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Aligarh News: साथा चीनी मिल को 60 करोड़, पश्चिमी यूपी के गन्ना किसानों को साधने की कोशिश
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जिले की एक मात्र चीनी मिल साथा की नए सिरे से स्थापना के लिए 60 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। प्रदेश सरकार ने अलीगढ़ सहित बुलदंशहर, मथुरा, एटा एवं बदायूं के बड़े मुद्दे का समाधान देकर पश्चिमी यूपी के गन्ना किसानों को साधने की कोशिश की है । लंबे अरसे से किसान चीनी मिल की नये सिरे से स्थापना की मांग कर रहे थे। अब इसका बजट जारी होने से किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
जिले की पहली सहकारी चीनी मिल का वर्ष 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उद्घाटन किया था। इसकी क्षमता 12,500 क्विंटल पेराई प्रति दिन थी। इसके जर्जरहाल होने से अलीगढ़ के अलावा हाथरस, बुलंदशहर, मथुरा, बदायूं के किसान परेशान थे। विधानसभा चुनाव से पहले चार जनवरी 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिल के उच्चीकरण की घोषणा की थी। अब ये काम शुरू होने जा रहा है।
जर्जर हालत में पड़ी साथा चीनी मिल को चालू करने के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। तब भी हालत यह है कि चीनी मिल लंबे समय से बंद पड़ी हुई है। इससे गन्ना किसानों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। उन्हें गन्ना दूसरे जिलों की चीनी मिलों पर लेकर जाना पड़ रहा है। इसकी वजह से समय के साथ अतिरिक्त भाड़ा भी लगता है। मिलों की इस स्थिति के कारण जिले में गन्ने का रकबा निरंतर घट रहा है। वर्ष 2005-06 में गन्ने का रकवा 22 हजार हेक्टेयर था जो मौजूदा वर्ष में महज 4500 हेक्टेयर रह गया है।
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किसानों का संघर्ष सार्थक हुआ है। लंबे समय से जिले के गन्ना किसान साथा चीन मिल के उच्चीकरण एवं उसके नये सिरे से निर्माण की मांग करते चले आ रहे थे। मुख्यमंत्री ने करीब 14 माह पूर्व चीनी मिल के निर्माण का एलान किया था, जिसे वह पूरा करने जा रहे हैं।
- डॉ. शैलेंद्र पाल सिंह, किसान नेता।
चीनी मिल के बंद रहने से किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग हो रहा है। उन्हें जिले में चीनी मिल होने के बाद भी दूसरी चीनी मिलों तक अपना गन्ना लेकर जाना पड़ रहा था। अब मिल के उच्चीकरण के लिए बजट जारी होने से बड़ी समस्या का समाधान होगा।
- भगवान दास, खिटकारी
अब किसानों को अब अपने गन्ने को कहीं दूसरी जगह ले जाने की जरूरत नहीं होगी । सरकार ने चुनाव से पूर्व किया अपना वादा निभाकर गन्ना किसानों का दिल जीतने का काम किया है। यह जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
-गवेंद्र सिंह, दहेली
साथा चीनी मिल के उच्चीकरण के साथ ही एथनॉल प्लांट की स्थापना होने से किसानों को लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर ही उन्हें गन्ने की उपज को बेचने का मौका मिलेगा। इससे गन्ने का कम हुआ रकबा बढ़ सकेगा।
-हरीश जादौन, दहेली-रायपुर
चीनी मिल के नए सिरे से निर्माण एवं उच्चीकरण के लिए शासन के निर्देश पर डीपीआर तैयार कराकर भेजी गई थी। इसके मुताबिक शासन ने धन का आवंटन कर दिया है। इससे चीनी मिल का नये सिरे से निर्माण होगा। किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
-रमाशंकर, जीएम, दी सहकारी चीनी मिल साथा।
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खास बातें
चीनी मिल की मरम्मत पर हुआ खर्चा
वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपये
वर्ष 2018-19 में 1.10 करोड़ रुपये
वर्ष 2019-20 में 85 लाख रुपये
वर्ष 2020-21 में 1.50 करोड़ रुपये
वर्ष 2021-22 में 1.25 करोड़ रुपये
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-साथा चीनी मिल की स्थापना 1977
-स्थापना के समय पेराई क्षमता 12500 क्विंटल प्रतिदिन
-साथा मिल को आवंटित 950 हेक्टेयर क्षेत्र का गन्ना
-जिले में गन्ने का कुल रकबा 4500 हेक्टेयर
-कुल गन्ना किसान करीब 12 हजार
-कुल उत्पादन 36 लाख क्विंटल
-जिले में कुल गन्ना क्रय केंद्र- 15
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जिले की पहली सहकारी चीनी मिल का वर्ष 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उद्घाटन किया था। इसकी क्षमता 12,500 क्विंटल पेराई प्रति दिन थी। इसके जर्जरहाल होने से अलीगढ़ के अलावा हाथरस, बुलंदशहर, मथुरा, बदायूं के किसान परेशान थे। विधानसभा चुनाव से पहले चार जनवरी 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिल के उच्चीकरण की घोषणा की थी। अब ये काम शुरू होने जा रहा है।
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जर्जर हालत में पड़ी साथा चीनी मिल को चालू करने के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। तब भी हालत यह है कि चीनी मिल लंबे समय से बंद पड़ी हुई है। इससे गन्ना किसानों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। उन्हें गन्ना दूसरे जिलों की चीनी मिलों पर लेकर जाना पड़ रहा है। इसकी वजह से समय के साथ अतिरिक्त भाड़ा भी लगता है। मिलों की इस स्थिति के कारण जिले में गन्ने का रकबा निरंतर घट रहा है। वर्ष 2005-06 में गन्ने का रकवा 22 हजार हेक्टेयर था जो मौजूदा वर्ष में महज 4500 हेक्टेयर रह गया है।
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किसानों का संघर्ष सार्थक हुआ है। लंबे समय से जिले के गन्ना किसान साथा चीन मिल के उच्चीकरण एवं उसके नये सिरे से निर्माण की मांग करते चले आ रहे थे। मुख्यमंत्री ने करीब 14 माह पूर्व चीनी मिल के निर्माण का एलान किया था, जिसे वह पूरा करने जा रहे हैं।
- डॉ. शैलेंद्र पाल सिंह, किसान नेता।
चीनी मिल के बंद रहने से किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग हो रहा है। उन्हें जिले में चीनी मिल होने के बाद भी दूसरी चीनी मिलों तक अपना गन्ना लेकर जाना पड़ रहा था। अब मिल के उच्चीकरण के लिए बजट जारी होने से बड़ी समस्या का समाधान होगा।
- भगवान दास, खिटकारी
अब किसानों को अब अपने गन्ने को कहीं दूसरी जगह ले जाने की जरूरत नहीं होगी । सरकार ने चुनाव से पूर्व किया अपना वादा निभाकर गन्ना किसानों का दिल जीतने का काम किया है। यह जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
-गवेंद्र सिंह, दहेली
साथा चीनी मिल के उच्चीकरण के साथ ही एथनॉल प्लांट की स्थापना होने से किसानों को लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर ही उन्हें गन्ने की उपज को बेचने का मौका मिलेगा। इससे गन्ने का कम हुआ रकबा बढ़ सकेगा।
-हरीश जादौन, दहेली-रायपुर
चीनी मिल के नए सिरे से निर्माण एवं उच्चीकरण के लिए शासन के निर्देश पर डीपीआर तैयार कराकर भेजी गई थी। इसके मुताबिक शासन ने धन का आवंटन कर दिया है। इससे चीनी मिल का नये सिरे से निर्माण होगा। किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
-रमाशंकर, जीएम, दी सहकारी चीनी मिल साथा।
खास बातें
चीनी मिल की मरम्मत पर हुआ खर्चा
वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपये
वर्ष 2018-19 में 1.10 करोड़ रुपये
वर्ष 2019-20 में 85 लाख रुपये
वर्ष 2020-21 में 1.50 करोड़ रुपये
वर्ष 2021-22 में 1.25 करोड़ रुपये
-साथा चीनी मिल की स्थापना 1977
-स्थापना के समय पेराई क्षमता 12500 क्विंटल प्रतिदिन
-साथा मिल को आवंटित 950 हेक्टेयर क्षेत्र का गन्ना
-जिले में गन्ने का कुल रकबा 4500 हेक्टेयर
-कुल गन्ना किसान करीब 12 हजार
-कुल उत्पादन 36 लाख क्विंटल
-जिले में कुल गन्ना क्रय केंद्र- 15