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अलीगढ़: संपत्ति विवाद में अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह को झटका, चाची सहित पांच की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
Fri, 02 Oct 2026 09:59 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Fri, 02 Oct 2026 09:59 PM IST
सार
विवाद को लेकर चंद्रचूड़ के भाई अभिमन्यु सिंह ने रोरावर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें चाची गायत्री देवी, उनके बेटे जय, बेटी अंजनी, स्वीडन के नागरिक रॉबिन, अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर, गवाह संदीप सिंह और शिवकुमार सहित एक अज्ञात व्यक्ति को नामजद किया गया था।
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अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह
- फोटो : वीडियो ग्रैब
विस्तार
पारिवारिक संपत्ति विवाद मामले में बॉलीवुड अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई अभिमन्यु सिंह को दोहरा झटका लगा है। जलालपुर स्टेट प्रॉपर्टी बंटवारे को लेकर चाची समेत सात लोगों पर दर्ज एफआईआर मामले में हाईकोर्ट ने पांच आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। दूसरी ओर, हवेली की संपत्ति से जुड़ी पुराने वसीयत को लेकर चंद्रचूड़ सिंह पक्ष की ओर से तहसीलदार न्यायालय में दाखिल रेस्टोरेशन अर्जी खारिज कर दी गई है।
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चंद्रचूड़ पक्ष का कहना है कि गिरफ्तारी पर रोक के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले की सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी। जबकि तहसील न्यायालय के मामले में एसडीएम कोर्ट में अपील दाखिल की है।
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तहसीलदार न्यायालय में अर्जी तय समय के बाद दाखिल किए जाने और समर्थन में पर्याप्त सबूत न दिए जाने के कारण खारिज हुई। अभिनेता की चाची गायत्री देवी का पक्ष सामने आया है। उनके बेटे जय सिंह ने कहा कि चंद्रचूड़ सिंह पक्ष ने जिस बिल के हस्ताक्षरों को फर्जी बताया था, उसकी हैंडराइटिंग और सिग्नेचर एक्सपर्ट से जांच कराई गई है, जिसमें सिग्नेचर सही पाए गए हैं। जय सिंह ने यह भी बताया कि एक्सपर्ट रिपोर्ट और वसीयत से जुड़े अन्य दस्तावेज व सबूत जांच अधिकारी को सौंपे जाएंगे। उन्होंने परिवार पर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया।
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विवाद को लेकर चंद्रचूड़ के भाई अभिमन्यु सिंह ने रोरावर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें चाची गायत्री देवी, उनके बेटे जय, बेटी अंजनी, स्वीडन के नागरिक रॉबिन, अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर, गवाह संदीप सिंह और शिवकुमार सहित एक अज्ञात व्यक्ति को नामजद किया गया था।
यह है मामला
चंद्रचूड़ के अनुसार, उनके दादाजी जमींदार थे। उनका निधन वर्ष 1997 में हुआ था। उनके निधन से ठीक एक दिन पहले एक फर्जी वसीयत तैयार कर ली गई, जिसके जरिये सभी बेशकीमती जमीन एक ही परिवार और दो लोगों के नाम ट्रांसफर कर दी गईं। चंद्रचूड़ के चाचा गंगा सिंह लंबे समय से स्वीडन में रहते थे और भाई की मौत के बाद जलालपुर हवेली में आकर रहने लगे थे। अक्तूबर 2025 में गंगा सिंह का निधन हो गया, जिसके बाद पुश्तैनी संपत्ति, हवेली और ट्रस्ट से जुड़ी जमीनों के कब्जे को लेकर परिवार में तनाव बढ़ गया। पैतृक संपत्ति में 1870 में बनी ऐतिहासिक हवेली द जलालपुर स्टेट भी शामिल है, जिसे लेकर दोनों पक्ष अपना दावा ठोक रहे हैं।
गिरफ्तारी पर रोक के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर की है। जिसकी सुनवाई 30 अक्तूबर को है। जबकि तहसील न्यायालय के फैसले के संबंध में एसडीएम कोर्ट में अपील की है। - पुष्पेंद्र शर्मा, सचिव, चंद्रचूड़ सिंह