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मोमोज की चटनी से खराब हो रही बच्चों की सेहत
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:03 AM IST
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मोमोज की चटनी से खराब हो रही बच्चों की सेहत
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
उमस भरे मौसम में मोमोज और उसकी चटनी बच्चों की सेहत की दुश्मन बन रही है। बेहद घटिया किस्म के मोमोज और उसकी बहुत तेज मिर्च की चटनी के सेवन के चलते बच्चों की आंतों में संक्रमण के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। जिला अस्पताल सहित, अन्य सरकारी अस्पतालों व निजी क्लीनिकों पर भी इस प्रकार के मामले सामने आ रहे हैं।
यूं तो इस मौसम में संक्रामक रोगों, पेट के रोगों का होना सामान्य बात है, लेकिन पिछले दिनों जब जिला अस्पताल में एक जैसे कई मामले आए (सभी में पेट के संक्रमण होने की शिकायत पायी गई) तो डाक्टरों ने इसकी वजह जानने की शुरुआत की। उन्होंने ऐसे मरीज से पूछना शुरू किया तो पाया कि अधिकांश ने पिछले 48 से 72 घंटे के अंदर मोमोज का सेवन किया था। नई बस्ती से गुलफाम, राशिद, दानिश, कालू, नदीम (सभी की उम्र 8 से 10 वर्ष) के साथ यही पाया गया। इसी तरह शाहजमाल, रोरावर क्षेत्र से नरेश, लल्ला, अकरम, मुन्नी, साजिया के मामले में भी मोमोज का सेवन पाया गया।
कुछ बच्चों को भर्ती भी किया गया, जबकि अधिकांश की प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी कर दी गई। यहां पर स्पष्ट कर देना जरूरी है कि कुछ स्थानों पर मोमोज की गुणवत्ता बेहद घटिया पाई गई है। साथ ही साफ सफाई के मामले में भी इन पर सवाल उठते रहे हैं। इसलिए डाक्टरों की सलाह है कि बच्चों के खानपान को लेकर सावधान रहें। संभव हो तो इस तरह के खाद्य पदार्थों से दूर ही रहें।
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उमस भरे मौसम में तीखी मिर्च बच्चों के लिए ठीक नहीं
मलखान सिंह जिला अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. अनुराग कुमार राजवंशी कहते हैं कि उमस भरे मौसम में तीखी मिर्च की चटनी किसी भी प्रकार से बच्चों के लिए हितकारी नहीं है। साथ ही कुछ मोमोज वाले जो स्टफ इस्तेमाल कर रहे हैं वह बहुत ही घटिया सामग्री का होता है। सड़े हुई पत्ता गोभी, लहसुन और अदरक आदि का इनमें इस्तेमाल होता है। इसके अलावा यह मैदा के होते हैं, जो पूरी तरह बेक भी नहीं होती है।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
उमस भरे मौसम में मोमोज और उसकी चटनी बच्चों की सेहत की दुश्मन बन रही है। बेहद घटिया किस्म के मोमोज और उसकी बहुत तेज मिर्च की चटनी के सेवन के चलते बच्चों की आंतों में संक्रमण के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। जिला अस्पताल सहित, अन्य सरकारी अस्पतालों व निजी क्लीनिकों पर भी इस प्रकार के मामले सामने आ रहे हैं।
यूं तो इस मौसम में संक्रामक रोगों, पेट के रोगों का होना सामान्य बात है, लेकिन पिछले दिनों जब जिला अस्पताल में एक जैसे कई मामले आए (सभी में पेट के संक्रमण होने की शिकायत पायी गई) तो डाक्टरों ने इसकी वजह जानने की शुरुआत की। उन्होंने ऐसे मरीज से पूछना शुरू किया तो पाया कि अधिकांश ने पिछले 48 से 72 घंटे के अंदर मोमोज का सेवन किया था। नई बस्ती से गुलफाम, राशिद, दानिश, कालू, नदीम (सभी की उम्र 8 से 10 वर्ष) के साथ यही पाया गया। इसी तरह शाहजमाल, रोरावर क्षेत्र से नरेश, लल्ला, अकरम, मुन्नी, साजिया के मामले में भी मोमोज का सेवन पाया गया।
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कुछ बच्चों को भर्ती भी किया गया, जबकि अधिकांश की प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी कर दी गई। यहां पर स्पष्ट कर देना जरूरी है कि कुछ स्थानों पर मोमोज की गुणवत्ता बेहद घटिया पाई गई है। साथ ही साफ सफाई के मामले में भी इन पर सवाल उठते रहे हैं। इसलिए डाक्टरों की सलाह है कि बच्चों के खानपान को लेकर सावधान रहें। संभव हो तो इस तरह के खाद्य पदार्थों से दूर ही रहें।
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उमस भरे मौसम में तीखी मिर्च बच्चों के लिए ठीक नहीं
मलखान सिंह जिला अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. अनुराग कुमार राजवंशी कहते हैं कि उमस भरे मौसम में तीखी मिर्च की चटनी किसी भी प्रकार से बच्चों के लिए हितकारी नहीं है। साथ ही कुछ मोमोज वाले जो स्टफ इस्तेमाल कर रहे हैं वह बहुत ही घटिया सामग्री का होता है। सड़े हुई पत्ता गोभी, लहसुन और अदरक आदि का इनमें इस्तेमाल होता है। इसके अलावा यह मैदा के होते हैं, जो पूरी तरह बेक भी नहीं होती है।