फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   6.22 percent vaccine going to wastage

अलीगढ़ में 6.22 फीसदी टीका हो रहा बर्बाद

Sat, 03 Apr 2021 01:44 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Apr 2021 01:44 AM IST
विज्ञापन
6.22 percent vaccine going to wastage
कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
विज्ञापन

कोरोना वायरस के विरुद्ध टीका कारगर हथियार है लेकिन जिले में औसतन 6.22 प्रतिशत टीका बर्बाद हो रहा है। इसमें 5.24 प्रतिशत कोविशील्ड एवं 7.21 प्रतिशत कोवाक्सिन टीके की बर्बादी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इसका प्रमुख कारण यह है कि लोग एक साथ टीका लगवाने नहीं आ रहे हैं। शीशी एक बार खुलने पर चार घंटे तक ही डोज इस्तेमाल की जा सकती है।
कोराना टीकाकरण के शुरूआती दिनों में टीके की बर्बादी के मामले में अलीगढ़ जनपद शीर्ष पर था। उस समय 42 प्रतिशत टीका बर्बाद हो रहा था। मार्च में मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष यह मुद्दा उठा था। केंद्र व राज्य सरकार की सख्ती के बाद कोरोना टीके से संबंधित रिपोर्ट प्रतिदिन मांगी जाने लगी। वर्तमान में देश में टीके की बर्बादी का औसत 6.5 प्रतिशत है। जबकि उत्तर प्रदेश का औसत 9.4 प्रतिशत है यानी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय औसत से भी अधिक टीका बर्बाद हो रहा है।
विज्ञापन

सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि जनपद में कोविशील्ड एवं कोवाक्सिन टीके की बर्बादी की दर क्रमश: 5.24 और 7.21 प्रतिशत है। बर्बादी का प्रमुख कारण एक साथ लोगों का टीकाकरण के लिए न पहुंचना है। जनपद में अब तक 93 हजार से अधिक लोगों को टीका लग चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे बर्बाद हो रहा है टीका
जनपद में कोविशील्ड एवं कोवाक्सिन टीका लग रहा है। कोवाक्सिन की तुलना में कोविशील्ड टीका अधिक संख्या में लगाया जा रहा है। वर्तमान में जेएन मेडिकल कॉलेज, मलखान सिंह जिला अस्पताल, छर्रा, इगलास एवं चंडौस स्वास्थ्य केंद्रों में कोवाक्सिन टीका लग रहा है। जबकि शेष स्वास्थ्य केंद्रों पर कोविशील्ड टीका लगाया जा रहा है।
कोवाक्सिन टीके की बर्बादी का एक प्रमुख कारण यह है कि पहले इसकी एक शीशी में बीस डोज होते थे। एक साथ बीस लोगों के नहीं पहुंचने पर डोज बर्बाद हो जाते थे। शीशी खुलने के चार घंटे बाद टीका इस्तेमाल नहीं होता है। इसलिए बर्बादी का प्रतिशत बढ़ जाता है। लेकिन अब कोवाक्सिन की शीशी में दस डोज आ रही हैं। कोविशील्ड की एक शीशी में पहले से ही दस डोज आ रही हैं।

कोवाक्सिन का जेएन मेडिकल कॉलेज में हो चुका ट्रायल
टीकाकरण शुरू होने के पहले कोवाक्सिन का जेएन मेडिकल कॉलेज में ट्रायल हुआ था। अलग-अलग क्षेत्र के एक हजार लोगों को ट्रॉयल में शामिल किया गया था। शुरुआती दिनों में यहां कोवाक्सिन की सबसे अधिक बर्बादी हुई थी। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने जेएन मेडिकल कॉलेज से स्पष्टीकरण भी मांगा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed