{"_id":"5c7d84f6bdec2214254454ac","slug":"61551729910-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृमि मुक्ति अभियान को लगा बोर्ड परीक्षा का झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृमि मुक्ति अभियान को लगा बोर्ड परीक्षा का झटका
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान को बोर्ड परीक्षाओं का झटका लगा है। एक मार्च माप अप डे (छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाना) के दिन बोर्ड परीक्षा होने के चलते लक्ष्य के मुताबिक बच्चों को दवा नहीं दी जा सकी। अब विभाग ने अभियान के दौरान छूटे बच्चों को गोली देने के लिए स्कूल संचालकों को अपने स्तर से दवा देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एक वर्ष से 19 वर्ष तक की आयु के करीब 12 लाख बच्चों को पेट में कीड़े मारने की दवा एल्बेंडाजोल 400 एमजी खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। 25 फरवरी को करीब 7 लाख बच्चों को दवा खिला दी गई थी। जो बच्चे दवा खाने से छूट गए थे उनको एक मार्च को दवा खिलाई जानी थी। लेकिन एक मार्च को बोर्ड की समाज शास्त्र की परीक्षा थी।
जिसके चलते अभियान पर भी असर पड़ा। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने छूुटे हुए बच्चों के संबंध में स्कूलों को ही जिम्मेदारी सौंप दी है। वह अपने स्तर से दवा देना सुनिश्चित कर लेंगे। अभियान के प्रमुख एसीएमओ डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि प्रत्येक छह महीने पर इस गोली को खिलवाना होता है।
विज्ञापन
इस गोली के देने के बाद बच्चों में खून की कमी और पोषण स्तर में सुधार होता है। बच्चों की शारीरिक वृद्धि और वजन बढ़ाने में सहायक होता है। अन्य बीमारियों से बचने के लिए प्रतिरोधी क्षमता का विकास होता है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक सप्ताह स्कूलों में बच्चों को आयरन की गोली भी दी जाती है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान को बोर्ड परीक्षाओं का झटका लगा है। एक मार्च माप अप डे (छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाना) के दिन बोर्ड परीक्षा होने के चलते लक्ष्य के मुताबिक बच्चों को दवा नहीं दी जा सकी। अब विभाग ने अभियान के दौरान छूटे बच्चों को गोली देने के लिए स्कूल संचालकों को अपने स्तर से दवा देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एक वर्ष से 19 वर्ष तक की आयु के करीब 12 लाख बच्चों को पेट में कीड़े मारने की दवा एल्बेंडाजोल 400 एमजी खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। 25 फरवरी को करीब 7 लाख बच्चों को दवा खिला दी गई थी। जो बच्चे दवा खाने से छूट गए थे उनको एक मार्च को दवा खिलाई जानी थी। लेकिन एक मार्च को बोर्ड की समाज शास्त्र की परीक्षा थी।
विज्ञापन
जिसके चलते अभियान पर भी असर पड़ा। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने छूुटे हुए बच्चों के संबंध में स्कूलों को ही जिम्मेदारी सौंप दी है। वह अपने स्तर से दवा देना सुनिश्चित कर लेंगे। अभियान के प्रमुख एसीएमओ डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि प्रत्येक छह महीने पर इस गोली को खिलवाना होता है।
विज्ञापन
इस गोली के देने के बाद बच्चों में खून की कमी और पोषण स्तर में सुधार होता है। बच्चों की शारीरिक वृद्धि और वजन बढ़ाने में सहायक होता है। अन्य बीमारियों से बचने के लिए प्रतिरोधी क्षमता का विकास होता है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक सप्ताह स्कूलों में बच्चों को आयरन की गोली भी दी जाती है।