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अलीगढ़ की घनी आबाद में डेयरियां बिगाड़ रही आबोहवा
Updated Fri, 24 Nov 2017 02:50 AM IST
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शहर की घनी आबादी में डेयरियां, बिगाड़ रहीं आबो हवा
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
शहर में घनी आबादी वाले इलाकों में चल रही डेयरियां और उसके कारण पैदा होने वाली अस्वस्थकर स्थितियां अब एक बड़ी समस्या बनती जा रही हैं। नाले और नालियां ब्लाक हो रही हैं तो संक्रामक रोगों के लिए भी अनुकूल माहौल बन जाता है।
हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार के निर्देश पर नगर निगम ने कई बार डेयरी मालिकों को बुलाकर डेयरियों को शहर की सीमा से बाहर ले जाने के लिए बैठक की है, लेकिन अभी तक समस्या जस की तस है।
यह हैं कुछ मुख्य समस्या ग्रस्त इलाके
गांधी नगर, नौरंगाबाद, देहली गेट हाथी वाला पुल, सराय हकीम, मित्र नगर, फायर ब्रिगेड कॉलोनी, ऊपरकोट, खैर रोड, स्वर्ण जयंती नगर, किशनपुर, विक्रम कॉलोनी
इस तरह पैदा होती है समस्या
डेयरियों में मवेशियों का गोबर उत्पादित होता है। इस गोबर को इकट्ठा करने और उसे डेयरी से किसी दूसरी जगह ले जाने में पैसा खर्च होता है। इससे बचने के लिए अधिकांश डेयरी संचालक उसे पानी की तेज धार की सहायता से नाली या नाले में बहा देते हैं। कुछ समय बाद स्थिति यह हो जाती है कि गोबर नाले और नाली को ब्लाक कर देता है। पानी का फ्लो रुक जाता है। इसी के साथ दुर्गंध की समस्या भी बढ़ जाती है।
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डेयरियों पर हो जाती है राजनीति
हाईकोर्ट के आदेश पर डेयरियों के संबंध में निर्देश पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार के समय में ही जारी किए गए थे, लेकिन अब दलील दी जाती है कि डेयरी चूंकि एक जाति विशेष और समुदाय विशेष के लोग चलाते हैं, इसलिए उनको निशाना बनाने के लिए यह सब किया जा रहा है।
नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग रहता है मौन
नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत सड़कों पर पशु बांधने और नालियों में गोबर बहाने पर जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन निगम का स्वास्थ्य विभाग इस अधिनियम का भूले बिसरे ही इस्तेमाल करता है। संक्रामक रोगों की वजह बनता है नाली में गोबर। कई स्थानों पर देखा गया है कि नालियों में पड़े-पड़े गोबर में कीड़े पैदा हो जाते हैं। दुर्गंध के साथ-साथ यह कीड़े नई तरह की समस्या पैदा कर देते हैं। सड़े हुए गोबर में से बहुत असहनीय दुर्गंध आती है।
कानून पहले भी नजर अंदाज किया
सरदार मुकेश सैनी एडवोकेट कहते हैं कि गांधी नगर में चल रही डेयरियों के संबंध में अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। अदालत ने डेयरियों का संचालन बंद करने के निर्देश भी दिए, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं हुआ।
बोले जनता
डेयरियों का संचालन शहर से बाहर हो और पूरे नियमन के साथ हो। इनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
-रवि सैनी नगला तिकौना
सबसे पहले जो शहर की घनी आबादी में डेयरियां हैं उनके विस्थापन पर काम शुरू होना चाहिए।
-सौरभ पाराशर संगम विहार
डेयरियां अब शहर में कानून व्यवस्था की समस्या पैदा करने लगी हैं। इनकी वजह से टकराव की स्थितियां बन रही हैं।
-धनीराम नगला तिकौना
डेयरियों में मवेशियों के स्वास्थ्य परीक्षण की भी व्यवस्था होनी चाहिए। जो भी दुधारू पशु हैं उनका नियमित चेकअप हो।
-भजनलाल सुरेंद्र नगर
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
शहर में घनी आबादी वाले इलाकों में चल रही डेयरियां और उसके कारण पैदा होने वाली अस्वस्थकर स्थितियां अब एक बड़ी समस्या बनती जा रही हैं। नाले और नालियां ब्लाक हो रही हैं तो संक्रामक रोगों के लिए भी अनुकूल माहौल बन जाता है।
हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार के निर्देश पर नगर निगम ने कई बार डेयरी मालिकों को बुलाकर डेयरियों को शहर की सीमा से बाहर ले जाने के लिए बैठक की है, लेकिन अभी तक समस्या जस की तस है।
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यह हैं कुछ मुख्य समस्या ग्रस्त इलाके
गांधी नगर, नौरंगाबाद, देहली गेट हाथी वाला पुल, सराय हकीम, मित्र नगर, फायर ब्रिगेड कॉलोनी, ऊपरकोट, खैर रोड, स्वर्ण जयंती नगर, किशनपुर, विक्रम कॉलोनी
इस तरह पैदा होती है समस्या
डेयरियों में मवेशियों का गोबर उत्पादित होता है। इस गोबर को इकट्ठा करने और उसे डेयरी से किसी दूसरी जगह ले जाने में पैसा खर्च होता है। इससे बचने के लिए अधिकांश डेयरी संचालक उसे पानी की तेज धार की सहायता से नाली या नाले में बहा देते हैं। कुछ समय बाद स्थिति यह हो जाती है कि गोबर नाले और नाली को ब्लाक कर देता है। पानी का फ्लो रुक जाता है। इसी के साथ दुर्गंध की समस्या भी बढ़ जाती है।
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डेयरियों पर हो जाती है राजनीति
हाईकोर्ट के आदेश पर डेयरियों के संबंध में निर्देश पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार के समय में ही जारी किए गए थे, लेकिन अब दलील दी जाती है कि डेयरी चूंकि एक जाति विशेष और समुदाय विशेष के लोग चलाते हैं, इसलिए उनको निशाना बनाने के लिए यह सब किया जा रहा है।
नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग रहता है मौन
नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत सड़कों पर पशु बांधने और नालियों में गोबर बहाने पर जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन निगम का स्वास्थ्य विभाग इस अधिनियम का भूले बिसरे ही इस्तेमाल करता है। संक्रामक रोगों की वजह बनता है नाली में गोबर। कई स्थानों पर देखा गया है कि नालियों में पड़े-पड़े गोबर में कीड़े पैदा हो जाते हैं। दुर्गंध के साथ-साथ यह कीड़े नई तरह की समस्या पैदा कर देते हैं। सड़े हुए गोबर में से बहुत असहनीय दुर्गंध आती है।
कानून पहले भी नजर अंदाज किया
सरदार मुकेश सैनी एडवोकेट कहते हैं कि गांधी नगर में चल रही डेयरियों के संबंध में अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। अदालत ने डेयरियों का संचालन बंद करने के निर्देश भी दिए, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं हुआ।
बोले जनता
डेयरियों का संचालन शहर से बाहर हो और पूरे नियमन के साथ हो। इनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
-रवि सैनी नगला तिकौना
सबसे पहले जो शहर की घनी आबादी में डेयरियां हैं उनके विस्थापन पर काम शुरू होना चाहिए।
-सौरभ पाराशर संगम विहार
डेयरियां अब शहर में कानून व्यवस्था की समस्या पैदा करने लगी हैं। इनकी वजह से टकराव की स्थितियां बन रही हैं।
-धनीराम नगला तिकौना
डेयरियों में मवेशियों के स्वास्थ्य परीक्षण की भी व्यवस्था होनी चाहिए। जो भी दुधारू पशु हैं उनका नियमित चेकअप हो।
-भजनलाल सुरेंद्र नगर