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पिता को दिया लीवर
Updated Wed, 21 Jun 2017 01:27 AM IST
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पिता को लिवर देकर बेटे ने दी नई जिंदगी
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
बीमार पिता को अपना लिवर देकर जिंदगी बचाने की शानदार मिसाल पेश की है छतारी कंपाउंड के रहने वाले इंतखाब समी ने। 25 वर्षीय इंतखाब ने एएमयू से एमबीए किया है।
फादर्स डे के उपलक्ष्य में इससे शानदार उपहार पिता के लिए क्या हो सकता था। उनके पिता हाजी ए समी खां पांच साल से लिवर की बीमारी से ग्रस्त थे। इससे पूरा परिवार परेशान थे। लगातार इलाज से कोई फायदा नहीं मिला तो लिवर ट्रांसप्लांट का फैसला लिया गया।
बड़े अस्पतालों के सभी चिकित्सकों ने लीवर ट्रांसप्लांट की राय दी। उनका इलाज कर रहे चिकित्सकों में डॉ. मानव वाघावन ने ट्रांसप्लांट कराने का मशवरा दिया।
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हाजी ए समी खा के तीन पुत्र तथा एक पुत्री है। बडे़ पुत्र मोहम्मद आदिल अख्तर, दूसरे पुत्र जीशान समी, पुत्री हिजाब समी, छोटे पुत्र इंतखाब समी तथा पत्नी जाहिदा समी ने लिवर ट्रांसप्लांट कराने का फैसला लिया।
सबसे छोटे पुत्र इंतखाब समी ने अपना लिवर देने की इच्छा व्यक्त की, परंतु उनके बीमार पिता ने लिवर ट्रांसप्लांट कराने से इनकार कर दिया। दो महीने के बाद जब ज्यादा तकलीफ बढ़ी तब ट्रांसप्लांट के लिए परिवार ने राजी कर लिया।
उनका सफल ट्रांसप्लांट हो गया है और वह अब घर पर विश्राम कर रहे हैं।
मैंने अपने पिता को लिवर देकर अपने धर्म के अनुसार अपने कर्तव्य को निभाया है। ताकि घर पहले की ही तरह घर पर खुशी का वातावरण बना रहे।
इंतखाब समी
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
बीमार पिता को अपना लिवर देकर जिंदगी बचाने की शानदार मिसाल पेश की है छतारी कंपाउंड के रहने वाले इंतखाब समी ने। 25 वर्षीय इंतखाब ने एएमयू से एमबीए किया है।
फादर्स डे के उपलक्ष्य में इससे शानदार उपहार पिता के लिए क्या हो सकता था। उनके पिता हाजी ए समी खां पांच साल से लिवर की बीमारी से ग्रस्त थे। इससे पूरा परिवार परेशान थे। लगातार इलाज से कोई फायदा नहीं मिला तो लिवर ट्रांसप्लांट का फैसला लिया गया।
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बड़े अस्पतालों के सभी चिकित्सकों ने लीवर ट्रांसप्लांट की राय दी। उनका इलाज कर रहे चिकित्सकों में डॉ. मानव वाघावन ने ट्रांसप्लांट कराने का मशवरा दिया।
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हाजी ए समी खा के तीन पुत्र तथा एक पुत्री है। बडे़ पुत्र मोहम्मद आदिल अख्तर, दूसरे पुत्र जीशान समी, पुत्री हिजाब समी, छोटे पुत्र इंतखाब समी तथा पत्नी जाहिदा समी ने लिवर ट्रांसप्लांट कराने का फैसला लिया।
सबसे छोटे पुत्र इंतखाब समी ने अपना लिवर देने की इच्छा व्यक्त की, परंतु उनके बीमार पिता ने लिवर ट्रांसप्लांट कराने से इनकार कर दिया। दो महीने के बाद जब ज्यादा तकलीफ बढ़ी तब ट्रांसप्लांट के लिए परिवार ने राजी कर लिया।
उनका सफल ट्रांसप्लांट हो गया है और वह अब घर पर विश्राम कर रहे हैं।
मैंने अपने पिता को लिवर देकर अपने धर्म के अनुसार अपने कर्तव्य को निभाया है। ताकि घर पहले की ही तरह घर पर खुशी का वातावरण बना रहे।
इंतखाब समी