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4 साल बाद अलीगढ़ से होकर दौडे़गी बुलेट ट्रेन
Aligarh
Updated Thu, 12 Jun 2014 05:30 AM IST
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अलीगढ़। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बुलेट ट्रेन संचालित करने की घोषणा उनके इसी कार्यकाल में अलीगढ़ से पूरी हो सकती है। रेल मंत्रालय ने फ्रेट कॉरिडोर वाले ट्रैक पर इस ट्रेेन को संचालित करने का प्रस्ताव तैयार किया हैं, जिसे जल्द ही अंतिम रूप प्रदान किए जाने के संकेत मिले हैं। यह इत्तफाक है कि 1800 किलोमीटर लंबे लुधियाना और कोलकाता तक फ्रेट कॉरिडोर का रास्ता अलीगढ़ से होकर जाता है। पहले इस ट्रैक पर केवल मालगाड़ियों के ही संचालन की बात कही जा रही थी लेकिन अब यात्री बुलेट ट्रेन के भी संचालन पर भी विचार किया जा रहा है। अलीगढ़ के दाउद खां में फ्रेट कॉरिडोर का हब है। बुलेट ट्रेन का ठहराव अलीगढ़ में होगा या नहीं इसका फैसला भविष्य में होगा।
दिल्ली से हावड़ा रेलवे ट्रैक अत्यधिक व्यस्त होने के चलते रेल मंत्रालय ने लुधियाना से कोलकाता के बीच फ्रेट कॉरिडोर बनाने का फैसला लिया था। इसके लिए पूरे रूट पर अतिरिक्त जमीन अधिग्रहीत करने का काम पूरा हो गया है। टूंडला से अलीगढ़ होते हुए खुर्जा तक के सेक्शन में मिट्टी भराव का काम भी पूरा हो चुका है। उसके बाद सिग्नल, रेल लाइन तथा अन्य काम को पूरा कराने की जिम्मेदारी टाटा की कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपी गई है। इसी संबंध में 10 जून को इलाहाबाद में उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में समन्वय बैठक हुई थी। जिसमें 2018 तक इस रूट को पूरा करने का फैसला लिया गया। रेलवे की केवल हस्तांतरण के काम को सावधानी से पूरा करने पर जोर दिया गया। इस दौरान फ्रेट कॉरिडोर और रेलवे के तकनीकी अधिकारियों को पूरे समय तक रहने के निर्देश दिए।
‘जापान तकनीक पर आधारित फ्रेट कॉरिडोर के रूट निर्माण को टाटा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। खुर्जा से लेकर चमरौला (टूंडला) तक 36 अंडर पास (पुल) और 4 ओवर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को अनुमोदन के लिए भेजा गया है। इन पुलों के प्रस्तावों को पास होने के लिए रेलवे मंत्रालय बोर्ड की बैठक का इंतजार है। जुलाई से काम तेजी पकड़ने लगेगा’
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- नवीन बाबू, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद
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दिल्ली से हावड़ा रेलवे ट्रैक अत्यधिक व्यस्त होने के चलते रेल मंत्रालय ने लुधियाना से कोलकाता के बीच फ्रेट कॉरिडोर बनाने का फैसला लिया था। इसके लिए पूरे रूट पर अतिरिक्त जमीन अधिग्रहीत करने का काम पूरा हो गया है। टूंडला से अलीगढ़ होते हुए खुर्जा तक के सेक्शन में मिट्टी भराव का काम भी पूरा हो चुका है। उसके बाद सिग्नल, रेल लाइन तथा अन्य काम को पूरा कराने की जिम्मेदारी टाटा की कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपी गई है। इसी संबंध में 10 जून को इलाहाबाद में उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में समन्वय बैठक हुई थी। जिसमें 2018 तक इस रूट को पूरा करने का फैसला लिया गया। रेलवे की केवल हस्तांतरण के काम को सावधानी से पूरा करने पर जोर दिया गया। इस दौरान फ्रेट कॉरिडोर और रेलवे के तकनीकी अधिकारियों को पूरे समय तक रहने के निर्देश दिए।
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‘जापान तकनीक पर आधारित फ्रेट कॉरिडोर के रूट निर्माण को टाटा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। खुर्जा से लेकर चमरौला (टूंडला) तक 36 अंडर पास (पुल) और 4 ओवर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को अनुमोदन के लिए भेजा गया है। इन पुलों के प्रस्तावों को पास होने के लिए रेलवे मंत्रालय बोर्ड की बैठक का इंतजार है। जुलाई से काम तेजी पकड़ने लगेगा’
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- नवीन बाबू, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद