यह दलील
इस मुकदमे में विधायक संजीव राजा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गोपाल कृष्ण, स्थानीय अधिवक्ता प्रवीन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 24 नवंबर को दिए गए आदेश का हवाला देते हुए लिखित अनुरोध दलील दी। इस पर न्यायालय ने गवाही दर्ज कराने के बजाय अभियोजन पक्ष से अपनी सहमति या असहमति देने को कहा है और 5 जनवरी तारीख नियत की है।
न्यायालय में तैनात रहा पुलिस बल
एडीजी जोन के न्यायालय में गवाही के लिए पहुंचने की खबर पर काफी संख्या में पुलिस बल दीवानी न्यायालय परिसर में तैनात रहा। इस दौरान पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने भी दीवानी के सुरक्षा इंतजामों पर कड़ी नजर रखी।
अब 10 मुकदमों की सुनवाई पर होगा निर्णय
एमपी/एमएलए कोर्ट में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी रविकांत शर्मा बताते हैं कि इस मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते गवाही नहीं हो सकी है। साथ में न्यायालय में ऐसे 10 मुकदमे माननीयों व पूर्व माननीयों के खिलाफ लंबित हैं, जो मजिस्ट्रेट न्यायालयों में सुनवाई योग्य हैं। अब इन मुकदमों पर न्यायालय स्तर से ही निर्णय लिया जाएगा। इनमें संजीव राजा के अलावा पूर्व सांसद चौ. बिजेंद्र सिंह, पूर्व विधायक जमीरउल्लाह, विधायक ठा. दलवीर सिंह से जुड़े मुकदमे भी शामिल हैं।
पूर्व सांसद के मुकदमे में भी नहीं हो सकी गवाही
इसी न्यायालय में गभाना थाने का वर्ष 2009 का आचार संहिता उल्लंघन व बिना अनुमति कार्यक्रम करने संबंधी मुकदमा पूर्व सांसद चौ.बिजेंद्र सिंह के खिलाफ भी विचाराधीन है। एडीजीसी रविकांत शर्मा के अनुसार उस मुकदमे में भी गवाही की तारीख नियत थी। पूर्व सांसद भी न्यायालय में हाजिर हुए। मगर उस मामले में भी न्यायालय में आज गवाही नहीं हो सकी है। उसमें न्यायालय ने 9 दिसंबर अगली तारीख नियत कर दी है।
पूर्व विधायक नहीं हुए हाजिर, तारीख नियत
इसी न्यायालय से पूर्व विधायक वीरेश यादव के खिलाफ न्यायालय स्तर से गैर जमानती वारंट जारी हैं। साथ में गिरफ्तारी के संबंध में डीजीपी तक को पत्र लिखा गया है। एडीजीसी रविकांत शर्मा के अनुसार इस मामले में 28 नवंबर तारीख नियत थी। मगर नियत तारीख पर न तो वे हाजिर हुए और न पुलिस ने उन्हें पेश किया है। इसलिए न्यायालय ने इस मामले में भी 9 दिसंबर तारीख नियत कर दी है। बता दें कि वीरेश पर हमला आदि के मुकदमे न्यायालय में लंबित हैं।