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तो तकनीक की चपेट में आ सकते हैं 450 मुफ्त दाखिले
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
शहर में राइट टू एजूकेशन के तहत कान्वेंट स्कूलों की छह हजार सीटों पर मात्र 2666 आवेदन आए हैं। वहीं अधिकांश आवेदन शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों के लिए हैं। अब लॉटरी डालकर स्कूलों को आवंटित किया जाएगा। ऐसे में लगभग 450 आवेदन तकनीक की चपेट में आते दिख रहे हैं। क्योंकि इन आवेदनों में विद्यालय का विकल्प एकल है।
बता दें कि राइट टू एजूकेशन के तहत 14 साल तक के गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अधिकार है। ऐसे में राइट टू एजूकेशन के तहत गरीब बच्चों को एक विशेषाधिकार और दिया गया है कि वह निशुल्क कान्वेंट, मांटेसरी, अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा आठ तक पढ़ सकेंगे। इनकी किताबें, ड्रेस स्कूल देगा। इस बार आनलाइन 2216 और 450 ऑफलाइन आवेदन आए हैं।
इन आवेदनों में लगभग 450 आवेदन एकल विद्यालय के लिए हैं। जबकि विद्यालयों का चयन साफ्टवेयर के जरिए होता है। ऐसे में अगर इन आवेदन वाले बच्चों को मनचाहा विद्यालय नहीं मिला तो साफ्टवेयर इन बच्चों को कौन सा विद्यालय देगा। जबकि राइट टू एजूकेशन का नियम यह भी है कि बच्चे को एक किलोमीटर के दायरे में ही दाखिला देना है। ऐसे में लगभग 450 आवेदन तकनीक की चपेट में आ सकते हैं। इस संबंध में बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि साफ्टवेयर ही स्कूल आवंटन करता है।
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अगर किसी ने एक ही विकल्प भरा है तो इसका मतलब यह है कि परिजन संबंधित विद्यालय में ही दाखिला चाहते हैं। अगर विद्यालय आवंटन नहीं होता है तो आवेदन को साफ्टवेयर विकल्प नहीं देगा।
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शहर में राइट टू एजूकेशन के तहत कान्वेंट स्कूलों की छह हजार सीटों पर मात्र 2666 आवेदन आए हैं। वहीं अधिकांश आवेदन शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों के लिए हैं। अब लॉटरी डालकर स्कूलों को आवंटित किया जाएगा। ऐसे में लगभग 450 आवेदन तकनीक की चपेट में आते दिख रहे हैं। क्योंकि इन आवेदनों में विद्यालय का विकल्प एकल है।
बता दें कि राइट टू एजूकेशन के तहत 14 साल तक के गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अधिकार है। ऐसे में राइट टू एजूकेशन के तहत गरीब बच्चों को एक विशेषाधिकार और दिया गया है कि वह निशुल्क कान्वेंट, मांटेसरी, अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा आठ तक पढ़ सकेंगे। इनकी किताबें, ड्रेस स्कूल देगा। इस बार आनलाइन 2216 और 450 ऑफलाइन आवेदन आए हैं।
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इन आवेदनों में लगभग 450 आवेदन एकल विद्यालय के लिए हैं। जबकि विद्यालयों का चयन साफ्टवेयर के जरिए होता है। ऐसे में अगर इन आवेदन वाले बच्चों को मनचाहा विद्यालय नहीं मिला तो साफ्टवेयर इन बच्चों को कौन सा विद्यालय देगा। जबकि राइट टू एजूकेशन का नियम यह भी है कि बच्चे को एक किलोमीटर के दायरे में ही दाखिला देना है। ऐसे में लगभग 450 आवेदन तकनीक की चपेट में आ सकते हैं। इस संबंध में बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि साफ्टवेयर ही स्कूल आवंटन करता है।
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अगर किसी ने एक ही विकल्प भरा है तो इसका मतलब यह है कि परिजन संबंधित विद्यालय में ही दाखिला चाहते हैं। अगर विद्यालय आवंटन नहीं होता है तो आवेदन को साफ्टवेयर विकल्प नहीं देगा।