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होली पर 6 साल पुराना विचित्र दुर्लभ संयोग
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2016 02:00 AM IST
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बुधवार सांयकाल 23 मार्च सूर्य अस्त के बाद प्रदोष बेला के अंतर्गत समय प्रमाण अनुसार होलिका दहन करना ही शास्त्रोक्त शुभ माना गया है। 24 मार्च को सूर्य उदय से पहले होलिका दहन करना ही शुभ है।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्था के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि इस बार होली पर छह वर्ष पुराना विचित्र दुर्लभ संयोग पड़ रहा है। उस समय भी दो दिन होलिका दहन हुआ था। इस बार होली पर भय गोचर भी विचित्र है। जो किसान और व्यापारियों को कठिन समस्या पैदा कर रहा है। शनि, मंगल का वृश्चिक राशि में संयोग उन लोगों में दिक्कत को बढ़ाने वाला है।
शनि में गुरु और राहु का गुरु चंडाल योग विद्वान, नेता, छात्र और शिक्षा से जुड़े लोगों में बेचैनी व अनिर्णय की स्थिति बनाए रखता है। यह सब संयोग मौसम का विचित्र तरीके का बनाते हैं। इस बार होली दहन का शुभ समय बुधवार शाम 7:56 से 10:55 तक, गुरुवार सुबह 3:24 से 5:25 तक शुभ समय है।
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पूजन विधि
घर के चौक पर होली रखते हैं, आंगन के बीच में चार ईंट लगाकर उस पर मिट्टी डालकर उसके ऊपर आटे गुलाल से चौक बनाते हैं। उसके ऊपर गुलरियों की बड़ी से छोटी क्रमश: माला लगाते हैं। जौ की छोटी-छोटी गड्डियां बनाते कर चौराहे की या फिर सामूहिक होली पूजकर आते हैं। उसकी होली की आग लेकर पुरुष अपने-अपने घरों को आते है। घर में रखी होली में रखकर पूज कर के विधि विधान से उसे जलाते हैं।
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श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्था के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि इस बार होली पर छह वर्ष पुराना विचित्र दुर्लभ संयोग पड़ रहा है। उस समय भी दो दिन होलिका दहन हुआ था। इस बार होली पर भय गोचर भी विचित्र है। जो किसान और व्यापारियों को कठिन समस्या पैदा कर रहा है। शनि, मंगल का वृश्चिक राशि में संयोग उन लोगों में दिक्कत को बढ़ाने वाला है।
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शनि में गुरु और राहु का गुरु चंडाल योग विद्वान, नेता, छात्र और शिक्षा से जुड़े लोगों में बेचैनी व अनिर्णय की स्थिति बनाए रखता है। यह सब संयोग मौसम का विचित्र तरीके का बनाते हैं। इस बार होली दहन का शुभ समय बुधवार शाम 7:56 से 10:55 तक, गुरुवार सुबह 3:24 से 5:25 तक शुभ समय है।
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पूजन विधि
घर के चौक पर होली रखते हैं, आंगन के बीच में चार ईंट लगाकर उस पर मिट्टी डालकर उसके ऊपर आटे गुलाल से चौक बनाते हैं। उसके ऊपर गुलरियों की बड़ी से छोटी क्रमश: माला लगाते हैं। जौ की छोटी-छोटी गड्डियां बनाते कर चौराहे की या फिर सामूहिक होली पूजकर आते हैं। उसकी होली की आग लेकर पुरुष अपने-अपने घरों को आते है। घर में रखी होली में रखकर पूज कर के विधि विधान से उसे जलाते हैं।