महाशिवरात्रि: श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर पर सात दिन लगेगा मेला, ये होंगे कार्यक्रम
अतरौली के गांव बिजौली स्थित श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर में गोमुख, हरिद्वार, नरौरा, सोरों, गणमुक्तेश्वर, रामघाट, कछला, सांकरा, राजघाट आदि स्थानों से कांवड़िया जल लाकर बाबा पातालेश्वर महादेव पर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर के पास ही मेला लगाया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अतरौली के गांव बिजौली स्थित श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के पर्व पर शुक्रवार रात 9:15 बजे से भक्तों द्वारा जलाभिषेक शुरू हो गया। शनिवार को जलाभिषेक के लिए हजारों भक्तों का तांता लगा रहेगा। भक्तों को जलाभिषेक के दौरान कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए मंदिर कमेटी व्यवस्थाएं की गईं हैं। पुलिस व पीएसी के अलावा मंदिर कमेटी के लोग व्यवस्था संभालने में लगे हैं।
गोमुख, हरिद्वार, नरौरा, सोरों, गणमुक्तेश्वर, रामघाट, कछला, सांकरा, राजघाट आदि स्थानों से कांवड़िया जल लाकर बाबा पातालेश्वर महादेव पर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर कमेटी द्वारा भक्तों के लिए विश्राम को रात में रजाई, गद्दा के साथ फल, दूध और प्राथमिक चिकित्सा की भी व्यवस्था की गई है। शुक्रवार को नायब तहसीलदार सुरेंद्र कुमार गौतम व इंस्पेक्टर पालीमुकीमपुर ऋषिपाल सिंह ने व्यवस्थाएं देखीं।
चार दिन होंगे कार्यक्रम, सात दिन चलेगा मेला
मंदिर के पास ही मेला लगाया गया है। भक्तों के खरीदारी के लिए दुकानें लगी हैं और झूला आदि भी लगाए गए हैं। तीन दिन तक विभिन्न कार्यक्रम होंगे और सात दिन तक मेला चलेगा। हर साल भक्तों में बेहद उत्साह रहता है।
यह होंगे कार्यक्रम
- 18 फरवरी को शाम चार बजे से प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
- 19 फरवरी को सुबह 8.30 बजे पं. रविशंकर वशिष्ठ द्वारा हवन यज्ञ। शाम 7.30 बजे से दीप यज्ञ नरेश चन्द्र गुप्ता एवं रुपेंद्र खण्डेलवाल द्वारा किया जायेगा। रात 9.30 बजे से देवी जागरण होगा।
- 20 फरवरी रात्रि नौ बजे से रसिया दंगल।
- 21 फरवरी दोपहर 12 बजे से विशाल कुश्ती दंगल होगा। गैर प्रांतों के पहलवान भाग लेंगे।
बिजौली मंदिर की प्राचीन मान्यता है। सभी समाज सेवी लोगों का इस मेले के सफल आयोजन में बेहद सहयोग रहता है। मेला को लेकर लोग बेहद उत्साहित हैं।- राजेंद्रपाल शर्मा
मंदिर पर जलाभिषेक के बाद तीन दिन तक देवी जागरण, रसिया दंगल, हवन यज्ञ, कुश्ती आदि आयोजन होते हैं। जिनमें गैर प्रांतों के लोग भी शामिल होते हैं। - राजू सिंघल