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जेएन मेडिकल कॉलेज में सांस के मरीज अचानक बढ़े

Fri, 10 Nov 2017 02:10 AM IST
Updated Fri, 10 Nov 2017 02:10 AM IST
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जेएन मेडिकल कॉलेज में सांस के मरीज अचानक बढ़े
जेएन मेडिकल कॉलेज में सांस के मरीज अचानक बढ़े
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।

जेएन मेडिकल कॉलेज में सांस एवं दमा के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्मॉग के कारण पिछले दो दिनों में टीवी एवं चेस्ट विभाग में मरीजों की औसत संख्या 200 से बढ़कर 300 तक पहुंच गई है।

जेएन मेडिकल कॉलेज के टीवी एवं चेस्ट विभाग में औसतन 200 मरीज पहुंच रहे थे। दिल्ली एवं एनसीआर के साथ ही अलीगढ़ में स्मॉग के कारण पिछले दो-तीन दिन से यह संख्या बढ़कर 300 तक पहुंच गई है। सर्वाधिक परेशान दमा के मरीज हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक प्रो. एम हैरिस खान एवं डॉ. शमीम ने स्वीकारा कि स्मॉग के बाद मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। मेडिसन विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुजाहिद बेग ने बताया कि मेडिसन विभाग में भी स्मॉग के कारण मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
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आंख एवं स्कीन में एलर्जी के बहुत मामले आ रहे है। सांस फूलने एवं गला खराब की शिकायत सामने आ रही है। टीवी एवं चेस्ट विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. राकेश भार्गव का कहना है कि दमा के मरीज सर्वाधिक परेशान है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में भी लोग ज्यादा परेशान हो रहे है। उन्होंने कहा कि सांस के मरीज सुबह टहलने से परहेज करें। इससे स्थिति और खराब होगी। धूंध व स्मॉग के समय घर से न निकले।
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मानक से कई गुणा अधिक पहुंच गया है प्रदूषण का स्तर
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। महानगर के रिहायसी इलाके में वायु प्रदूषण का स्तर 240 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है। यह मानक से कई गुना अधिक है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक राम गोपाल ने बताया कि गुरुवार को दिन का औसत स्तर 240 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। यह स्तर आवासीय क्षेत्र ज्ञान सरोवर का है। विभाग के पास शहर के विभिन्न स्थानों पर वायु प्रदूषण स्तर जांच के लिए मशीन नहीं है। जानकारों का कहना है कि महानगर व्यवसायिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिति पहले से ही खराब है। स्मॉग के बाद स्थिति और भयावह हो गई हैं। यह अलग बात है कि वहां का स्तर मापने के लिए बोर्ड के पास मशीन नहीं है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दीपावली के मौके पर ज्ञान सरोवर आवासीय क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर 380 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकार्ड किया गया था।
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