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37 साल बाद फैसला : कोर्ट की निगरानी में रहेगा बुजुर्ग आरोपी
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37 साल पुराने धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने चार आरोपियों में से जीवित बचे एकमात्र आरोपी को एक वर्ष तक परिवीक्षा के तहत निगरानी में रहने का आदेश सुनाया है। इस आदेश के तहत आरोपी रिहा तो होता लेकिन प्रत्येक महीने अदालत के प्रोबेशन अधिकारी को सूचित करेगा। अदालत का प्रोबेशन अधिकारी आरोपी के चाल-चलन के संबंध में अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेगा। लंबे समय बाद इस मामले में आए फैसले की चर्चा रही।
अभियोजन अधिकारी इंद्रजीत पाल ने बताया कि 1984 में कोतवाली के रहने वाले विजय कुमार ने मुकदमा दर्ज कराया था कि बन्नादेवी क्षेत्र के कुछ लोगों ने रुपये दोगुना करने का लालच देते हुए उनसे मोटी रकम वसूल की है। बाद में इसके एवज में तयशुदा रकम नहीं दी गई है। तगादा और विवाद के बाद जब मामले का हल नहीं हुआ तो इसका मुकदमा दर्ज करा दिया गया। मुकदमा बन्नादेवी के रहने वाले विजेंद्र चौधरी सहित तीन अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराया गया। 1994 में यह मामला अदालत में ट्रायल पर आया। इसके बाद इस मामले में साक्ष्य और सुनवाई का दौर चलता रहा। इस बीच तीन आरोपियों की मृत्यु हो गई। एकमात्र आरोपी वीरेंद्र चौधरी, जिनकी उम्र इस समय 65 वर्ष है, वह अदालत की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। अदालत में वीरेंद्र चौधरी द्वारा अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया गया। इसके बाद सीजेएम करुणा सिंह ने वीरेंद्र सिंह को एक वर्ष तक परिवीक्षा में रहने के निर्देश दिए हैं।
क्या है परिवीक्षा
अधिवक्ता इंद्रजीत पाल बताते हैं कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 360 के अनुसार ऐसे सभी अपराधों के अभियुक्तों को जिनके लिए दो वर्ष से अधिक कारावास की सजा या जुर्माने के दंड का प्रावधान है, परिवीक्षा पर छोड़े जाने का लाभ दिया जा सकता है, बशर्ते कि उनकी पूर्व दोष सिद्धि न हुई हो तथा उनके अपराध का स्वरूप गंभीर न हो।
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अभियोजन अधिकारी इंद्रजीत पाल ने बताया कि 1984 में कोतवाली के रहने वाले विजय कुमार ने मुकदमा दर्ज कराया था कि बन्नादेवी क्षेत्र के कुछ लोगों ने रुपये दोगुना करने का लालच देते हुए उनसे मोटी रकम वसूल की है। बाद में इसके एवज में तयशुदा रकम नहीं दी गई है। तगादा और विवाद के बाद जब मामले का हल नहीं हुआ तो इसका मुकदमा दर्ज करा दिया गया। मुकदमा बन्नादेवी के रहने वाले विजेंद्र चौधरी सहित तीन अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराया गया। 1994 में यह मामला अदालत में ट्रायल पर आया। इसके बाद इस मामले में साक्ष्य और सुनवाई का दौर चलता रहा। इस बीच तीन आरोपियों की मृत्यु हो गई। एकमात्र आरोपी वीरेंद्र चौधरी, जिनकी उम्र इस समय 65 वर्ष है, वह अदालत की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। अदालत में वीरेंद्र चौधरी द्वारा अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया गया। इसके बाद सीजेएम करुणा सिंह ने वीरेंद्र सिंह को एक वर्ष तक परिवीक्षा में रहने के निर्देश दिए हैं।
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क्या है परिवीक्षा
अधिवक्ता इंद्रजीत पाल बताते हैं कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 360 के अनुसार ऐसे सभी अपराधों के अभियुक्तों को जिनके लिए दो वर्ष से अधिक कारावास की सजा या जुर्माने के दंड का प्रावधान है, परिवीक्षा पर छोड़े जाने का लाभ दिया जा सकता है, बशर्ते कि उनकी पूर्व दोष सिद्धि न हुई हो तथा उनके अपराध का स्वरूप गंभीर न हो।
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